कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को अमेरिका द्वारा H-1B वीजा पर एक लाख डॉलर (लगभग 88 लाख रुपये) शुल्क लगाए जाने के फैसले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि केवल “गले लगने” और “मोदी-मोदी के नारे लगवाने” से विदेश नीति नहीं चलती।
खरगे का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्क से भारतीय आईटी उद्योग और वहां काम करने वाले हजारों पेशेवरों पर सीधा असर पड़ सकता है।
विदेश नीति पर उठाए सवाल
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विदेश नीति केवल दिखावे की कूटनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “विदेश नीति में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होने चाहिए।”
उनका तर्क था कि किसी भी देश के साथ संबंध मित्रतापूर्ण होने चाहिए, लेकिन वह विवेक और संतुलन के साथ आगे बढ़ाए जाएं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि विदेशी धरती पर केवल “मोदी-मोदी” के नारे लगवाने से भारत के हित सुरक्षित नहीं होंगे।
H-1B वीजा का महत्व और असर
H-1B वीजा मुख्य रूप से भारतीय आईटी पेशेवरों और इंजीनियरों के लिए बेहद अहम है। हर साल हजारों भारतीय इस वीजा के जरिए अमेरिका में काम करने जाते हैं।
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नए शुल्क लागू होने से कंपनियों की लागत बढ़ेगी।
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इससे भारत के युवा और आईटी पेशेवरों को नौकरी पाने में कठिनाई हो सकती है।
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भारतीय आईटी सेक्टर, जो पहले से वैश्विक प्रतिस्पर्धा में चुनौती झेल रहा है, और दबाव में आ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह शुल्क भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है और इससे दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ सकता है।
कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार विदेश नीति को केवल “इवेंट मैनेजमेंट” तक सीमित कर रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने के बजाय सरकार दिखावे और प्रचार पर ज्यादा ध्यान देती है।
खरगे ने सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार अमेरिकी नेतृत्व से मुलाकात की और उन्हें “गले लगाया,” तब भारतीय आईटी पेशेवरों और प्रवासी भारतीयों की समस्याओं का समाधान क्यों नहीं किया गया।
अमेरिका-भारत संबंधों में नई चुनौती
अमेरिका और भारत के संबंध पिछले कुछ वर्षों में मजबूत हुए हैं, लेकिन इस तरह के फैसले उन संबंधों पर सवाल खड़े करते हैं।
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अमेरिका में भारत से बड़ी संख्या में आईटी पेशेवर काम कर रहे हैं।
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दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों का बड़ा हिस्सा तकनीकी क्षेत्र पर आधारित है।
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शुल्क बढ़ने से भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा क्षमता कमजोर हो सकती है।
यह फैसला भारत के लिए न केवल आर्थिक बल्कि कूटनीतिक चुनौती भी माना जा रहा है।
खरगे का सुझाव
खरगे ने सुझाव दिया कि भारत को अपने हितों की रक्षा के लिए संतुलित और ठोस विदेश नीति अपनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मित्रता जरूरी है लेकिन यह “आत्मसम्मान और संतुलन” के साथ होनी चाहिए।
उनका कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी को केवल व्यक्तिगत लोकप्रियता पर ध्यान देने के बजाय भारतीय छात्रों, पेशेवरों और आईटी उद्योग के हितों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
विपक्ष बनाम सरकार की बहस
कांग्रेस लगातार मोदी सरकार पर विदेश नीति को लेकर हमलावर रही है। उनका मानना है कि विदेश नीति को मजबूत करने के लिए सिर्फ बड़े-बड़े कार्यक्रम और भाषण काफी नहीं हैं।
वहीं, सरकार का दावा है कि भारत की वैश्विक स्थिति आज पहले से कहीं अधिक मजबूत है। लेकिन अमेरिका का यह फैसला सरकार की नीतियों पर सवाल खड़ा कर रहा है।
अमेरिका द्वारा H-1B वीजा पर लगाए गए नए शुल्क ने भारत के आईटी उद्योग और पेशेवरों के लिए चिंता की स्थिति पैदा कर दी है। इस फैसले ने मोदी सरकार की विदेश नीति को लेकर विपक्ष को नया मुद्दा दे दिया है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का कहना है कि केवल नारेबाजी और “गले लगाने” से विदेश नीति सफल नहीं होती। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया कि वे राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए भारतीय नागरिकों और उद्योगों की रक्षा करें।
यह मामला भारत-अमेरिका संबंधों की गहराई और भारतीय हितों की सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ा है। इसलिए आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बनने वाला है।







