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भारतीय सेना की सप्त शक्ति कमान (Sapta Shakti Command) आने वाले 10 और 11 नवंबर को जयपुर में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा संगोष्ठी का आयोजन करने जा रही है। यह आयोजन जयपुर सैन्य स्टेशन में किया जाएगा, जिसका विषय होगा – ‘समग्र राष्ट्र दृष्टिकोण’ (Whole of Nation Approach – WoNA)। इस संगोष्ठी का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए सशस्त्र बलों, नागरिक प्रशासन, उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के बीच तालमेल को और गहरा बनाना है।
यह दो दिवसीय संगोष्ठी भारतीय सेना की सप्त शक्ति कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह की संकल्पना पर आधारित है। उन्होंने इस विचार को इस उद्देश्य से आगे बढ़ाया कि राष्ट्रीय सुरक्षा आज केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, औद्योगिक, तकनीकी और कूटनीतिक सभी पहलुओं से जुड़ी हुई है। इसलिए, रक्षा के क्षेत्र में “समग्र राष्ट्र दृष्टिकोण” की अवधारणा अपनाना समय की मांग बन गई है।
संगोष्ठी में नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज (CLAWS) का भी सहयोग रहेगा, जो भारतीय सेना का एक प्रमुख थिंक टैंक है। CLAWS देश की सामरिक नीतियों, भू-राजनीतिक चुनौतियों और आधुनिक युद्ध रणनीतियों पर शोध कार्य करता है। इस संयुक्त प्रयास से यह सेमिनार सुरक्षा परिदृश्य में आने वाले बदलावों और उनसे निपटने की रणनीतियों पर एक व्यापक विमर्श का मंच प्रदान करेगा।
रक्षा प्रवक्ता (PRO Defence Rajasthan) के अनुसार, इस संगोष्ठी में देशभर से रक्षा विशेषज्ञ, पूर्व सेना अधिकारी, शिक्षाविद, नीति निर्धारक और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधि भाग लेंगे। चर्चा के मुख्य बिंदुओं में साइबर सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और आधुनिक तकनीकी के उपयोग से रक्षा प्रणाली को मजबूत करना शामिल होगा। इसके साथ ही भारत की समग्र राष्ट्रीय शक्ति को एकीकृत ढांचे में लाने के उपायों पर भी मंथन होगा।
सप्त शक्ति कमान भारतीय सेना का एक महत्वपूर्ण परिचालन केंद्र है, जो देश के पश्चिमी क्षेत्र की सुरक्षा का दायित्व संभालता है। इसका मुख्यालय जयपुर में स्थित है और यह कमान राजस्थान, पंजाब और गुजरात के संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों की निगरानी करती है। समय-समय पर यह कमान न केवल सैन्य अभ्यासों का संचालन करती है, बल्कि नागरिक और औद्योगिक संस्थानों के साथ भी सुरक्षा-संबंधी सहयोग स्थापित करती है।
जयपुर में आयोजित होने जा रही यह संगोष्ठी इस बात का प्रतीक है कि भारतीय सेना अब केवल पारंपरिक युद्ध रणनीतियों तक सीमित नहीं रहना चाहती। वह एक “Whole of Nation” यानी पूरे राष्ट्र की सामूहिक क्षमता को एकजुट कर सुरक्षा के नए आयाम विकसित करने पर जोर दे रही है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में, जहां युद्ध के स्वरूप तेजी से बदल रहे हैं, वहां इस तरह की पहलें भारत की सामरिक सोच में गहराई और आधुनिकता का संकेत देती हैं।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस संगोष्ठी से नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत को भी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की गहराई को समझने और उसमें अपनी भूमिका तय करने का अवसर मिलेगा। खासतौर पर रक्षा उत्पादन, स्वदेशी तकनीकी विकास और आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत सेना और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा, संगोष्ठी में यह भी चर्चा की जाएगी कि शिक्षा और अनुसंधान संस्थान किस तरह रक्षा रणनीति में योगदान दे सकते हैं। विश्वविद्यालयों और थिंक टैंकों को रक्षा अध्ययन और तकनीकी विकास से जोड़ने के प्रस्ताव पर भी विमर्श होगा।
सप्त शक्ति कमान की यह पहल इस बात की पुष्टि करती है कि भारतीय सेना न केवल सीमाओं की रक्षा में अग्रणी है, बल्कि वह देश के समग्र विकास और सुरक्षा तंत्र में एक सक्रिय भागीदार के रूप में उभर रही है। जयपुर में होने वाला यह आयोजन एक ऐसा मंच साबित हो सकता है, जहां से राष्ट्रीय सुरक्षा के नए विचार, तकनीकी नवाचार और सामूहिक सहयोग का एक नया अध्याय शुरू होगा।
10 और 11 नवंबर को होने वाली इस संगोष्ठी से यह उम्मीद की जा रही है कि भारत की रक्षा रणनीति में “Whole of Nation Approach” को एक ठोस रूप मिलेगा, जिससे देश की सुरक्षा और स्थिरता के प्रति नई ऊर्जा और दृष्टि विकसित होगी।








