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  • संजय राउत का आरोप: “भारत-पाक मैच फिक्स था, पाकिस्तान ने कमाए 50,000 करोड़, यह शहीदों और वीरांगनाओं का अपमान”

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         एशिया कप में खेले गए भारत-पाकिस्तान मुकाबले को लेकर राजनीति और खेल जगत दोनों में भूचाल आ गया है।
    शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस मैच को लेकर सनसनीखेज़ आरोप लगाया है।
    राउत का कहना है कि यह मुकाबला फिक्स था और पाकिस्तान ने इस मैच के जरिए लगभग 50,000 करोड़ रुपये की कमाई की।

    संजय राउत ने सिर्फ मैच फिक्सिंग तक बात सीमित नहीं रखी बल्कि इसे राष्ट्र सम्मान और शहीदों की शहादत से भी जोड़ा।
    उन्होंने कहा:

    “यह सिर्फ क्रिकेट का खेल नहीं था, बल्कि हमारे देश के जवानों का अपमान है। पहलगाम हमले में जिन वीरांगनाओं ने अपना सिंदूर खोया, यह उनके बलिदान का भी अनादर है। केंद्र सरकार को सोचना चाहिए कि आखिर ऐसे मैचों की अनुमति क्यों दी जाती है।”

    उनका कहना है कि भारत-पाक क्रिकेट मुकाबलों के पीछे राजनीतिक और आर्थिक खेल चल रहा है, जो सीधे-सीधे देश की भावनाओं को ठेस पहुँचाता है।

    राउत ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला और आरोप लगाया कि भाजपा सरकार केवल दिखावे की देशभक्ति करती है।
    उन्होंने कहा कि जब सीमा पर जवान शहीद हो रहे हैं, तब सरकार पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने की अनुमति देकर देश की जनता को गुमराह कर रही है।
    संजय राउत के मुताबिक, यह मैच केवल “खेल” नहीं बल्कि 50,000 करोड़ रुपये की फिक्सिंग और सट्टेबाज़ी का खेल था।

    भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मुकाबले हमेशा ही रोमांचक माने जाते हैं। करोड़ों दर्शक टीवी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इन मैचों को देखते हैं। विज्ञापन कंपनियां अरबों रुपये खर्च करती हैं। सट्टा बाज़ार भी इन मुकाबलों पर सबसे ज़्यादा सक्रिय रहता है। यही वजह है कि मैच फिक्सिंग और सट्टेबाज़ी के आरोप समय-समय पर उठते रहे हैं। राउत का बयान इस बहस को और गहरा कर देता है।

    संजय राउत के आरोपों पर खेल विशेषज्ञों और पूर्व क्रिकेटरों ने हैरानी जताई है। कई खिलाड़ियों ने कहा कि बिना सबूत इस तरह के आरोप लगाना टीम इंडिया और खिलाड़ियों की मेहनत पर सवाल उठाने जैसा है। वहीं कुछ जानकार मानते हैं कि भारत-पाक मुकाबले इतने बड़े आर्थिक दांव-पेच से जुड़े होते हैं कि सट्टेबाज़ी की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।

    यह बयान केवल खेल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर राजनीतिक गलियारों तक भी फैल गया। भाजपा नेताओं ने संजय राउत पर हमला करते हुए कहा कि उन्होंने देश और खिलाड़ियों का अपमान किया है। भाजपा का कहना है कि विपक्ष देश की जीत और हार पर भी राजनीति करने से बाज नहीं आ रहा। वहीं विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने राउत की बात को गंभीरता से लेते हुए जांच की मांग की।

    राउत ने अपने बयान में विशेष रूप से पहलगाम हमले का उल्लेख किया, जिसमें देश के कई जवान शहीद हुए और कई महिलाओं ने अपने पति खो दिए।
    उन्होंने कहा कि जब देश ऐसे दर्द से गुजर रहा है तो पाकिस्तान के साथ मैच खेलना और उसे आर्थिक लाभ पहुँचाना, देश की शहादत का अपमान है।

    राउत का दावा है कि पाकिस्तान ने इस मैच से लगभग 50,000 करोड़ रुपये कमाए। यह रकम कथित तौर पर सट्टेबाज़ी और गैरकानूनी नेटवर्क से आई। हालांकि, उन्होंने इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं दिया। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े आंकड़े को साबित करना मुश्किल है, लेकिन यह सच है कि भारत-पाक मैचों पर सट्टा बाजार का टर्नओवर हजारों करोड़ तक पहुँच सकता है।

    संजय राउत का यह बयान विपक्षी राजनीति के लिए एक नया हथियार साबित हो सकता है। सपा, बसपा और कांग्रेस जैसे दल इसे सरकार पर हमले के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं भाजपा इसे राष्ट्र विरोधी बयान करार देकर राउत और शिवसेना (यूबीटी) पर प्रहार करेगी।

    एशिया कप के भारत-पाक मैच को लेकर संजय राउत का बयान केवल खेल तक सीमित नहीं बल्कि राजनीतिक, सामाजिक और राष्ट्रीय भावनाओं से जुड़ गया है।
    उनका कहना कि यह मैच फिक्स था, पाकिस्तान ने 50,000 करोड़ कमाए और यह शहीदों का अपमान है — निश्चित तौर पर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बनेगा।

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