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  • महिला विश्व कप के 5 सबसे बड़े रन चेज: भारत तीन साल में तीन बार हुई शर्मसार, साउथ अफ्रीका ने फिर किया करिश्मा

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    महिला विश्व कप 2025 में भारतीय टीम के लिए शुक्रवार का दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। साउथ अफ्रीका की महिला टीम ने एक बार फिर भारतीय गेंदबाजों को पछाड़ते हुए 251 रनों के लक्ष्य को बखूबी चेज कर लिया। यह न सिर्फ इस विश्व कप का सबसे बड़ा चेज साबित हुआ बल्कि भारत के लिए तीसरी बार ऐसा हुआ है जब पिछले तीन सालों में विरोधी टीम ने बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए उसे शर्मसार किया।

    भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 50 ओवर में 251 रन बनाए। शुरुआती विकेट जल्दी गिरने के बावजूद कप्तान हरमनप्रीत कौर और स्मृति मंधाना ने पारी को संभाला। दोनों ने मिलकर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। हालांकि, गेंदबाजों से उम्मीद थी कि वे इस लक्ष्य की रक्षा कर लेंगी, लेकिन साउथ अफ्रीकी बल्लेबाजों ने धैर्य और दमखम दिखाते हुए मैच अपने नाम कर लिया।

    साउथ अफ्रीका की ओपनर लौरा वुल्फार्ट ने शानदार शतक लगाया और टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। 100 रनों के अंदर 5 विकेट खोने के बाद ऐसा लग रहा था कि साउथ अफ्रीका की पारी बिखर जाएगी, लेकिन मिडल ऑर्डर बल्लेबाज क्लो ट्रायन ने विस्फोटक बल्लेबाजी कर मैच को पलट दिया। भारत की गेंदबाजी एक बार फिर निर्णायक क्षणों में कमजोर साबित हुई, और टीम मैच से बाहर हो गई।

    यह पहली बार नहीं है जब भारत ने बड़े स्कोर के बावजूद मैच गंवाया हो। पिछले तीन सालों में टीम इंडिया तीन बार ऐसी हार का सामना कर चुकी है, जब उसने मजबूत स्कोर खड़ा किया, लेकिन विरोधी टीम ने रिकॉर्ड रन चेज कर लिया।

    महिला विश्व कप इतिहास में ऐसे कई मौके आए हैं जब टीमों ने असंभव लगने वाले लक्ष्यों का पीछा किया है। भारत की हार ने फिर से महिला क्रिकेट में रन चेज की रोमांचकता को उजागर कर दिया है। चलिए नजर डालते हैं महिला विश्व कप इतिहास के पांच सबसे बड़े रन चेज़ पर, जिन्होंने इस खेल को नई परिभाषा दी।

    पहला बड़ा रन चेज़ 2017 के विश्व कप में देखने को मिला था, जब इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 257 रन का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल किया था। उस मैच में नैट स्कीवर और हीथर नाइट की जोड़ी ने कमाल कर दिखाया था। यह महिला क्रिकेट के इतिहास में टर्निंग पॉइंट साबित हुआ था।

    दूसरा बड़ा चेज़ 2022 में हुआ जब न्यूजीलैंड ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 245 रन के लक्ष्य को आसानी से हासिल किया। एमेलिया केर ने उस मैच में धमाकेदार 91 रनों की पारी खेली थी और टीम को जीत दिलाई थी।

    तीसरा बड़ा रन चेज़ 2023 में देखने को मिला जब ऑस्ट्रेलिया ने भारत के खिलाफ 248 रन का लक्ष्य मात्र 46 ओवरों में हासिल कर लिया था। उस मैच में भारत की गेंदबाजी लाइनअप पूरी तरह से बिखर गई थी।

    चौथा और हालिया रिकॉर्ड 2024 में दर्ज हुआ जब इंग्लैंड ने पाकिस्तान के खिलाफ 252 रन का टारगेट चेज किया। उस मैच में डेनियल वायट और एमी जोन्स ने बेहतरीन साझेदारी निभाई थी।

    और अब 2025 में साउथ अफ्रीका ने भारत के खिलाफ 251 रन का टारगेट हासिल कर इस सूची में अपना नाम दर्ज कर लिया है। यह सिर्फ जीत नहीं थी बल्कि भारत के लिए गहन आत्ममंथन का समय लेकर आई।

    भारतीय टीम की हार के बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर ने कहा कि टीम ने पूरा प्रयास किया लेकिन महत्वपूर्ण मौकों पर कैच छोड़ना और कमजोर गेंदबाजी ने फर्क पैदा कर दिया। उन्होंने कहा, “हमने कई बार ऐसी स्थितियों से वापसी की है, और यह हार हमें मजबूत बनाएगी।”

    पूर्व कप्तान मिताली राज ने इस हार पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत को अपने डेथ ओवर बॉलिंग पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि टीम में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन दबाव के क्षणों में संयम बनाए रखना जरूरी है।

    साउथ अफ्रीकी कप्तान सुने लूस ने जीत पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, “यह हमारे लिए बहुत बड़ा पल है। भारत जैसी मजबूत टीम को हराना हमेशा खास होता है। हमारी टीम ने दिखाया कि जज़्बा और आत्मविश्वास से कोई भी लक्ष्य छोटा नहीं होता।”

    यह हार भारतीय महिला टीम के लिए चेतावनी की तरह है। विश्व कप जैसे टूर्नामेंट में निरंतरता और मानसिक मजबूती सबसे अहम होती है। भारत को अगर भविष्य में ट्रॉफी जीतनी है तो उसे डेथ बॉलिंग और फील्डिंग दोनों पर गहरी रणनीति बनानी होगी।

    महिला क्रिकेट में अब प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमें लगातार अपने खेल को बेहतर बना रही हैं। वहीं, भारत के पास स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा, और दीप्ति शर्मा जैसी विश्वस्तरीय खिलाड़ी हैं, जिन्हें अब दबाव में बेहतर प्रदर्शन करना होगा।

    महिला विश्व कप 2025 का यह मैच इतिहास में दर्ज हो गया है। साउथ अफ्रीका ने असंभव को संभव कर दिखाया और भारत को फिर एक बार आत्ममंथन के लिए मजबूर कर दिया। भारतीय टीम के लिए यह समय है अपनी कमजोरियों को पहचानने और अगले मैचों में नई रणनीति के साथ उतरने का।

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