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राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सिख पंथ के संस्थापक और प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के पावन अवसर पर सांगानेर विधानसभा क्षेत्र स्थित गुरुद्वारा साहिब में मत्था टेका और प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की मंगल कामना की। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर गुरुद्वारा परिसर में संगत के साथ लंगर सेवा में भी सहभागिता की और प्रसाद ग्रहण किया।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि गुरु नानक देव जी का जीवन करुणा, समानता, सेवा और मानवता का प्रेरणास्रोत है। उनके उपदेश आज भी समाज को एकजुट करने और मानव कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा, “नानक नाम चढ़दी कला, तेरे भाणे सरबत दा भला” — यह पवित्र वाक्य हमें न केवल परमात्मा की इच्छा में विश्वास रखना सिखाता है, बल्कि पूरे समाज के कल्याण की भावना भी उत्पन्न करता है।
भजनलाल शर्मा ने गुरुद्वारा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन से यह सिखाया कि सेवा ही सच्चा धर्म है। उन्होंने बताया कि गुरु नानक देव जी ने समाज में समानता और एकता का जो संदेश दिया, वह आज के युग में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को जाति, धर्म या भाषा के आधार पर विभाजित करने की बजाय गुरु नानक देव जी के आदर्शों के अनुरूप “एक मानवता, एक परिवार” के सिद्धांत को अपनाना चाहिए।
उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं को केवल स्मरण न करें, बल्कि उन्हें अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। करुणा, सत्य, परिश्रम और ईमानदारी के मूल्यों को आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु नानक देव जी का संदेश सार्वभौमिक है — उन्होंने कहा था कि परमात्मा हर जीव में विद्यमान है, और जब तक हम दूसरों के दुख को अपना नहीं समझेंगे, तब तक सच्चे अर्थों में धर्म का पालन नहीं कर पाएंगे।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने गुरुद्वारा साहिब की सेवा समिति के सदस्यों और श्रद्धालुओं से संवाद किया। उन्होंने गुरुद्वारा परिसर में सफाई, अनुशासन और सेवा भावना देखकर प्रसन्नता व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी धार्मिक स्थलों से समाज में सकारात्मकता और एकता का संदेश प्रसारित होता है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के लिए संदेश देते हुए कहा कि राजस्थान की धरती पर विविधता में एकता की परंपरा सदा से रही है। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी जैसे महान संतों के आदर्शों के कारण ही भारत आध्यात्मिक और सामाजिक दृष्टि से इतना समृद्ध राष्ट्र बना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सदैव धर्म, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने संगत के साथ बैठकर लंगर का प्रसाद ग्रहण किया और गुरुद्वारा साहिब की व्यवस्थाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारों में सेवा, समर्पण और समानता की जो भावना देखने को मिलती है, वही भारत की असली पहचान है।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ गुरबाणी कीर्तन में भाग लिया और गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व की महिमा का गुणगान किया। गुरुद्वारा परिसर में “सत नाम वाहे गुरु” के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो उठा।
मुख्यमंत्री के आगमन पर गुरुद्वारा प्रबंधक समिति ने उन्हें सिरोपा भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का समापन अरदास और सामूहिक प्रार्थना के साथ हुआ, जिसमें प्रदेश में अमन, शांति और समृद्धि की कामना की गई।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का यह दौरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि यह भी संदेश देता है कि राज्य के सर्वोच्च नेतृत्व द्वारा धर्म, मानवता और एकता के मूल्यों को सहेजने का कार्य निरंतर जारी है। गुरु नानक देव जी के उपदेशों को जीवन में उतारकर ही हम एक समरस और सुखी समाज का निर्माण कर सकते हैं।












