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  • भारत की लैटिन अमेरिका में बड़ी चाल: पेरू और चिली के साथ ट्रेड डील से बढ़ेगी आर्थिक पकड़, नए अवसरों की उम्मीद

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    भारत ने वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने लैटिन अमेरिकी देशों पेरू और चिली के साथ व्यापारिक समझौतों पर महत्वपूर्ण वार्ताएं पूरी कर ली हैं। इन बैठकों का उद्देश्य दोनों देशों के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी और मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देना है। इससे भारत के लिए न केवल लैटिन अमेरिका में आर्थिक पकड़ मजबूत होगी बल्कि नए निवेश और निर्यात के अवसर भी खुलेंगे।

    विदेश व्यापार विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, भारत और पेरू के बीच व्यापक व्यापार समझौते (Comprehensive Trade Agreement) को लेकर बातचीत अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। वहीं, चिली के साथ प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (PTA) को विस्तार देने पर भी गंभीर चर्चा चल रही है। इन समझौतों से दोनों देशों के बीच व्यापार में कई गुना वृद्धि की उम्मीद है।

    भारत के लिए लैटिन अमेरिका एक रणनीतिक रूप से अहम क्षेत्र बन चुका है। यहां ऊर्जा, खनिज, खाद्य तेल और धातुओं के प्रचुर संसाधन मौजूद हैं, जिनकी भारत में भारी मांग है। वहीं, भारत के पास फार्मास्यूटिकल्स, आईटी, ऑटोमोबाइल और कृषि उपकरण जैसे क्षेत्रों में विश्वस्तरीय उत्पादन क्षमता है। ऐसे में यह साझेदारी दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद साबित होगी।

    पेरू के साथ चल रही बातचीत में भारत ने विशेष रूप से कॉपर, लिथियम, जिंक और खनन उत्पादों के आयात को लेकर रुचि दिखाई है। पेरू विश्व के शीर्ष लिथियम उत्पादकों में से एक है, जो भारत की इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इंडस्ट्री के लिए बेहद अहम है। वहीं, भारत से पेरू को फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग गुड्स, आईटी सेवाएं और कपड़ा उत्पादों के निर्यात में भी तेज़ी आने की संभावना है।

    दूसरी ओर, चिली के साथ भारत का मौजूदा व्यापार पहले से ही मज़बूत है, लेकिन अब दोनों देश इसे अगले स्तर पर ले जाने की दिशा में काम कर रहे हैं। वर्तमान में दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार करीब 3.5 अरब डॉलर का है, जिसे अगले पांच वर्षों में 7 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। चिली भारत को कॉपर, वाइन और फलों का निर्यात करता है, जबकि भारत से चिली को दवाएं, ऑटो पार्ट्स, केमिकल्स और मशीनरी की आपूर्ति होती है।

    भारत के वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह साझेदारी भारत के “Act Latin Policy” का हिस्सा है, जो देश के पारंपरिक व्यापारिक साझेदारों से आगे बढ़कर नई अर्थव्यवस्थाओं तक पहुंचने की रणनीति है। इस नीति का मकसद दक्षिण अमेरिका जैसे उभरते क्षेत्रों के साथ न केवल व्यापारिक संबंध बल्कि सांस्कृतिक और तकनीकी सहयोग को भी मजबूत करना है।

    इन वार्ताओं के सफल होने से भारतीय कंपनियों को लैटिन अमेरिकी बाजार में बेहतर टैक्स लाभ और कम आयात शुल्क की सुविधा मिलेगी। इससे भारतीय फार्मा और ऑटोमोबाइल उद्योग को प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिल सकती है। साथ ही, भारतीय निवेशकों के लिए पेरू और चिली में खनन, इंफ्रास्ट्रक्चर और अक्षय ऊर्जा क्षेत्रों में भी नए अवसर खुलेंगे।

    आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम वैश्विक व्यापार में उसकी स्थिति को और सुदृढ़ करेगा। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने ऑस्ट्रेलिया, यूएई, और यूरोपीय देशों के साथ भी मुक्त व्यापार समझौतों पर काम किया है, और अब लैटिन अमेरिका में यह नई साझेदारी देश की विविध आर्थिक कूटनीति को दर्शाती है।

    भारत और लैटिन अमेरिकी देशों के बीच बढ़ते रिश्ते न केवल आर्थिक दृष्टि से बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टि से भी अहम हैं। चीन पहले से ही इस क्षेत्र में मजबूत आर्थिक प्रभाव रखता है, ऐसे में भारत की यह सक्रियता संतुलन बनाने में मदद करेगी।

    जल्द ही दोनों देशों के बीच औपचारिक समझौतों की घोषणा की जा सकती है। उम्मीद है कि 2026 की शुरुआत तक भारत-पेरू व्यापार समझौता आधिकारिक रूप से लागू हो जाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक लेनदेन नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा।

    भारत का यह कदम इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वह वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में अब केवल एशिया तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि लैटिन अमेरिका जैसे उभरते बाज़ारों में भी अपनी मजबूत आर्थिक उपस्थिति दर्ज कराना चाहता है।

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