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  • तीसरे विश्व युद्ध की तैयारी में जुटा चीन? पेंटागन से 10 गुना बड़ी सीक्रेट मिलिट्री सिटी बना रहा ड्रैगन।

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    बीजिंग के पास चीन बना रहा है दुनिया का सबसे बड़ा गुप्त सैन्य बेस, जो परमाणु हमलों से सुरक्षित और तीसरे विश्व युद्ध के हालात में कमांड सेंटर बन सकता है। अमेरिका के पेंटागन से 10 गुना बड़ा यह प्रोजेक्ट दुनिया के लिए खतरे की घंटी।

    बीजिंग: चीन की नई सैन्य गतिविधियों ने एक बार फिर वैश्विक सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन अपनी राजधानी बीजिंग के करीब 20 मील दक्षिण-पश्चिम में एक गुप्त सैन्य शहर (सीक्रेट मिलिट्री सिटी) का निर्माण कर रहा है, जो आकार में अमेरिका के पेंटागन से भी 10 गुना बड़ा बताया जा रहा है।

    क्या तीसरे विश्व युद्ध की तैयारी कर रहा है चीन?
    अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह जगह केवल एक सैन्य मुख्यालय नहीं बल्कि परमाणु युद्ध जैसे आपातकालीन हालातों में कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के तौर पर काम करेगी। अमेरिका के खुफिया सूत्रों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट चीन की दीर्घकालिक युद्ध रणनीति का हिस्सा है।

    क्या है इस सीक्रेट सिटी की खासियत?
    इस मिलिट्री सिटी में गहरे भूमिगत बंकर, सुरंगों का जाल, और वॉटरप्रूफ बाउंड्रीवॉल बनाए जा रहे हैं। यहां आम नागरिकों की एंट्री पूरी तरह बैन है और ड्रोन या कैमरा जैसे उपकरणों पर भी सख्त पाबंदी है।
    यह मिलिट्री सिटी चीन के वेस्टर्न हिल्स कॉम्प्लेक्स की जगह ले सकती है, जो अभी चीन का मुख्य सैन्य केंद्र माना जाता है।

    परमाणु हमलों से बचाव के इंतजाम
    विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ परमाणु हथियार रखना ही काफी नहीं है, बल्कि उनसे बचाव के लिए भी रणनीतिक तैयारी जरूरी होती है। यही वजह है कि इस नई सिटी में परमाणु हमलों से बचाव के लिए मजबूत बंकर बनाए जा रहे हैं।

    अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती सैन्य होड़
    दुनिया भर में पेंटागन को सबसे बड़ी सैन्य इमारत माना जाता है, लेकिन चीन की यह नई मिलिट्री सिटी अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, अगले 10 वर्षों में चीन अपनी परमाणु ताकत अमेरिका के बराबर या उससे आगे ले जाने की तैयारी कर रहा है।

    चीन की चुप्पी
    चीन सरकार ने इस सैन्य परियोजना को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। चीनी विदेश मंत्रालय और दूतावासों ने रिपोर्ट्स पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है। हालांकि, सैटेलाइट इमेज और खुफिया रिपोर्ट्स ने इस परियोजना के अस्तित्व की पुष्टि कर दी है।

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