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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान में भारत की शिक्षा प्रणाली में औपनिवेशिक प्रभावों की आलोचना की और भारतीय मूल्यों की ओर बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा प्रणाली को पुनः भारतीय संस्कृति, भाषा और परंपराओं के अनुरूप ढालने की आवश्यकता है। प्रधान ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP 2020) इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारतीय शिक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने का प्रयास कर रही है।
धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि ब्रिटिश शासनकाल के दौरान भारत की शिक्षा प्रणाली को इस प्रकार से तैयार किया गया था कि वह भारतीय समाज की वास्तविकताओं और आवश्यकताओं से मेल न खाती हो। इसका उद्देश्य भारतीयों को मानसिक रूप से गुलाम बनाना और उन्हें अपनी संस्कृति से दूर करना था। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय भाषाओं और संस्कृति को प्राथमिकता देने के बजाय अंग्रेजी और पश्चिमी शिक्षा को बढ़ावा दिया गया।
प्रधान ने NEP 2020 को भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक क्रांतिकारी कदम बताया। इस नीति का उद्देश्य शिक्षा को समग्र, बहुआयामी और भारतीय संदर्भ में ढालना है। उन्होंने कहा कि NEP 2020 भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देती है और छात्रों को अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती है। इसके अलावा, यह नीति अनुसंधान, नवाचार और सोचने की क्षमता के विकास पर भी जोर देती है।
धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए शिक्षा प्रणाली में मौलिक बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वविद्यालयों को इस परिवर्तन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि यह छात्रों को अपने समाज और संस्कृति के प्रति जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाना चाहिए।
धर्मेन्द्र प्रधान का यह बयान भारतीय शिक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधारों की आवश्यकता को रेखांकित करता है। NEP 2020 इस दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जो भारतीय शिक्षा को उसकी जड़ों से जोड़ने का प्रयास कर रही है। अब यह जिम्मेदारी शिक्षा संस्थानों, शिक्षकों और छात्रों की है कि वे इस नीति का सही तरीके से पालन करें और भारतीय मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएं।








