जापान की प्रमुख रेटिंग एजेंसी रेटिंग और इन्वेस्टमेंट इंफॉर्मेशन, इंक. (R&I) ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को BBB से BBB+ में अपग्रेड किया है, साथ ही “स्थिर” आउटलुक भी जारी किया है। यह भारत के लिए 2025 में तीसरी रेटिंग अपग्रेड है, जो वैश्विक निवेशकों के बीच भारत की आर्थिक नीतियों और स्थिरता में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
R&I द्वारा रेटिंग अपग्रेड के प्रमुख कारण
R&I ने अपनी रिपोर्ट में भारत की रेटिंग अपग्रेड के निम्नलिखित प्रमुख कारण बताए:
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मजबूत घरेलू मांग: भारत की अर्थव्यवस्था घरेलू खपत पर आधारित है, जो वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव से कम प्रभावित होती है।
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सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन: सरकार की वित्तीय नीतियाँ और सार्वजनिक खर्च में सुधार ने वित्तीय स्थिरता को बढ़ावा दिया है।
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संरचनात्मक सुधार: जीएसटी जैसे सुधारों ने कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया है।
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बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती: बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत हुई है, जिससे वित्तीय क्षेत्र में स्थिरता आई है।
2025 में भारत को मिली तीसरी रेटिंग अपग्रेड
इससे पहले, अगस्त 2025 में S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने भारत की रेटिंग को BBB- से BBB में अपग्रेड किया था, जो 18 वर्षों में पहली बार हुआ था। इसके बाद, मई 2025 में DBRS मोर्निंगस्टार ने भी भारत की रेटिंग में सुधार किया था। इन तीनों अपग्रेड्स ने भारत की आर्थिक नीतियों और स्थिरता में वैश्विक विश्वास को मजबूत किया है।
अमेरिका की आलोचना का मिला सशक्त जवाब
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए थे, विशेष रूप से रूस से तेल आयात और व्यापारिक नीतियों को लेकर। उन्होंने भारत पर 50% तक टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। R&I की रेटिंग अपग्रेड को इस आलोचना का सशक्त जवाब माना जा रहा है, जो दर्शाता है कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक दबावों के बावजूद स्थिर और मजबूत है।
वैश्विक निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत
R&I की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की रेटिंग अपग्रेड वैश्विक निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे भारत में विदेशी निवेश आकर्षित होगा और भारतीय बाजारों में स्थिरता आएगी। इसके अलावा, भारतीय रुपये की स्थिति भी मजबूत होगी, जिससे मुद्रास्फीति पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी।
भारत की सॉवरेन रेटिंग में हालिया सुधार वैश्विक निवेशकों के बीच भारत की आर्थिक नीतियों और स्थिरता में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। यह कदम भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और इसके परिणामस्वरूप विदेशी निवेश में वृद्धि, मुद्रा स्थिरता और आर्थिक विकास की गति में सुधार की संभावना है।







