इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान जारी कर बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेना की रणनीतिक और तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने में इसरो ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस दौरान न केवल आधुनिक अंतरिक्ष तकनीक का प्रयोग हुआ, बल्कि ड्रोन और स्वदेशी विकसित आकाश तीर जैसी वायु रक्षा प्रणालियों की भी व्यापक जांच की गई।
ISRO प्रमुख ने संवाददाताओं से कहा कि ऑपरेशन के दौरान अंतरिक्ष क्षेत्र की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया। उनका कहना था कि “अंतरिक्ष आधारित अवलोकन और निगरानी तकनीक ने भारतीय सेना को न केवल सूचनात्मक बढ़त दी, बल्कि वास्तविक समय में सटीक कार्रवाई की संभावनाओं को भी मजबूत किया।”
‘ऑपरेशन सिंदूर’ का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में संभावित खतरे का त्वरित और सटीक मुकाबला करना था। इसरो ने ऑपरेशन के दौरान उपग्रह आधारित संचार और निगरानी प्रणालियों के माध्यम से सेना को वास्तविक समय डेटा उपलब्ध कराया। इसके अलावा, ऑप्टिकल और रडार उपग्रहों से मिली जानकारी ने सेना को सीमा पर हर गतिविधि की निगरानी करने में मदद की।
ISRO के अंतरिक्ष विशेषज्ञों ने बताया कि ऑपरेशन में स्वदेशी विकसित ड्रोन और आकाश तीर जैसी वायु रक्षा प्रणालियों की कार्यक्षमता की भी परीक्षण प्रक्रिया को शामिल किया गया। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि भारतीय सेना को हर प्रकार के हवाई और सीमावर्ती खतरे से मुकाबला करने में पर्याप्त तकनीकी मदद मिल सके।
ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल किए गए ड्रोन ने सीमावर्ती क्षेत्रों में खतरों का पता लगाने और वास्तविक समय तस्वीरें उपलब्ध कराने में मदद की। इससे सेना को न केवल रणनीतिक बढ़त मिली, बल्कि हवाई खतरे के खिलाफ त्वरित निर्णय लेने में भी मदद मिली।
वहीं, स्वदेशी विकसित आकाश तीर मिसाइल प्रणाली ने भी ऑपरेशन के दौरान अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। इस प्रणाली की मदद से भारतीय सेना को किसी भी संभावित हवाई खतरे को रोकने और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण लाभ मिला।
ISRO प्रमुख ने यह भी बताया कि अंतरिक्ष तकनीक की भूमिका केवल निगरानी तक सीमित नहीं है। सटीक डेटा, संचार प्रणाली और उपग्रह आधारित उपकरणों ने भारतीय सेना को रणनीतिक निर्णय लेने में भी सक्षम बनाया। उन्होंने कहा कि भविष्य में अंतरिक्ष तकनीक और रक्षा प्रणालियों के संयुक्त प्रयोग से भारत की सुरक्षा क्षमताओं में और भी मजबूती आएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अंतरिक्ष तकनीक का यह प्रयोग भारतीय सेना के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। इससे यह स्पष्ट होता है कि आधुनिक युद्ध में अंतरिक्ष आधारित तकनीक का महत्व तेजी से बढ़ रहा है।ऑपरेशन सिंदूर ने यह भी साबित कर दिया कि स्वदेशी विकसित तकनीक जैसे आकाश तीर और निगरानी ड्रोन भविष्य में भारतीय सेना के लिए निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। इन तकनीकों के माध्यम से सीमाओं की सुरक्षा में तेजी आई है और सटीकता में सुधार हुआ है।
अंत में ISRO प्रमुख ने कहा कि “भारतीय सेना और इसरो का यह सहयोग भविष्य में और अधिक मजबूत होगा। अंतरिक्ष तकनीक के जरिए देश की रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकेगा। हम हमेशा इस दिशा में काम कर रहे हैं कि तकनीक और सुरक्षा का संतुलन बनाए रखा जाए।”








