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बिहार विधानसभा चुनाव के बीच एक नया राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को बीजेपी के पूर्व राज्यसभा सांसद राकेश कुमार सिन्हा पर गंभीर आरोप लगाया है कि उन्होंने दो अलग-अलग मतदान केंद्रों पर वोट डाला। राहुल गांधी ने इसे लोकतंत्र के साथ “खुली छेड़छाड़” बताते हुए कहा कि “हरियाणा की तरह अब बिहार में भी वोट चोरी की जा रही है।”
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (Twitter) पर पोस्ट करते हुए लिखा,
“हरियाणा में वोट चोरी और अब बिहार में भी! बीजेपी के पूर्व सांसद दो जगह वोट डालते पकड़े गए — यह ‘एक व्यक्ति, अनेक वोट’ का मामला है। क्या यही है मोदी का ‘लोकतंत्र’? चुनाव आयोग मौन क्यों है? संविधान पर यह सीधा हमला है।”
यह आरोप बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के बाद आया है, जब विभिन्न जिलों से वोटिंग में गड़बड़ियों और मशीनों की खराबी की शिकायतें सामने आई थीं। राहुल गांधी के बयान ने इस मामले को और भी तूल दे दिया है।
सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी का आरोप है कि राकेश कुमार सिन्हा ने पटना और नालंदा — दोनों जगहों पर मतदान किया, जो चुनाव आचार संहिता और संविधान के खिलाफ है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से इसकी तुरंत जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा,
“यह लोकतंत्र की आत्मा पर हमला है। एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी ‘फ्री एंड फेयर इलेक्शन’ की बात करते हैं, दूसरी तरफ उनकी पार्टी के नेता खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। अगर ऐसा किसी सामान्य मतदाता ने किया होता, तो उसे तुरंत जेल भेज दिया जाता।”
वहीं, बीजेपी की ओर से इस आरोप को “राजनीतिक नाटक” बताया गया है। पार्टी प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने कहा कि राहुल गांधी बिना सबूत के बयानबाज़ी कर रहे हैं।
“राहुल गांधी हमेशा चुनाव के वक्त भ्रम फैलाते हैं। अगर उन्हें सबूत है तो वे चुनाव आयोग को दें। बिहार में मतदान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और ऐसी अफवाहें केवल जनता को गुमराह करने का काम करती हैं।”
इस विवाद पर चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि “दोहरी वोटिंग का कोई मामला आयोग के पास औपचारिक रूप से नहीं आया है, लेकिन यदि किसी उम्मीदवार या पार्टी की ओर से शिकायत दर्ज होती है, तो जांच कराई जाएगी।”
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राहुल गांधी द्वारा उठाया गया यह मुद्दा विपक्षी गठबंधन “इंडिया ब्लॉक” की रणनीति का हिस्सा है, जिससे वे बीजेपी पर चुनावी बेईमानी और संस्थागत पक्षपात के आरोप को मजबूत करना चाहते हैं।
बिहार में इस समय चुनावी माहौल चरम पर है। पहले चरण के मतदान के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। राहुल गांधी लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर निशाना साध रहे हैं, जबकि बीजेपी विपक्ष पर “झूठ और भ्रम फैलाने” का आरोप लगा रही है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी का बयान किसी व्यक्तिगत आरोप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे चुनावी सिस्टम पर सवाल उठाता है। पार्टी ने मांग की है कि सभी मतदान केंद्रों के CCTV फुटेज सार्वजनिक किए जाएं और मतदान प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया जाए।
दूसरी ओर, राकेश कुमार सिन्हा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को “झूठा और दुर्भावनापूर्ण” बताया है। उन्होंने कहा,
“मैंने केवल एक ही जगह मतदान किया है और यह दावा पूरी तरह गलत है। कांग्रेस चुनाव हारने के डर से झूठ का सहारा ले रही है।”
इस विवाद ने बिहार चुनाव में नया मोड़ ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राहुल गांधी का यह आरोप विपक्ष के लिए एक भावनात्मक और नैतिक मुद्दा बन सकता है, खासकर तब जब जनता पहले से ही बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों से नाराज़ है।
अब सबकी नज़र चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर है — क्या आयोग इस मामले की जांच करेगा या इसे केवल एक राजनीतिक बयान मानकर टाल देगा?
राहुल गांधी के इस आरोप ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है। एक तरफ बीजेपी अपने विकास एजेंडे और प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता पर भरोसा कर रही है, वहीं कांग्रेस और विपक्षी दल लोकतंत्र की निष्पक्षता के सवाल को जनता के बीच प्रमुख मुद्दा बनाना चाहते हैं।
बिहार के मतदाताओं के लिए यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की साख की परीक्षा भी बन गया है। जैसे-जैसे मतदान के अगले चरण नज़दीक आ रहे हैं, यह देखना दिलचस्प होगा कि यह “वोट चोरी विवाद” बिहार की राजनीतिक हवा को किस दिशा में मोड़ता है।








