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  • ‘वंदे मातरम्’ भारत की आत्मा का स्वर है: अमित शाह बोले— यह सिर्फ शब्द नहीं, राष्ट्र की भावना का प्रतीक

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    राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर राजधानी दिल्ली में आयोजित विशेष समारोह में गृह मंत्री अमित शाह, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा नेता रेखा गुप्ता ने इस गीत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता पर अपने विचार व्यक्त किए। यह आयोजन बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा रचित इस महान गीत की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, जिसमें देशभर से कई विद्वान, कलाकार और छात्र शामिल हुए।

    कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक वंदे मातरम् की सामूहिक प्रस्तुति से हुआ, जिसके बाद गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि “‘वंदे मातरम्’ केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि यह भारत की आत्मा का स्वर है।” उन्होंने कहा कि यह गीत उस युग की निशानी है जब भारत माता की स्वतंत्रता के लिए हर भारतीय के दिल में जोश और त्याग की भावना थी।

    अमित शाह ने कहा,

    “वंदे मातरम् वह शब्द है जिसने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ देश को एकजुट किया। इसने स्वतंत्रता सेनानियों में अमर ज्वाला प्रज्वलित की और भारत को आज़ादी की राह पर अग्रसर किया। यह गीत हमारी सभ्यता, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का जीवंत प्रतीक है।”

    उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश वंदे मातरम् की भावना को फिर से जीवंत कर रहा है। “आज जब हम आत्मनिर्भर भारत और वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहे हैं, तब ‘वंदे मातरम्’ के इन शब्दों से हमें वही प्रेरणा मिलती है जो हमारे पूर्वजों को मिली थी,” शाह ने कहा।

    कार्यक्रम में पूर्व मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी वंदे मातरम् के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह गीत केवल राष्ट्रीय भावना नहीं, बल्कि हर भारतीय की आत्मा से जुड़ा हुआ है।
    उन्होंने कहा,

    “जब हम ‘वंदे मातरम्’ बोलते हैं, तो हम अपनी मातृभूमि को प्रणाम करते हैं। यह शब्द भारत की संस्कृति, मातृत्व और त्याग का प्रतीक है। आज की युवा पीढ़ी को इस गीत का गहराई से अर्थ समझना चाहिए।”

    भाजपा नेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता रेखा गुप्ता ने कहा कि वंदे मातरम् महिलाओं की शक्ति और मातृत्व की भावना का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा,

    “बंकिमचंद्र चटर्जी ने जब यह गीत लिखा था, तब उसमें भारत माता के रूप में स्त्रीशक्ति की झलक दिखाई गई थी। यह गीत उस मातृत्व की आराधना है जिसने हमें स्वतंत्रता और संस्कार दोनों दिए हैं।”

    इस अवसर पर वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ को यादगार बनाने के लिए एक विशेष डाक टिकट और स्मारक सिक्का भी जारी किया गया। इसके साथ ही ‘वंदे मातरम्’ की एक अंतरराष्ट्रीय वेबसाइट भी लॉन्च की गई, जिसमें इस गीत का इतिहास, अनुवाद और इसकी विभिन्न भाषाओं में प्रस्तुतियों को दिखाया गया है।

    कार्यक्रम में शामिल लोगों ने इस अवसर को भारत के गौरवपूर्ण इतिहास का प्रतीक बताया। कई सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में भारत की विविधता और एकता को प्रदर्शित किया गया, वहीं स्कूल के बच्चों ने वंदे मातरम् को संगीतबद्ध रूप में प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया।

    इतिहासकारों के अनुसार, बंकिमचंद्र चटर्जी ने 1875 में इस गीत की रचना की थी, जो बाद में स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा बन गया। यह गीत पहली बार 1896 में कांग्रेस अधिवेशन में गाया गया था। तब से लेकर आज तक वंदे मातरम् भारतीयों के दिलों में जोश, एकता और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक बना हुआ है।

    अमित शाह ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि,

    “जब तक भारतवासी ‘वंदे मातरम्’ की भावना को अपने हृदय में जिंदा रखेंगे, तब तक कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती। यह गीत हमें यह याद दिलाता है कि हम सब एक मां की संतान हैं, और हमारा राष्ट्र सर्वोपरि है।”

    इस आयोजन के साथ देशभर में वर्षभर चलने वाले कार्यक्रमों की भी शुरुआत हो गई है, जो 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से देशभर के शिक्षण संस्थानों, सांस्कृतिक संगठनों और सामाजिक समूहों में वंदे मातरम् के मूल्यों को प्रचारित करने का उद्देश्य रखा गया है।

    यह स्मरणोत्सव न केवल भारत के गौरवशाली इतिहास को याद करने का अवसर है, बल्कि यह यह भी दर्शाता है कि 150 वर्ष बाद भी “वंदे मातरम्” का स्वर आज भी उतना ही सशक्त और प्रेरणादायक है, जितना स्वतंत्रता संग्राम के दौर में था।

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