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भारतीय फुटबॉल इस समय अपने सबसे गंभीर दौर से गुजर रहा है। देश की सबसे बड़ी फुटबॉल लीग, इंडियन सुपर लीग (ISL), के आयोजन पर गहरा संकट छा गया है। ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) अपनी इस प्रीमियम लीग के लिए किसी भी नए कॉमर्शियल पार्टनर या फाइनेंसर को खोजने में नाकाम रहा है। इस स्थिति ने भारतीय फुटबॉल के ढांचे को हिला दिया है, क्योंकि इस टूर्नामेंट पर ही देश के क्लब फुटबॉल और खिलाड़ियों की आजीविका निर्भर करती है।
AIFF ने 7 नवंबर को ISL के नए कॉमर्शियल पार्टनर के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जमा कराने की अंतिम तारीख तय की थी, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि किसी भी कंपनी या निवेशक ने इस ऑफर में दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसका सीधा मतलब यह है कि देश की इस सबसे लोकप्रिय फुटबॉल लीग के लिए फिलहाल कोई वित्तीय सहारा मौजूद नहीं है।
Reliance समूह की कंपनी फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड (FSDL), जो अब तक ISL की व्यावसायिक गतिविधियों को संभाल रही थी, उसका अनुबंध 8 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रहा है। शुरूआत में यह उम्मीद थी कि Reliance समूह इस करार को आगे बढ़ा देगा, लेकिन सूत्रों के अनुसार, FSDL ने अब इस साझेदारी को नवीनीकृत करने में रुचि नहीं दिखाई। इससे न केवल लीग के भविष्य पर बल्कि खिलाड़ियों, क्लबों और पूरे फुटबॉल इकोसिस्टम पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं।
इस स्थिति का सबसे बड़ा असर भारतीय फुटबॉल क्लबों और खिलाड़ियों पर पड़ सकता है। ISL में भाग लेने वाले क्लबों को अब अपने खर्चों में भारी कटौती करनी पड़ सकती है। कई क्लब पहले से ही सीमित बजट पर काम कर रहे हैं, और फंडिंग रुक जाने की स्थिति में खिलाड़ियों की छंटनी (player layoffs) या सैलरी में कटौती की नौबत आ सकती है।
AIFF के अधिकारियों का कहना है कि फेडरेशन अब अन्य संभावित इन्वेस्टर्स और कॉर्पोरेट हाउसेस से संपर्क कर रहा है ताकि ISL का आयोजन जारी रह सके। फेडरेशन ने यह भी स्पष्ट किया कि वह टूर्नामेंट को रद्द करने की स्थिति में नहीं है, लेकिन वित्तीय संकट के कारण आयोजन में देरी या प्रारूप में बदलाव किया जा सकता है।
AIFF के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हम इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। भारतीय फुटबॉल के विकास के लिए ISL का आयोजन जरूरी है, इसलिए हम वैकल्पिक फाइनेंसर और स्पॉन्सर्स से बातचीत कर रहे हैं।”
इंडियन सुपर लीग की शुरुआत 2014 में भारतीय फुटबॉल को नई पहचान देने के उद्देश्य से की गई थी। इस लीग ने वर्षों में न केवल देश में फुटबॉल की लोकप्रियता बढ़ाई, बल्कि कई युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में भी मदद की। लेकिन अब जब फंडिंग की समस्या ने सिर उठाया है, तो इसका असर पूरे फुटबॉल ढांचे पर पड़ने की आशंका है।
कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट केवल वित्तीय नहीं बल्कि प्रशासनिक विफलता का परिणाम भी है। उन्होंने कहा कि AIFF को पहले से वैकल्पिक रणनीति तैयार करनी चाहिए थी। Reliance समूह की FSDL के हटने के बाद एक मजबूत साझेदारी मॉडल की जरूरत थी, ताकि ISL की निरंतरता बनी रहे।
दूसरी ओर, खिलाड़ियों के बीच भी गहरी चिंता है। कई खिलाड़ियों के अनुबंध दिसंबर के बाद नवीनीकरण की प्रतीक्षा में हैं, और फाइनेंसर की अनुपलब्धता के कारण सैलरी, बोनस और अनुबंध की स्थिति अनिश्चित हो गई है। क्लबों को भी अपने विदेशी खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ को लेकर कठिन फैसले लेने पड़ सकते हैं।
अगर आने वाले कुछ हफ्तों में कोई समाधान नहीं निकलता है, तो यह भारतीय फुटबॉल के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। यह लीग न केवल एक खेल टूर्नामेंट है बल्कि करोड़ों रुपए के निवेश, ब्रांड साझेदारियों और युवा खिलाड़ियों के करियर का आधार भी है।
AIFF फिलहाल नए निवेशकों के साथ बातचीत में जुटा है और उम्मीद कर रहा है कि जल्द ही कोई सकारात्मक परिणाम सामने आएगा। लेकिन अगर यह संकट लंबा खिंचता है, तो भारतीय फुटबॉल के सुनहरे भविष्य का सपना एक कठिन दौर में प्रवेश कर सकता है।







