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मोदी सरकार ने ऐप आधारित कैब कंपनियों को भीड़ के समय मूल किराए से दोगुना तक चार्ज करने की दी मंजूरी, उपभोक्ताओं को लगेगा बड़ा झटका।
Ola-Uber fare: मोदी सरकार के एक बड़े फैसले से ओला, उबर, रैपिडो जैसी ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं के उपयोगकर्ताओं को अब और ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ेगी। सरकार ने इन कंपनियों को पीक टाइम यानी भीड़भाड़ के समय मूल किराए से दोगुना किराया वसूलने की अनुमति दे दी है। पहले कंपनियां अधिकतम 1.5 गुना किराया ही वसूल सकती थीं।
क्या कहा परिवहन मंत्रालय ने?
परिवहन मंत्रालय द्वारा जारी नई गाइडलाइंस के अनुसार, राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित जो भी मूल किराया होगा, ऐप आधारित कंपनियां भीड़ के समय उस किराए का दोगुना तक चार्ज कर सकेंगी। साथ ही कंपनियों को कम से कम मूल किराए से 50% कम किराया भी ऑफर करने की छूट होगी।
डेड माइलेज के भी देने होंगे पैसे
अब कैब बुकिंग से पहले ड्राइवर द्वारा ग्राहक तक पहुंचने के दौरान खाली गाड़ी के लिए भी ग्राहक को भुगतान करना होगा। सरकार ने कहा है कि इसके लिए कम से कम 3 किलोमीटर के मूल किराए के बराबर डेड माइलेज चार्ज लगेगा। इसमें ग्राहक के पास पहुंचने तक का फ्यूल खर्च और दूरी शामिल होगी।
राज्यों को यह नई गाइडलाइन अगले तीन महीनों के अंदर लागू करनी होगी, ऐसे में आने वाले समय में ओला-उबर की सेवाएं महंगी होनी तय हैं।
नई गाइडलाइंस के प्रमुख बिंदु:
१. बिना वैध कारण के कैब सेवा रद्द करने पर ड्राइवर को कुल किराए का 10% दंड।
२. ग्राहक द्वारा बिना कारण बुकिंग रद्द करने पर ग्राहक पर भी उतना ही जुर्माना।
३. कैब ड्राइवरों के लिए कम से कम 5 लाख का हेल्थ इंश्योरेंस और 10 लाख का टर्म इंश्योरेंस।
क्यों बढ़ रही हैं ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं की दिक्कतें?
ओला, उबर, रैपिडो जैसी सेवाओं की बढ़ती लोकप्रियता से पारंपरिक टैक्सी और ऑटो चालकों में नाराजगी देखी जा रही है। कई शहरों में ऑटो और काली-पीली टैक्सी चालकों द्वारा ऐप आधारित सेवाओं का विरोध किया जाता रहा है। वहीं, कई बार ग्राहकों ने भी इन कंपनियों पर मनमाने किराए वसूलने के आरोप लगाए हैं। इसके बावजूद इन सेवाओं की डिमांड लगातार बढ़ रही है।
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