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EMI कम होने से लोन धारकों में खुशी, जबकि फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) निवेशकों को मिलेगा कम रिटर्न।
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मौद्रिक नीति की समीक्षा के तहत रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट की कटौती कर इसे 5.50% कर दिया है। यह इस वर्ष की लगातार तीसरी कटौती है।
जहां एक ओर इससे लोन लेने वालों को बड़ी राहत मिलने वाली है, वहीं दूसरी ओर FD (फिक्स्ड डिपॉजिट) में निवेश करने वालों के लिए यह खबर चिंता का कारण बन सकती है।
रेपो रेट कम होने का क्या होगा असर?
१. रेपो रेट कम होने से बैंकों से लिए जाने वाले लोन सस्ते हो जाते हैं।
२. इसका सीधा फायदा उन ग्राहकों को मिलेगा जिनका लोन पहले से चल रहा है या जो नया लोन लेने की योजना बना रहे हैं।
३. इससे EMI (मासिक किस्त) कम हो जाएगी और लोन की ब्याज दरों में कटौती होगी।
FD निवेशकों को होगा नुकसान
१. हालांकि, FD में निवेश करने वालों के लिए यह खबर अच्छी नहीं है।
२. रेपो रेट में कटौती का असर FD की ब्याज दरों पर पड़ता है।
३. बैंक धीरे-धीरे फिक्स्ड डिपॉजिट पर इंटरेस्ट रेट घटाते हैं, जिससे रिटर्न कम मिलने लगता है।
SBI रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2025 से अब तक FD रेट्स में 30-70 बेसिस पॉइंट की गिरावट देखी गई है।
इसके अलावा, सेविंग बैंक अकाउंट्स पर मिलने वाला ब्याज भी घटा है।
अब निवेशकों को क्या करना चाहिए?
१. फिलहाल, कई बैंक अब भी FD पर बेहतर रिटर्न दे रहे हैं।
२. निवेशक बिना देर किए अभी उच्च ब्याज दर वाली FD में निवेश कर सकते हैं।
३. कई स्मॉल फाइनेंस बैंक अभी भी 8% या उससे अधिक ब्याज दे रहे हैं।
सावधानी बरतें:
१. स्मॉल फाइनेंस बैंकों में FD करने से पहले यह जरूर जांच लें कि आपका निवेश DICGC के 5 लाख रुपये के बीमा कवर के अंतर्गत है या नहीं।
२. FD में लॉन्ग टर्म निवेश के लिए यह समय अच्छा हो सकता है क्योंकि आने वाले महीनों में ब्याज दर और कम हो सकती है।
लोन लेने वालों के लिए सुनहरा मौका
१. जिन ग्राहकों का होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन चल रहा है, उनकी EMI में कमी आएगी।
२. नया लोन लेने वालों के लिए भी यह सस्ता लोन पाने का अच्छा मौका है।
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