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  • नासिक में MUHS का बदलाव: घना जंगल बना सेंसेरी हेवन, गोअन-स्टाइल कैंटीन और खुला जिम

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    नासिक में स्थित महाराष्ट्र आरोग्य विज्ञान विद्यापीठ (MUHS) ने अपने परिसर को एक नयी पहचान दी है। यहां अब पर्यावरण को ध्यान में रखकर एक विचित्र और सुकूनदायक ‘सेंसरी हेवन’ तैयार किया गया है। गोअन-थीम पर आधारित कैंटीन, खुला जिम, रत्न जैसी खेती वाले ‘सेंस फाइव गार्डन’ (इन्द्रियों का बगीचा) और अन्य सुधार, इस बदलती सोच का परिचायक हैं।

    नासिक से जुड़ी पहचान: महाराष्ट्र आरोग्य विज्ञान विद्यापीठ (MUHS)

    नासिक, जो अपनी धार्मिक, ऐतिहासिक और शैक्षिक पहचान के लिए जाना जाता है, वहीं पर महाराष्ट्र आरोग्य विज्ञान विद्यापीठ (Maharashtra University of Health Sciences – MUHS) स्थित है।
    यह विश्वविद्यालय 1998 में स्थापित हुआ था और तब से यह महाराष्ट्र राज्य की सभी चिकित्सा, दंतचिकित्सा, आयुर्वेद, होम्योपैथी, नर्सिंग और संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान की संस्थाओं का प्रमुख नियंत्रक और समन्वयक निकाय रहा है।

    आज MUHS का मुख्यालय नासिक में 60 एकड़ के विशाल परिसर में फैला हुआ है, और यही पर हाल ही में किए गए ये बड़े बदलाव देखने को मिले हैं।

    • नासिक में स्थित होने के कारण यह परिसर प्राकृतिक हरियाली और पहाड़ी भूगोल से घिरा है।

    • इस विश्वविद्यालय के अधीन महाराष्ट्र के 400 से अधिक मेडिकल और हेल्थ साइंसेज कॉलेज आते हैं।

    • नासिकवासियों के लिए यह संस्थान न केवल शैक्षिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी गौरव का विषय है।

    कैंटीन और खुला जिम: गोअन-थीम वाली आत्मीयता

    कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) माधुरी कानिटकर ने गोअन झोपड़ी जैसी कैंटीन पंजीत की है — जिसमें झूलते टोकरे (टोकरी), स्लीक लाइटिंग और गोवा की शांत छटा के साथ कैजुअल बैठने का अनुभव मिलता है।
    खुले आसमान के नीचे रखा जिम (ओपन-एयर जिम) परिसरों को जीवन्त और सजीव बनाता है — यह स्वास्थ्य और ताजगी का सामंजस्य है।

    ‘सेंस फाइव गार्डन’: इन्द्रियों से जुड़ने वाला अनुभव

    MUHS परिसर में ‘सेंस फाइव’ गार्डन का निर्माण किया गया है, जिसे इसका नाम ‘समवेदना’ (Samvedna) भी मिला है। कोविड-19 के दौरान बढ़ती जंगली झाड़ियों और अनियमित कचरे को हटाकर इस परियोजना की शुरुआत की गई थी। एक पत्थर खदान को तालाब में बदल दिया गया, और पास में WBM (Water-Bound Macadam, आर्मी-स्मृति रोड तकनीक) रोड निर्माण किया गया ।

    • ‘स्वाद’ क्षेत्र: वह चट्टान जो जीभ जैसी दिखती थी, उससे प्रेरित होकर ‘स्वाद’ क्षेत्र में अमरूद, जायफल (कस्टर्ड एप्पल), नींबू जैसे पेड़ लगाए गए; तीन वर्षों में यह बगीचा विकसित हुआ ।

    • ‘सुगन्ध’ क्षेत्र: महक वाले पौधे, खासकर चमेली, को एक नाक की मूर्ति के आसपास लगाया गया, जिससे गार्डन में छाई सुगंध को महसूस किया जा सके।

    • ‘श्रवण’ क्षेत्र: पत्तों की सरसराहट, चीटियों की आवाज़ और प्राकृतिक ध्वनियाँ इस क्षेत्र को एक शांतिमय ध्वनि-संसार बनाती हैं।

    • दृश्यात्मक सौंदर्य: शाम में इस गार्डन में रंगों की बौछार होती है, जिसमें rainbow जैसे रंगों की झलक मिलता है, जिससे रिझावे जैसा अनुभव होता है ।

    सुरक्षितता और साहसिक गतिविधियाँ

    MUHS परिसर के गौरव-यात्रा गृह में कभी तेंदुए दिखाई देने की घटना को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा दीवारें ऊँची की गईं। सबसे निचले गड्ढों को कमल-तालाबों में परिवर्तित किया गया, जिससे पर्यावरणीय संतुलन भी बना रहा।
    छात्र अब रैपेलिंग, रॉक क्लाइंबिंग और वीकेंड बोटिंग जैसी साहसिक गतिविधियाँ कर सकते हैं।

    स्थिरता और सादगी की नीति

    यह पूरा परिवर्तन परियोजना ‘कम, पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण’ (Reduce, Reuse, Recycle) के सिद्धांतों पर आधारित रही—कम बजट में साथ ही न्यूनतम संसाधन से। पुराने, गैर-सोलर लाइट्स को पुनः इस्तेमाल किया गया और सभी निर्माण कार्य स्थानीय पत्थरों से बने प्लेटफॉर्म व टैरेस बीना नए सामग्री के तैयार किए गए ।
    कुलपति स्वयं और उनके पति, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) राजीव कानिटकर, प्रतिदिन यहाँ वॉक करते थे और इसे स्टाफ के बीच फिटनेस जागरूकता का केंद्र बना दिया गया।

    और जोड़े गए सुन्दर पहलू

    • मुख्य भवन पर रंगीन मोर-थीम (Peacock) आधारित सजावट उपलब्ध है, जो परिसर को जीवंत बनाती है ।

    • शैक्षिक उपयोग के लिए पेड़ों पर बारकोड लगाए गए — जिससे वे पर्यावरण शिक्षा का आधार बनते हैं ।

    • परिसर के प्रवेश द्वार पर ‘आरोग्य मानव’ (Arogya Manav) मूर्ति, और एक शांत यौगिक झोपड़ी (Yoga Hut) का निर्माण हो रहा है, जिसकी उद्घाटन सितंबर में किया जाएगा ।

    निष्कर्ष — पर्यावरण, शिक्षा एवं स्वास्थ्य का संगम

    MUHS, नासिक ने जो बदलाव अपने 60 एकड़ परिसर में किए हैं, वे न केवल शारीरिक और सौंदर्यात्मक सुधार हैं, बल्कि यह सोच का प्रतीक है — प्राकृतिक संसाधनों के पुनर्युपयोग, मानव अनुभूति की गहरी समझ और शैक्षिक जागरूकता का मिश्रण।
    यह परियोजना दर्शाती है कि कैसे सीमित संसाधनों में भी क्रिएटिविटी और दृढ़ इच्छा से एक परिसर को हरित, सेफ और सेंसेरी हवन में बदला जा सकता है — एक प्रेरणा हर विश्वविद्यालय के लिए।

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