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फुटबॉल की सबसे बड़ी संस्था फीफा (FIFA) ने इतिहास में पहली बार ‘पीस अवॉर्ड’ (FIFA Peace Award) देने की घोषणा की है। खेल की दुनिया में यह फैसला एक बड़ा और प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। वजह है—अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम। दरअसल, इस घोषणा के बाद चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि क्या फीफा ने यह पुरस्कार ट्रंप को खुश करने या अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अपनी साख बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया है।
फीफा का यह नया अवॉर्ड उन लोगों, संस्थाओं या खिलाड़ियों को दिया जाएगा जिन्होंने खेल के माध्यम से विश्व शांति, एकता और सहयोग को बढ़ावा देने में योगदान दिया हो। फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैंटिनो ने इसे “फुटबॉल से आगे की सोच” बताते हुए कहा कि अब वक्त आ गया है जब खेल को सिर्फ प्रतियोगिता नहीं बल्कि मानवता के संदेश का माध्यम बनाया जाए।
फीफा ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि ‘पीस अवॉर्ड’ का उद्देश्य उन शख्सियतों को सम्मानित करना है जिन्होंने फुटबॉल या अन्य खेलों के जरिए समाज में सद्भाव, समानता और भाईचारा बढ़ाने का काम किया। यह पुरस्कार हर साल फीफा अवॉर्ड समारोह के दौरान दिया जाएगा।
इस साल यह अवॉर्ड पहली बार दिया जाएगा और नामांकन की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है।
हालांकि, फीफा के इस कदम पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ विश्लेषक इसे खेल में मानवता का नया अध्याय बता रहे हैं, तो कुछ का मानना है कि फीफा अपने पुराने विवादों से ध्यान हटाने के लिए इस तरह के कदम उठा रहा है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने 2026 फीफा विश्व कप की मेजबानी कनाडा और मैक्सिको के साथ मिलकर करने की तैयारी शुरू कर दी है। दिलचस्प बात यह है कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल में अमेरिका को इस टूर्नामेंट की मेजबानी दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई थी।
अब जब फीफा ने ‘पीस अवॉर्ड’ का ऐलान किया है, तो कई लोग इसे ट्रंप के ‘राजनीतिक प्रभाव’ से जोड़कर देख रहे हैं।
ट्रंप ने हाल ही में फिर से राजनीति में सक्रियता बढ़ाई है और 2025 में वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि को मजबूत करने की कोशिश में हैं। फीफा का यह अवॉर्ड ऐसे वक्त में आया है जब ट्रंप के समर्थक इसे उनके ‘डिप्लोमैटिक विजन’ से जोड़ रहे हैं।
हालांकि, फीफा ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि पहला पीस अवॉर्ड किसे दिया जाएगा। लेकिन अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि डोनाल्ड ट्रंप का नाम संभावित उम्मीदवारों में शामिल है।
अगर ऐसा होता है, तो यह पहली बार होगा जब किसी राजनीतिक नेता को फीफा के मंच से शांति के क्षेत्र में सम्मानित किया जाएगा।
फीफा के कुछ करीबी सूत्रों के अनुसार, पुरस्कार के लिए कई अन्य नाम भी विचाराधीन हैं, जिनमें विश्व प्रसिद्ध खिलाड़ी, सामाजिक कार्यकर्ता और अंतरराष्ट्रीय संगठन भी शामिल हैं।
फीफा के इस कदम ने एक बार फिर उस बहस को जन्म दे दिया है कि क्या खेल संस्थाओं को राजनीति से दूर रहना चाहिए या नहीं। आलोचकों का कहना है कि ‘पीस अवॉर्ड’ जैसी पहल खेल की साख को राजनीतिक प्रभावों से प्रभावित कर सकती है।
दूसरी ओर, समर्थकों का मानना है कि फुटबॉल जैसे खेल में अरबों प्रशंसक हैं, और अगर इसके मंच से शांति और सहयोग का संदेश जाता है, तो इससे समाज में सकारात्मक असर पड़ेगा।
खेल विश्लेषक डेविड ग्रांट का कहना है,
“फीफा अगर इस पुरस्कार को निष्पक्ष रखता है और इसे राजनीतिक उद्देश्यों से अलग रखता है, तो यह खेल जगत में ऐतिहासिक साबित हो सकता है। लेकिन अगर इसमें किसी राजनीतिक लाभ का संकेत मिला, तो इसकी विश्वसनीयता खतरे में पड़ जाएगी।”
पिछले कुछ वर्षों में फीफा कई भ्रष्टाचार और आर्थिक घोटालों के आरोपों से घिरा रहा है। ऐसे में कुछ जानकारों का मानना है कि ‘पीस अवॉर्ड’ फीफा के लिए अपनी छवि सुधारने का एक रणनीतिक प्रयास भी हो सकता है।
संस्था चाहती है कि फुटबॉल को सिर्फ खेल नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम माना जाए।








