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  • मारुति सुजुकी की पहली इलेक्ट्रिक SUV E-Vitara लॉन्च के करीब, शेयर कीमत 12,800 के पार पहुंची।

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    सरकार की नई आपूर्ति रणनीति और EV लॉन्च की खबर से मारुति सुजुकी के शेयरों में दिखा जबरदस्त उछाल, रेयर-अर्थ संकट के बावजूद EV लॉन्च को लेकर बनी उम्मीदें।

    नई दिल्ली, 18 जून 2025: देश की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) अब अपनी पहली इलेक्ट्रिक SUV E-Vitara को लॉन्च करने के लिए पूरी तरह तैयार है। बुधवार को कंपनी के शेयरों में 2 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई और यह कीमत 12,841 रुपये तक पहुंच गई। इस तेजी की वजह केंद्र सरकार द्वारा रेयर-अर्थ मैग्नेट्स की वैकल्पिक सोर्सिंग को लेकर की जा रही रणनीतिक पहल है।

    रेयर-अर्थ संकट के बीच EV लॉन्च की तैयारी
    मारुति सुजुकी की पहली इलेक्ट्रिक गाड़ी E-Vitara को लेकर काफी समय से बाजार में उत्सुकता बनी हुई है, लेकिन रेयर-अर्थ मैग्नेट्स की कमी के चलते इसकी लॉन्चिंग में देरी हो रही थी। चीन की ओर से इन मैटेरियल्स के एक्सपोर्ट पर लगे प्रतिबंध ने भारतीय ऑटो इंडस्ट्री को चिंतित कर दिया था।

    लेकिन अब भारत सरकार ने ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चिली और अर्जेंटीना जैसे देशों से वैकल्पिक आपूर्ति के लिए बातचीत शुरू कर दी है। इससे उम्मीद है कि E-Vitara का उत्पादन और लॉन्चिंग जल्द शुरू हो सकेगी।

    शेयर बाजार में दिखा पॉजिटिव असर
    सरकार की इन रणनीतियों और मारुति की EV लॉन्च खबर के चलते NSE पर कंपनी के शेयर सुबह करीब 10 बजे 12,839 रुपये तक पहुंच गए।
    इस साल की शुरुआत से अब तक मारुति सुजुकी के शेयरों में करीब 19% की तेजी आ चुकी है, जो निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।

    क्या है E-Vitara का महत्व?
    E-Vitara मारुति की पहली मेनस्ट्रीम इलेक्ट्रिक SUV होगी, जो टाटा और महिंद्रा जैसे ब्रांड्स के मुकाबले कंपनी की EV सेगमेंट में एंट्री को दर्शाती है। कंपनी इस मॉडल को घरेलू बाजार के साथ-साथ ग्लोबल मार्केट में भी पेश करने की योजना बना रही है।

    चीन पर निर्भरता और भारत की तैयारी
    वर्तमान में भारत अपनी रेयर-अर्थ की ज़रूरतों का लगभग 80% आयात करता है और इसमें से अधिकतर चीन से आता है। दुनिया के 60% से ज्यादा रेयर-अर्थ का उत्पादन और 90% रिफाइनिंग चीन में होती है।

    हालांकि, अच्छी बात यह है कि भारत में अभी भी बिकने वाली 95% से अधिक गाड़ियों में ICE (Internal Combustion Engine) होता है, जिससे फिलहाल ऑटो सेक्टर पर प्रभाव सीमित रहा है।

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