भारत और कनाडा के बीच पिछले कुछ समय से तनावपूर्ण रहे रिश्तों में अब एक नई शुरुआत के संकेत दिख रहे हैं। लंबे समय से चले आ रहे राजनयिक मतभेदों के बीच दोनों देशों ने बातचीत और सहयोग का रास्ता तलाशना शुरू कर दिया है।
दिल्ली में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल और कनाडाई NSA नथाली ड्रोइन के बीच हुई अहम मुलाकात ने द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊर्जा भर दी है। इस बैठक के बाद ड्रोइन ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि कनाडा पुलिस जांच में भारत का पूरा सहयोग करेगा। साथ ही उन्होंने यह भी पुष्टि की कि कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद बहुत जल्द भारत यात्रा पर आने वाली हैं।
रिश्तों में आई दरार का बैकग्राउंड
भारत और कनाडा के बीच संबंध पिछले साल तब बिगड़ गए थे जब कनाडा ने भारत पर अलगाववादी गतिविधियों से जुड़े मामलों में गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक बयानबाजी और वीज़ा संबंधी रुकावटों ने तनाव को और बढ़ा दिया।
हालांकि, समय के साथ यह महसूस किया जाने लगा कि दोनों देशों के लिए बातचीत और सहयोग ही सबसे बेहतर रास्ता है। यही वजह है कि इस मुलाकात को रिश्तों में बर्फ पिघलने की शुरुआत माना जा रहा है।
डोभाल-ड्रोइन मुलाकात: अहम बिंदु
मुलाकात के बाद दिए गए बयानों से साफ है कि भारत और कनाडा ने कई संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत की। मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे:
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पुलिस जांच में सहयोग: कनाडाई NSA ने भरोसा दिलाया कि दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां मिलकर काम करेंगी।
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सूचना का आदान-प्रदान: अपराध और सुरक्षा मामलों से जुड़े इनपुट साझा किए जाएंगे।
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भविष्य की यात्राएं: कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद जल्द ही भारत दौरे पर आएंगी।
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संबंध सुधार का संकेत: दोनों पक्षों ने संवाद जारी रखने और मतभेदों को बातचीत से सुलझाने पर सहमति जताई।
कनाडाई NSA का बड़ा बयान
ड्रोइन ने मुलाकात के बाद मीडिया से कहा:
“भारत और कनाडा दोनों ही लोकतांत्रिक मूल्य और साझा हित रखते हैं। हमें विश्वास है कि पुलिस जांच और सुरक्षा मामलों में सहयोग से हमारे रिश्ते और मजबूत होंगे। विदेश मंत्री अनीता आनंद की भारत यात्रा इस दिशा में एक बड़ा कदम होगी।”
भारत का रुख
भारत ने भी साफ किया है कि वह रिश्तों को बेहतर बनाने के पक्ष में है, लेकिन अलगाववादी गतिविधियों और भारत विरोधी तत्वों को लेकर उसका रुख सख्त बना रहेगा। सूत्रों के मुताबिक, अजित डोभाल ने बैठक में यह मुद्दा साफ तरीके से उठाया और कहा कि “भारत की संप्रभुता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।”
विदेश मंत्री अनीता आनंद का दौरा
कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद की प्रस्तावित यात्रा को रिश्तों में सुधार का बड़ा संकेत माना जा रहा है। यह यात्रा न केवल दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद को बढ़ाएगी, बल्कि व्यापार, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग के नए रास्ते भी खोल सकती है।
कूटनीतिक हलकों का मानना है कि अगर यह दौरा सफल रहता है तो दोनों देशों के रिश्ते फिर से पटरी पर लौट सकते हैं।
व्यापार और शिक्षा भी बने मुद्दा
भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक रिश्ते और शिक्षा सहयोग हमेशा से अहम रहे हैं। बड़ी संख्या में भारतीय छात्र कनाडा में पढ़ाई कर रहे हैं और दोनों देशों के बीच निवेश भी लगातार बढ़ रहा है। इस मुलाकात में यह मुद्दा भी उठाया गया कि छात्रों और कारोबारियों को किसी तरह की दिक्कत न हो और पारस्परिक विश्वास कायम रहे।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर असर
भारत और कनाडा दोनों ही जी-20 और कॉमनवेल्थ जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों के अहम सदस्य हैं। ऐसे में उनके रिश्तों का बेहतर होना वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक संदेश देगा। सुरक्षा, व्यापार और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर दोनों देशों का सहयोग न केवल द्विपक्षीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी असर डालेगा।
भारत और कनाडा के बीच हालिया तनातनी के बीच हुई यह बैठक रिश्तों में नई उम्मीद की किरण लेकर आई है। पुलिस जांच में सहयोग और विदेश मंत्री अनीता आनंद की भारत यात्रा की पुष्टि इस बात का संकेत है कि दोनों देश रिश्तों को सुधारने के लिए गंभीर हैं।
अब सबकी निगाहें आने वाले महीनों पर टिकी हैं, जब यह देखना होगा कि बातचीत का यह सिलसिला किस तरह से ठोस नतीजों में बदलता है। फिलहाल इतना तय है कि भारत और कनाडा ने संवाद का रास्ता चुनकर सही दिशा में कदम बढ़ाया है।








