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  • भारत का एक दांव, पाकिस्तान के साथ उसका दोस्त चीन भी हुआ चित्त, लगातार हो रहा अरबों का नुकसान।

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    10 मई को भारत-पाकिस्तान ने युद्धविराम का ऐलान किया. अमेरिका ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई और उसके बाद से चीनी डिफेंस शेयरों में भारी गिरावट देखी जा रही है.

    भारत-पाकिस्तान में जब तनाव बढ़ा और स्थिति युद्ध जैसी हुई तो, इसका सबसे ज्यादा फायदा चीन को मिला. जब तक दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी रही, चीन का स्टॉक मार्केट, खासतौर से डिफेंस स्टॉक्स में बड़ी तेजी देखने को मिली. लेकिन, अब जब दोनों देशों ने युद्धविराम का ऐलान कर दिया है, तो चीन के डिफेंस स्टॉक्स एक बार फिर गिरावट देखने को मिल रही है.

    युद्ध की आशंका से चीनी शेयरों में था बूम
    भारत-पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए संघर्ष के बाद निवेशकों को लगा था कि चीन, पाकिस्तान को और ज्यादा हथियार सप्लाई करेगा. इस उम्मीद ने चीनी डिफेंस कंपनियों के शेयरों को ऊपर ले जाने में मदद की.

    8 मई को AVIC चेंगदू एयरक्राफ्ट (जो पाकिस्तान को J-10C फाइटर जेट सप्लाई करता है) के शेयर 16 फीसदी तक चढ़ गए थे. वहीं, AVIC एयरोस्पेस (मिलिट्री प्लेन और हेलिकॉप्टर बनाती है) के शेयर भी 6 फीसदी से ज्यादा बढ़े थे. यहां तक कि चाइना स्टेट शिपबिल्डिंग कॉर्पोरेशन (जो पाकिस्तान को नौसैनिक जहाज देता है) के शेयर भी ऊपर थे.

    युद्धविराम और शेयर धड़ाम
    10 मई को भारत-पाकिस्तान ने युद्धविराम का ऐलान किया. अमेरिका ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई और उसके बाद से चीनी डिफेंस शेयरों में भारी गिरावट देखी जा रही है. AVIC चेंगदू एयरक्राफ्ट के शेयर 7.4 फीसदी तक गिर गए. चाइना स्टेट शिपबिल्डिंग के शेयर भी 4 फीसदी से ज्यादा लुढ़क गए. Zhuzhou Hongda Electronics (मिलिट्री इलेक्ट्रॉनिक्स बनाती है) के शेयर भी 6.34 फीसदी नीचे आ गए.

    चीन-पाकिस्तान का सैन्य रिश्ता कितना मजबूत?
    पाकिस्तान लंबे समय से चीन से हथियार खरीदता आया है. SIPRI के आंकड़ों के मुताबिक, 2019-2023 के बीच पाकिस्तान ने चीन से 5.28 अरब डॉलर के हथियार खरीदे. पाकिस्तान के कुल आयात का 81 फीसदी चीन से आता है. यहां तक कि पाकिस्तान को चीन से JF-17 थंडर जेट, SH-15 आर्टिलरी गन और नौसैनिक जहाज मिलते हैं.

    CPEC का कनेक्शन?
    चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत चीन पाकिस्तान में 60 अरब डॉलर का निवेश कर रहा है. इस प्रोजेक्ट में चीनी कर्मियों और संपत्तियों की सुरक्षा भी शामिल है, जिसके लिए पाकिस्तान को और हथियारों की जरूरत पड़ सकती है.

    डिफेंस कंपनियों को झटका लगा?
    जब तक भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बना रहता, चीन के डिफेंस एक्सपोर्ट बढ़ने की संभावना थी. लेकिन अब युद्धविराम होने से यह उम्मीद कमजोर पड़ गई है और इसका सीधा असर चीनी शेयर बाजार पर पड़ा है.

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