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भारत की एकता और अखंडता के प्रतीक, लौहपुरुष और भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर देशभर में श्रद्धा और सम्मान का माहौल देखने को मिला। इस विशेष अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुजरात के केवड़िया स्थित विश्वप्रसिद्ध “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” स्थल का दौरा किया और सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री शर्मा ने इस अवसर पर सरदार पटेल के दूरदर्शी नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को भावपूर्ण शब्दों में याद किया। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने जिस दृढ़ संकल्प और निष्ठा के साथ देश के 562 रियासतों का एकीकरण किया, वह भारतीय इतिहास का अभूतपूर्व अध्याय है। आज भारत जिस रूप में एक सशक्त और अखंड राष्ट्र के रूप में खड़ा है, उसका श्रेय सरदार पटेल की अदम्य इच्छाशक्ति और लौह-संकल्प को जाता है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ राजस्थान के माननीय राज्यपाल श्री हरिभाऊ किसनराव बागड़े भी उपस्थित रहे। दोनों गणमान्य अतिथियों ने “राष्ट्रीय एकता दिवस एवं भारत पर्व 2025” कार्यक्रम में हिस्सा लिया और देश की एकता, अखंडता एवं सामाजिक समरसता के संदेश को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरदार पटेल का जीवन हमें राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि आज जब भारत विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है, तब हमें सरदार पटेल के आदर्शों को आत्मसात कर देश की प्रगति में योगदान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” केवल एक प्रतिमा नहीं, बल्कि यह भारत की एकता, साहस और नेतृत्व की प्रतिमूर्ति है, जो हर भारतीय को गर्व का अनुभव कराती है।
कार्यक्रम के दौरान “भारत पर्व 2025” के तहत आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में भारत की विविधता में एकता की झलक देखने को मिली। राजस्थान, गुजरात, पंजाब, असम और तमिलनाडु के लोक कलाकारों ने अपनी पारंपरिक नृत्य और संगीत के माध्यम से देश की सांस्कृतिक समृद्धि को प्रदर्शित किया। मुख्यमंत्री ने इन प्रस्तुतियों का अवलोकन किया और कलाकारों की सराहना की।
इस मौके पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सरदार पटेल का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने कहा कि आज के युवा को “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना के साथ देश को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में योगदान देना चाहिए। सरदार पटेल ने जिस तरह देश के विभिन्न हिस्सों को एक सूत्र में पिरोया, उसी तरह हमें भी समाज के हर वर्ग को समान अवसर और सम्मान देने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने अपने संबोधन में कहा कि सरदार पटेल केवल भारत के लौहपुरुष ही नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के मूल स्तंभों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि भारत की आज़ादी के बाद जिस राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचे की नींव रखी गई, उसमें सरदार पटेल की भूमिका केंद्रीय थी। उनका दृष्टिकोण आज भी शासन और नीति निर्माण के लिए मार्गदर्शक बना हुआ है।
“स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” परिसर इस अवसर पर रोशनी और देशभक्ति के रंगों से सराबोर नजर आया। देशभर से आए हजारों लोग इस आयोजन का हिस्सा बने और अपने प्रिय नेता को श्रद्धांजलि दी। सरदार पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा, जो विश्व की सबसे ऊंची मूर्ति है, आज भी राष्ट्र की एकता और शक्ति का प्रतीक बनी हुई है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की यह यात्रा न केवल श्रद्धांजलि का प्रतीक थी, बल्कि यह संदेश भी देती है कि भारत की प्रगति और स्थिरता का मार्ग तभी प्रशस्त होगा जब हम सब सरदार पटेल की एकता, कर्तव्यनिष्ठा और देशप्रेम की भावना को आत्मसात करेंगे।












