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  • लोगों की मौत के बाद भी चिन्नास्वामी स्टेडियम में चलता रहा RCB का जश्न, सोशल मीडिया पर उठे सवाल।

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    RCB की जीत के सेलिब्रेशन के दौरान भगदड़ में गई कई लोगों की जान, सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा।

    बेंगलुरु: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2025 की विजेता रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने बुधवार, 4 जून को एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में जीत का जश्न मनाया। लेकिन इस जश्न के दौरान एक बेहद दुखद घटना घट गई। स्टेडियम के बाहर उमड़ी भारी भीड़ में भगदड़ मच गई, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई। इसके बावजूद स्टेडियम के अंदर जश्न जारी रहा, जिससे सोशल मीडिया पर आरसीबी और प्रशासन को लेकर तीखी आलोचना हो रही है।

    विराट कोहली ट्रॉफी के साथ, बाहर अफरा-तफरी
    टीम की जीत का जश्न मनाने के लिए बेंगलुरु की सड़कों पर हजारों की संख्या में फैंस उमड़ पड़े। विराट कोहली, जो बस में ट्रॉफी के साथ सबसे आगे बैठे थे, को देखने के लिए भारी भीड़ जुटी। अनुष्का शर्मा ने इस पल के कई वीडियो इंस्टाग्राम पर भी साझा किए। लेकिन जैसे ही शाम करीब 6 बजे के आसपास भगदड़ की खबरें आईं, सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा भड़क गया।

    सोशल मीडिया पर फूटा जन आक्रोश
    एक यूजर ने लिखा: “1 परेड, 0 दिमाग, और अब 7 अंतिम संस्कार। किस तरह के बेवकूफ बिना बैरिकेड्स और प्लानिंग के ऐसा आयोजन करते हैं?

    एक अन्य ने विराट कोहली की तस्वीर साझा करते हुए कहा: “बाहर लोग मर रहे थे, और अंदर जश्न चल रहा था।”

    लोगों का सवाल यह भी है कि यदि खिलाड़ियों को इसकी जानकारी नहीं थी, तो प्रशासन और आयोजन समिति को भी इसकी भनक क्यों नहीं लगी?

    आरसीबी का आधिकारिक बयान
    घटना के बाद RCB ने एक स्टेटमेंट जारी किया, जिसमें लिखा गया:
    हम मीडिया रिपोर्ट्स के ज़रिए सामने आई इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से बेहद दुखी हैं। सभी की सुरक्षा और सेहत हमारे लिए सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण है। RCB जानमाल के नुकसान पर गहरा शोक व्यक्त करती है और प्रभावित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना जाहिर करती है। स्थिति की जानकारी मिलते ही हमने अपने कार्यक्रम में आवश्यक संशोधन किए और स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन किया।”

    RCB ट्रॉफी जश्न 2025

    क्या कहता है प्रशासन?
    हालांकि आरसीबी की ओर से संवेदना जाहिर की गई, लेकिन प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था में चूक, भीड़ नियंत्रण की असफलता, और समय पर प्रतिक्रिया न देने को लेकर राज्य सरकार और स्थानीय अधिकारियों की आलोचना हो रही है।

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