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उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी आने वाली है। लंबे इंतजार के बाद अब राज्य का सबसे बड़ा और महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) जल्द ही खुलने जा रहा है। मेरठ से प्रयागराज के बीच फैला यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक प्रगति को नई रफ्तार देने वाला है। सूत्रों के अनुसार, एक्सप्रेसवे का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और अब फाइनल टेस्टिंग और सुरक्षा जांच का दौर चल रहा है। उम्मीद की जा रही है कि जनवरी 2026 से पहले इसका पहला चरण यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।
गंगा एक्सप्रेसवे की लंबाई 594 किलोमीटर है और यह छह लेन का सुपर एक्सप्रेसवे है, जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। यह एक्सप्रेसवे मेरठ से शुरू होकर हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली होते हुए प्रयागराज तक जाएगा। इस परियोजना का लक्ष्य पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच सीधी और तेज कनेक्टिविटी स्थापित करना है।
बारिश ने धीमी की रफ्तार, अब फिर पटरी पर लौटा निर्माण कार्य
बीते कुछ महीनों में लगातार हुई बरसात ने निर्माण कार्य की गति को जरूर प्रभावित किया था। कई हिस्सों में जलभराव और मिट्टी की नमी के कारण काम अस्थायी रूप से रोकना पड़ा था। हालांकि, अब मौसम के सुधरते ही निर्माण कंपनियों ने कार्य फिर से तेज गति से शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) की रिपोर्ट के अनुसार, कुल परियोजना कार्य का करीब 85% हिस्सा पूरा हो चुका है।
UPEIDA के अधिकारियों का कहना है कि जिन हिस्सों में बारिश के कारण काम रुका था, वहां ड्रेनेज सिस्टम और बेस स्ट्रक्चर की मरम्मत का कार्य प्राथमिकता पर किया जा रहा है। अधिकारियों ने दावा किया है कि आने वाले महीनों में रोड सर्फेसिंग, साइनबोर्ड इंस्टॉलेशन, टोल प्लाजा निर्माण और लाइटिंग सिस्टम का कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
राज्य की सबसे बड़ी परियोजनाओं में एक
गंगा एक्सप्रेसवे योगी आदित्यनाथ सरकार की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक है। इसका निर्माण लगभग 36,000 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। परियोजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2021 में किया था। इसका उद्देश्य राज्य में तेज परिवहन व्यवस्था, निवेश बढ़ोतरी और औद्योगिक क्लस्टर के विकास को बढ़ावा देना है।
यात्रा समय में भारी कमी
गंगा एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद मेरठ से प्रयागराज तक की दूरी जो फिलहाल लगभग 12 घंटे में तय होती है, उसे घटाकर 5 से 6 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। इस एक्सप्रेसवे की डिजाइनिंग इस तरह की गई है कि यात्री 120 किमी प्रति घंटे की गति से सुरक्षित रूप से यात्रा कर सकें।
आर्थिक विकास को मिलेगी नई दिशा
गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण से कृषि, व्यापार, पर्यटन और उद्योग के क्षेत्रों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। पश्चिमी यूपी के औद्योगिक केंद्रों जैसे मेरठ, बुलंदशहर और हापुड़ से बनने वाला उत्पाद अब पूर्वी यूपी के बाजारों तक आसानी से पहुंच सकेगा। वहीं, प्रयागराज, रायबरेली और उन्नाव जैसे जिलों में नए औद्योगिक क्षेत्र और लॉजिस्टिक पार्क विकसित करने की योजना पर भी सरकार काम कर रही है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक हब, वेयरहाउसिंग जोन, लॉजिस्टिक्स पार्क और पेट्रोलिंग यूनिट स्थापित किए जाएंगे, जिससे लाखों लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। यह परियोजना न केवल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को मजबूत करेगी बल्कि यूपी की अर्थव्यवस्था को भी नई ऊंचाई पर ले जाएगी।
पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा पर विशेष ध्यान
गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना को पर्यावरणीय दृष्टि से भी संतुलित बनाए रखने की योजना तैयार की गई है। इसके लिए एक्सप्रेसवे के दोनों ओर लगभग 12 लाख पेड़ लगाए जा रहे हैं, जो प्रदूषण नियंत्रण और जैव विविधता संरक्षण में मदद करेंगे। इसके अलावा, हर जिले में रेस्ट एरिया, मेडिकल इमरजेंसी सेंटर और टोल पुलिस स्टेशन बनाए जा रहे हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
रक्षा दृष्टि से भी अहम
गंगा एक्सप्रेसवे का एक रणनीतिक पहलू यह है कि इसमें शाहजहांपुर जिले में 3.5 किलोमीटर लंबी एयर स्ट्रिप तैयार की जा रही है, जहां वायुसेना के लड़ाकू विमान आपात स्थिति में उतर और उड़ान भर सकेंगे। यह सुविधा इसे देश के अन्य प्रमुख एक्सप्रेसवे जैसे यमुना एक्सप्रेसवे और लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे की श्रेणी में खड़ा करती है।
जनवरी 2026 तक खुलने की उम्मीद
अधिकारियों का कहना है कि एक्सप्रेसवे का पहला चरण मेरठ से बदायूं तक अगले साल की शुरुआत में चालू कर दिया जाएगा, जबकि शेष हिस्सा 2026 के मध्य तक पूरी तरह तैयार हो जाएगा। निर्माण एजेंसियों को सख्त समयसीमा दी गई है ताकि प्रोजेक्ट में और देरी न हो।
निवासियों में उत्साह का माहौल
गंगा एक्सप्रेसवे के पास बसे जिलों के लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। किसानों और व्यापारियों का कहना है कि इस एक्सप्रेसवे से उनकी आवागमन सुविधा और व्यापारिक गतिविधियां दोनों में तेजी आएगी। वहीं स्थानीय प्रशासन इसे प्रदेश की “लाइफलाइन” बता रहा है, जो आने वाले दशक में उत्तर प्रदेश को देश के सर्वश्रेष्ठ कनेक्टेड राज्यों की सूची में शामिल करेगी।








