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संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में बढ़ती अनिश्चितताओं पर अपनी गहरी चिंता जाहिर की। अपने संबोधन में उन्होंने बिना नाम लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर इशारा किया और कहा कि आज की दुनिया इतनी अस्थिर हो चुकी है कि एक ट्वीट भी बाजार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बड़ा बदलाव ला सकता है।
ट्वीट और वैश्विक असर
जयशंकर ने कहा, “आज हम ऐसे दौर में जी रहे हैं, जहां एक ट्वीट पूरी दुनिया को हिला सकता है। बाजारों में उथल-पुथल मच सकती है, निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है और देशों के बीच रिश्तों में अचानक खटास आ सकती है।”
हालांकि उन्होंने सीधे ट्रंप का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को लेकर यह स्पष्ट हो गया कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति की ट्विटर सक्रियता और अचानक किए गए बयानों की ओर इशारा कर रहे थे। ट्रंप का कार्यकाल कई बार इस तरह के ट्वीट्स और उनसे उपजे विवादों के लिए चर्चा में रहा है।
वैश्विक अनिश्चितता पर भारत की चिंता
जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर कहा कि मौजूदा दौर में दुनिया ‘मल्टी-पोलर लेकिन अनिश्चित’ बन चुकी है। उन्होंने बताया कि आर्थिक संकट, सुरक्षा चुनौतियाँ और पर्यावरणीय अस्थिरता से निपटने के लिए सभी देशों को संयम और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना होगा।
भारत का मानना है कि अनिश्चित वैश्विक व्यवस्था में अचानक लिए गए फैसले और बयानबाजी, खासकर सोशल मीडिया पर, अंतरराष्ट्रीय रिश्तों को नुकसान पहुंचाते हैं।
बाजार में अस्थिरता की चेतावनी
अपने भाषण में जयशंकर ने वैश्विक आर्थिक बाजारों पर सोशल मीडिया बयानों के प्रभाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि “अक्सर देखा गया है कि एक ट्वीट ने स्टॉक मार्केट में भारी गिरावट ला दी, निवेशकों का विश्वास डगमगा गया और छोटे देशों की अर्थव्यवस्था पर अप्रत्याशित असर पड़ा।”
इस बयान को कई विशेषज्ञों ने ट्रंप की उस कार्यशैली से जोड़ा, जब उन्होंने अमेरिकी नीतियों, व्यापार समझौतों और सैन्य अभियानों को लेकर अचानक ट्वीट्स किए और उसके चलते शेयर बाजार से लेकर विदेशी मुद्रा बाजार तक में हलचल मच गई थी।
भारत की विदेश नीति का रुख
जयशंकर ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि भारत हमेशा जिम्मेदार संवाद और स्थिर वैश्विक संबंधों की वकालत करता है। उन्होंने कहा कि भारत “ट्वीट डिप्लोमेसी” के बजाय व्यवहारिक और दीर्घकालिक नीतियों पर विश्वास रखता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत का उद्देश्य केवल अपने लिए नहीं बल्कि दुनिया के लिए स्थिरता और शांति कायम करना है। चाहे बात हो वैश्विक व्यापार की या जलवायु परिवर्तन की, भारत हमेशा सकारात्मक भूमिका निभाने को तैयार है।
अमेरिका पर अप्रत्यक्ष निशाना
जयशंकर के बयान ने यह साफ कर दिया कि भारत अमेरिकी नीतियों की अप्रत्याशितता से चिंतित है। ट्रंप के हालिया वक्तव्यों और सोशल मीडिया पोस्ट्स ने न केवल एशिया बल्कि यूरोप और मध्य-पूर्व में भी तनाव पैदा किया है।
कई विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे बड़े उभरते हुए देश का यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अहम संदेश देता है। यह संकेत है कि विश्व को अब जिम्मेदार और परिपक्व नेतृत्व की ज़रूरत है, न कि आवेश और आक्रामकता की।
भारतीय दृष्टिकोण की सराहना
जयशंकर के भाषण के बाद कई देशों के प्रतिनिधियों ने भारत के दृष्टिकोण का समर्थन किया। यूरोपीय संघ के एक प्रतिनिधि ने कहा कि भारत का यह बयान विश्व राजनीति में एक संतुलित और परिपक्व आवाज़ है। अफ्रीकी देशों ने भी सहमति जताई कि अस्थिरता और अचानक लिए गए फैसले गरीब और छोटे देशों पर सबसे ज्यादा असर डालते हैं।
घरेलू स्तर पर प्रतिक्रिया
भारत में भी जयशंकर के बयान की व्यापक चर्चा हो रही है। विपक्ष ने कहा कि विदेश मंत्री ने अमेरिका की नीतियों पर सही सवाल उठाया है। वहीं, विशेषज्ञों ने इसे भारत की “रणनीतिक स्वायत्तता” की मिसाल बताया। आम नागरिकों और सोशल मीडिया यूज़र्स ने भी उनकी इस स्पष्टवादिता की सराहना की।
एस. जयशंकर का यह बयान इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत अब केवल सुनने वाला नहीं बल्कि वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत राय रखने वाला देश है। उन्होंने बिना नाम लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की उस शैली पर सवाल उठाए, जिसमें सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए नीतियों और फैसलों का ऐलान किया जाता है।
उनका यह संदेश साफ है कि आज की दुनिया को स्थिरता, जिम्मेदारी और परिपक्व कूटनीति की ज़रूरत है। क्योंकि सचमुच, आज एक ट्वीट से फर्क पड़ता है — और फर्क कभी-कभी पूरी दुनिया पर भारी पड़ सकता है।








