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भारत और ब्राजील के बीच संबंध लगातार गहराते जा रहे हैं और अब इन रिश्तों को सामरिक स्तर पर नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। शुक्रवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने ब्राजील के राष्ट्रपति के विशेष सलाहकार राजदूत सेल्सो लुइस नून्स अमोरिम से नई दिल्ली में मुलाकात की। यह मुलाकात छठी भारत-ब्राजील सामरिक वार्ता का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सुरक्षा, रक्षा और वैश्विक मुद्दों पर समन्वय को मजबूत करना है।
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी में बताया गया कि इस वार्ता के दौरान दोनों देशों ने एक-दूसरे के साथ अपने रिश्तों को गहरा करने और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई। भारत और ब्राजील न केवल BRICS जैसे बहुपक्षीय मंच पर साझेदार हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, विज्ञान और तकनीक, और सतत विकास जैसे मुद्दों पर भी गहन सहयोग हो रहा है।
अजीत डोभाल और सेल्सो अमोरिम की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था कई बड़े बदलावों से गुजर रही है। अमेरिका, चीन और यूरोप जैसे बड़े देशों की बदलती नीतियों के बीच भारत और ब्राजील की साझेदारी एक नई रणनीतिक दिशा दिखा रही है। भारत का फोकस इस बात पर है कि वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को मजबूती मिले और विकासशील देशों के हितों की रक्षा हो सके। वहीं, ब्राजील भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी भूमिका को अधिक प्रभावी बनाने के लिए भारत के साथ कदमताल करना चाहता है।
वार्ता में रक्षा सहयोग पर भी विशेष जोर दिया गया। भारत और ब्राजील दोनों बड़े लोकतंत्र हैं और दोनों देश आतंकवाद, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और नई तकनीकों के क्षेत्र में आपसी तालमेल बढ़ाने पर सहमत हुए। इसके अलावा, दोनों देशों ने बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की आवश्यकता पर भी चर्चा की। भारत और ब्राजील लंबे समय से UNSC में स्थायी सदस्यता की मांग का समर्थन करते आए हैं और इस मुद्दे पर दोनों देशों का दृष्टिकोण एक जैसा है।
भारत-ब्राजील वार्ता का एक और महत्वपूर्ण पहलू था आर्थिक और तकनीकी सहयोग। भारत ने ब्राजील के साथ हरित ऊर्जा, कृषि तकनीक, फार्मा और आईटी सेक्टर में साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की। वहीं ब्राजील ने भारत के साथ वैज्ञानिक और तकनीकी नवाचारों को साझा करने की इच्छा जताई। यह सहयोग दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को न केवल मजबूत करेगा बल्कि वैश्विक मंच पर इन्हें नई पहचान भी देगा।
अजीत डोभाल और अमोरिम की बातचीत में अमेरिका और पश्चिमी देशों को भी अप्रत्यक्ष रूप से संदेश गया। भारत और ब्राजील की बढ़ती नजदीकियां इस बात का संकेत हैं कि दुनिया अब केवल पश्चिमी शक्तियों के इर्द-गिर्द नहीं घूमेगी, बल्कि नए ध्रुव और साझेदारियां उभर रही हैं। यह मुलाकात डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका के लिए भी एक संदेश मानी जा रही है कि भारत और ब्राजील अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति अपनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
भारत और ब्राजील की सामरिक साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा। BRICS और G20 जैसे मंचों पर दोनों देश पहले ही एक साथ काम कर रहे हैं। अब सामरिक वार्ता के जरिए रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग का नया आयाम जुड़ रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भारत और ब्राजील की साझेदारी एक तरह से एशिया और लैटिन अमेरिका के बीच नए रिश्तों की शुरुआत है। जहां भारत एशिया में तेजी से उभरती शक्ति है, वहीं ब्राजील लैटिन अमेरिका में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इन दोनों का साथ आना विकासशील देशों के लिए भी प्रेरणा है और यह बताता है कि वे भी मिलकर वैश्विक संतुलन बना सकते हैं।
यह मुलाकात केवल सामरिक और रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं रही बल्कि दोनों देशों ने सांस्कृतिक और मानवीय संबंधों को भी मजबूत करने की बात की। शिक्षा, अनुसंधान और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी सहमति बनी। यह पहल दोनों देशों की नई पीढ़ी को एक-दूसरे की संस्कृति और समाज से जोड़ने का काम करेगी।
कुल मिलाकर अजीत डोभाल और सेल्सो अमोरिम की मुलाकात ने भारत और ब्राजील के बीच रिश्तों को नई दिशा दी है। यह रणनीतिक वार्ता न केवल वर्तमान चुनौतियों का समाधान खोजने का प्रयास है बल्कि भविष्य की साझेदारी के लिए भी ठोस नींव रखती है। आने वाले समय में भारत-ब्राजील सहयोग न सिर्फ इन दोनों देशों के लिए बल्कि पूरे वैश्विक दक्षिण के लिए नए अवसर और संभावनाएं लेकर आ सकता है।







