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  • आंध्र प्रदेश में कृष्णा और गोदावरी नदियों में बाढ़ का खतरा, अलर्ट जारी — सतर्क रहें

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    आंध्र प्रदेश में मानसून के बीच लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कृष्णा और गोदावरी नदियों का जलस्तर खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। राज्य सरकार ने बाढ़ के खतरे को देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी है और प्रभावित इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है। प्रशासन ने नदी किनारे बसे इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं और राहत बचाव के लिए पूरी तैयारी कर ली है।

    पिछले कुछ दिनों से आंध्र प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश हो रही है, जिससे ऊपरी इलाकों में जल स्रोतों से पानी की निकासी बढ़ गई है। इस वजह से कृष्णा और गोदावरी नदियों के जलस्तर में तेज़ी से वृद्धि हुई है। खासकर विजयवाड़ा के पास स्थित प्राकाशम बैराज (Prakasam Barrage) पर पानी का दबाव बढ़ गया है, जिसके कारण जल निकासी के लिए बैराज के गेट खोलने पड़े हैं।

    गोदावरी नदी के डोवलेश्वरम बैराज और तेलंगाना के भद्राचलम इलाकों में भी जलस्तर बढ़ा हुआ है। यहां भी बाढ़ का खतरा बना हुआ है।

    आंध्र प्रदेश सरकार ने तत्कालीन जिलाधिकारियों, आपदा प्रबंधन अधिकारियों और पुलिस विभाग को उच्च सतर्कता पर रहने का आदेश दिया है। प्राकाशम बैराज पर पहले और दूसरे स्तर के बाढ़ चेतावनी जारी की गई है। इसके अलावा, भद्राचलम और डोवलेश्वरम बैराज पर भी बाढ़ की स्थिति को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।

    राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया गया है। राहत शिविरों की स्थापना की जा रही है, ताकि जरूरतमंदों को तत्काल सुरक्षा प्रदान की जा सके। इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल सहायता और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था भी की जा रही है।

    कृष्णा और गोदावरी नदी बेसिन के कई जिलों जैसे कृष्णा, गुन्टूर, प्राकाशम, नटराजपुरम, और विशाखापत्तनम में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। नदी किनारे बसे गांवों में पानी भरने से लोग घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हो रहे हैं।

    कृष्णा नदी के पास के कई छोटे नाले और नहरें भी पानी से भर चुके हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है।

    प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे नदी किनारे न जाएं और सरकारी निर्देशों का सख्ती से पालन करें।

    • बाढ़ के दौरान नदी में न तैरें और न ही मछली पकड़ने जाएं।

    • बिजली के खंभों, तारों के पास न जाएं।

    • बच्चों और बुजुर्गों को घर से बाहर न जाने दें।

    • स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा दी गई सभी सूचनाओं को ध्यान से सुनें।

    • जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत शिविरों में शिफ्ट हो जाएं।

    आंध्र प्रदेश आपदा प्रबंधन विभाग ने नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखने के लिए 24×7 कंट्रोल रूम संचालित किया है। मौसम विभाग के साथ तालमेल बनाकर बारिश के पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर चेतावनी जारी की जा रही है।

    आपदा विभाग ने स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वे प्रभावित इलाकों में लोगों की निकासी के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराएं।

    मौसम विभाग ने अगले 2-3 दिनों के दौरान भारी बारिश जारी रहने की संभावना जताई है। बंगाल की खाड़ी में बन रहे दबाव के कारण दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश की तीव्रता बढ़ सकती है। इससे नदी के जलस्तर में और वृद्धि हो सकती है।

    कृष्णा और गोदावरी नदियों के बढ़ते जलस्तर ने आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। सरकार और प्रशासन पूरी तरह से तैयार हैं और राहत बचाव कार्य तेजी से चल रहे हैं।

    जनता से अनुरोध है कि वे सुरक्षा नियमों का पालन करें और किसी भी प्रकार की अफवाह से बचें। प्रशासन के निर्देशों का पालन ही बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा में सुरक्षा की पहली कड़ी होती है।

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