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विश्व बैंक ने भारत के वित्तीय तंत्र की मजबूती को लेकर बड़ा बयान दिया है। एक नई रिपोर्ट में संगठन ने माना है कि भारत का फाइनेंशियल सिस्टम पहले की तुलना में कहीं अधिक सशक्त, विविधीकृत और समावेशी हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, बीते एक दशक में भारत ने जिस तरह से वित्तीय क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार किए हैं, उससे देश न केवल 2010 के दशक की चुनौतियों से उबरा, बल्कि कोविड-19 महामारी जैसे वैश्विक संकटों के बाद भी अपनी आर्थिक रफ्तार बनाए रखने में सफल रहा।
विश्व बैंक की इस रिपोर्ट का नाम फाइनेंस सेक्टर असेसमेंट (Financial Sector Assessment – FSA) है, जिसमें भारत के वित्तीय ढांचे का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की आर्थिक प्रगति में वित्तीय समावेशन की भूमिका निर्णायक रही है। सरकार द्वारा शुरू किए गए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे कि आधार, यूपीआई और जन धन योजना, ने देश में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच को गांव-गांव तक पहुंचाया है।
विश्व बैंक का कहना है कि इन डिजिटल पहलों के चलते भारत ने एक “वर्ल्ड-क्लास फाइनेंशियल इकोसिस्टम” तैयार किया है, जो विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में अब 80% से अधिक वयस्कों के पास बैंक खाता है, जो 2011 में मात्र 35% था। यह वृद्धि न केवल तकनीकी प्रगति का परिणाम है बल्कि नीतिगत सुधारों की निरंतरता का प्रमाण भी है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत का वित्तीय क्षेत्र अब पहले की तुलना में अधिक विविधीकृत हो गया है। बैंकिंग, बीमा, पूंजी बाजार और डिजिटल भुगतान प्रणाली — सभी ने एक साथ मिलकर आर्थिक स्थिरता को मजबूत किया है। हालांकि, वर्ल्ड बैंक ने यह भी सुझाव दिया है कि भारत को 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को पाने के लिए वित्तीय सुधारों की गति को और तेज करना होगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि निजी पूंजी जुटाने और छोटे एवं मझोले उद्यमों (MSMEs) को सस्ती और आसान वित्तीय सुविधाएं देने की दिशा में और काम करने की जरूरत है। MSME सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो देश के रोजगार और उत्पादन में बड़ा योगदान देता है। वित्तीय संसाधनों तक इनकी बेहतर पहुंच से भारत की आर्थिक विकास दर में नई ऊर्जा आ सकती है।
महिलाओं की वित्तीय भागीदारी को लेकर भी रिपोर्ट में सकारात्मक टिप्पणियां की गई हैं। वर्ल्ड बैंक ने कहा कि भारत में महिलाओं के लिए बैंक खातों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, लेकिन अब जरूरत है कि उन्हें इन खातों का सक्रिय उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। रिपोर्ट के अनुसार, यदि महिलाएं वित्तीय निर्णयों में अधिक भागीदारी करेंगी, तो देश की अर्थव्यवस्था में समावेशी वृद्धि सुनिश्चित होगी।
रिपोर्ट में भारत के नियामक ढांचे, जैसे कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) और वित्त मंत्रालय की नीतियों की सराहना की गई है। विश्व बैंक का मानना है कि इन संस्थाओं ने वित्तीय स्थिरता बनाए रखने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
हालांकि, रिपोर्ट में कुछ सुधारों की सिफारिश भी की गई है। वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि भारत को वित्तीय शिक्षा और साइबर सुरक्षा पर अधिक ध्यान देना चाहिए। डिजिटल ट्रांजेक्शन में तेजी के साथ साइबर खतरों में भी वृद्धि हो रही है, इसलिए उपभोक्ताओं को सुरक्षित लेनदेन के प्रति जागरूक बनाना समय की मांग है।
कुल मिलाकर, विश्व बैंक की यह रिपोर्ट भारत की आर्थिक यात्रा पर एक वैश्विक मुहर की तरह है। यह दर्शाती है कि जिस देश को कभी वित्तीय समावेशन की कमी के लिए आलोचना झेलनी पड़ती थी, वही अब वैश्विक मंच पर एक मिसाल बनकर उभरा है। आने वाले वर्षों में अगर भारत निजी निवेश, नवाचार और पारदर्शिता के साथ अपने वित्तीय क्षेत्र में सुधार जारी रखता है, तो 2047 तक “विकसित भारत” का सपना साकार करना अब कोई दूर की बात नहीं रह जाएगा।








