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अलीगढ़ में एसटीएफ (स्टेट टास्क फोर्स) ने एक बड़े साइबर अपराध का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने फर्जी वेबसाइटों के माध्यम से जाति, आय, निवास, जन्म और मृत्यु प्रमाण-पत्र तैयार कर फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई को अपराध नियंत्रण और डिजिटल धोखाधड़ी की रोकथाम में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, यह गिरोह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और फर्जी वेबसाइटों के जरिए लोगों के व्यक्तिगत डेटा का दुरुपयोग करता था। गिरोह के सदस्य आम लोगों से उनकी मूल जानकारी जुटाते थे और उसके आधार पर कूटरचित प्रमाण-पत्र तैयार करके आधार कार्ड बनाते थे। इसके बाद यह फर्जी दस्तावेज विभिन्न अवैध उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जाते थे, जिनमें सरकारी योजनाओं में धोखाधड़ी और बैंक लेन-देन शामिल हो सकते हैं।
एसटीएफ को इस गिरोह की गतिविधियों के बारे में काफी समय से शिकायतें मिल रही थीं। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी न केवल स्थानीय थे, बल्कि उनका पश्चिम बंगाल में मौजूद अन्य अपराधियों से भी संपर्क था। यह नेटवर्क पूरे भारत में डिजिटल पहचान धोखाधड़ी को अंजाम देने में सक्रिय था।
एसटीएफ ने विशेष अभियान चलाकर अलीगढ़ से गिरोह के दो मुख्य सदस्यों को पकड़ा। गिरफ्तार आरोपियों के पास कंप्यूटर, लैपटॉप और डिजिटल उपकरण बरामद किए गए, जिनमें फर्जी वेबसाइट और कूटरचित दस्तावेज बनाने का सारा सॉफ्टवेयर मौजूद था।
जांच अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी सभी डिजिटल प्रमाण-पत्रों को ऑनलाइन फर्जी तरीके से तैयार करने के लिए प्रशिक्षित थे। उनका काम वेबसाइट पर फर्जी जानकारी डालना और डिजिटल फाइलों के जरिए दस्तावेज बनाना था।
एसटीएफ के मुताबिक, आरोपियों का पश्चिम बंगाल में सक्रिय अन्य गिरोह के सदस्यों से गहरा संबंध था। जांच में यह भी सामने आया कि पश्चिम बंगाल के सदस्य फर्जी प्रमाण-पत्र और आधार कार्ड को व्यापक स्तर पर वितरित करने में शामिल थे। ऐसे नेटवर्क ने यह सुनिश्चित किया कि डिजिटल धोखाधड़ी केवल अलीगढ़ या एक राज्य तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे देश में फैल सके।
एसटीएफ अधिकारी ने कहा, “यह गिरोह केवल डिजिटल दस्तावेज बनाना ही नहीं करता था, बल्कि उन्हें सरकारी योजनाओं में धोखाधड़ी और अन्य अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल करता था। गिरफ्तार आरोपियों से हमें कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जिनसे नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंच बनाई जा रही है।”
इस मामले ने एक बार फिर डिजिटल दस्तावेज और पहचान सुरक्षा की अहमियत को उजागर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि फर्जी आधार कार्ड और प्रमाण-पत्र सिर्फ व्यक्तिगत धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इसका दुरुपयोग वित्तीय लेन-देन, सरकारी योजनाओं में घोटाले और अपराधियों के गैरकानूनी कामों में भी किया जा सकता है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. अजय वर्मा ने कहा, “लोगों को चाहिए कि वे अपने व्यक्तिगत डेटा को सुरक्षित रखें और केवल सरकारी या प्रमाणित वेबसाइटों के माध्यम से ही दस्तावेज बनवाएं। डिजिटल दस्तावेजों में धोखाधड़ी तेजी से बढ़ रही है, इसलिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है।”
एसटीएफ ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आधार कार्ड अधिनियम, आईटी एक्ट और धोखाधड़ी से संबंधित अन्य कानूनों के तहत मामला दर्ज किया है। साथ ही, पश्चिम बंगाल में नेटवर्क के अन्य सक्रिय सदस्य और फर्जी वेबसाइटों के संचालन का पता लगाने के लिए संयुक्त जांच जारी है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से और कई फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए, जो जांच में महत्वपूर्ण सुराग साबित होंगे। इनके माध्यम से पूरे गिरोह के डिजिटल नक्शे और वितरण चैनल का पता लगाया जा रहा है।
अलीगढ़ से पकड़ा गया यह गिरोह फर्जी वेबसाइटों के जरिए डिजिटल पहचान धोखाधड़ी का हिस्सा था। एसटीएफ की यह कार्रवाई साइबर अपराध और डिजिटल फ्रॉड के खिलाफ एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। वहीं, यह घटना नागरिकों को भी सतर्क रहने और अपनी व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखने की चेतावनी देती है।







