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भारतीय सेना ने देश की सुरक्षा और रणनीतिक तैयारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए हाल ही में दो बड़े युद्धाभ्यासों का सफल आयोजन किया है। एक ओर जहां अरुणाचल प्रदेश के अग्रिम इलाकों में अटैक हेलीकॉप्टरों और पैदल सेना (Infantry) ने संयुक्त अभ्यास किया, वहीं दूसरी ओर पश्चिमी तट पर भारतीय नौसेना और थलसेना ने मिलकर एक बड़ा जल-थल युद्धाभ्यास संपन्न किया। दोनों अभ्यासों का उद्देश्य देश की रक्षा क्षमताओं को और अधिक मजबूत बनाना और तीनों सेनाओं के बीच संपूर्ण तालमेल (Joint Coordination) को बढ़ाना था।
अरुणाचल प्रदेश में किया गया यह अभ्यास सामरिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। यह इलाका चीन सीमा से सटा हुआ है और हाल के वर्षों में यहां भारतीय सेना की गतिविधियां काफी तेज़ हुई हैं। इस अभ्यास में भारतीय सेना के लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH), अडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH Dhruv) और पैदल सेना की यूनिटों ने भाग लिया।
अभ्यास के दौरान हेलीकॉप्टरों ने दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में उड़ान भरी और सैनिकों के साथ मिलकर तेज रफ्तार युद्धक रणनीति (Combat Coordination) का प्रदर्शन किया। इसका उद्देश्य सीमाई इलाकों में दुश्मन की किसी भी संभावित घुसपैठ पर तेजी से जवाबी कार्रवाई की क्षमता को परखना था।
भारतीय सेना के सूत्रों के अनुसार, इस अभ्यास ने यह साबित कर दिया है कि भारत की रक्षा व्यवस्था अब हर मौसम और हर इलाके में 24 घंटे सक्रिय और जवाब देने में सक्षम है। अरुणाचल जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में हेलीकॉप्टरों का अभ्यास यह दिखाता है कि भारत की तकनीकी और सामरिक क्षमता अब पर्वतीय युद्ध (Mountain Warfare) में भी पूरी तरह सक्षम हो चुकी है।
वहीं दूसरी ओर, देश के पश्चिमी तट पर भारतीय नौसेना (Indian Navy) और थलसेना (Indian Army) ने मिलकर एक विशाल एम्फिबियस वॉर एक्सरसाइज (Amphibious War Exercise) का आयोजन किया। इस अभ्यास का नेतृत्व दक्षिणी कमान (Southern Command) की सुदर्शन चक्र कोर (Sudarshan Chakra Corps) ने किया।
इसमें नौसेना के युद्धपोतों, हेलीकॉप्टरों और थलसेना के मेकनाइज्ड रेजिमेंट्स ने हिस्सा लिया। युद्धाभ्यास के दौरान जल से थल पर उतरने वाली रणनीतियों, तटीय सुरक्षा व्यवस्था, और संयुक्त संचार प्रणाली का सफल परीक्षण किया गया।
इस तरह के अभ्यास यह संकेत देते हैं कि भारतीय सेना न केवल सीमाई इलाकों में बल्कि समुद्री मोर्चों पर भी अपनी तैयारियों को लगातार मजबूत कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन युद्धाभ्यासों का समय भी बहुत मायने रखता है, क्योंकि वर्तमान में भारत-चीन सीमा तनाव, हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती चीनी गतिविधियां, और दक्षिण एशिया में बदलते सुरक्षा समीकरण भारत को अपनी सैन्य तैयारियों को नए सिरे से परखने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के अभ्यास न केवल युद्ध की स्थिति में सेना की प्रतिक्रिया क्षमता को परखते हैं, बल्कि यह संदेश भी देते हैं कि भारत अब किसी भी दिशा से आने वाली चुनौती का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
भारत की ‘थिएटर कमांड स्ट्रक्चर’ की दिशा में भी ये युद्धाभ्यास एक बड़ा कदम माने जा रहे हैं, जहां तीनों सेनाओं – थलसेना, नौसेना और वायुसेना – के बीच बेहतर समन्वय और संसाधनों के साझा उपयोग की दिशा में काम किया जा रहा है।
हाल के वर्षों में भारत ने अपनी सैन्य शक्ति को तकनीकी और रणनीतिक दोनों स्तरों पर कई गुना बढ़ाया है। देश अब स्वदेशी लड़ाकू हेलीकॉप्टरों, ड्रोन सिस्टम, और स्मार्ट वेपन टेक्नोलॉजी पर अधिक जोर दे रहा है।
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, आने वाले महीनों में इस तरह के और भी अभ्यास किए जाएंगे ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में सेना की तत्परता को और परखा जा सके।
अरुणाचल प्रदेश में हुए इस अटैक हेलीकॉप्टर अभ्यास ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत की सेनाएं हर हालात में सक्रिय हैं। वहीं, पश्चिमी तट पर हुआ जल-थल युद्धाभ्यास भारत की तीनों सेनाओं के बीच बढ़ते समन्वय और सामरिक मजबूती का प्रमाण है।








