इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं।

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने एर्नाकुलम-बेंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस के उद्घाटन समारोह में छात्रों द्वारा राष्ट्र स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का गान प्रस्तुत किए जाने की कड़ी निंदा की है। मुख्यमंत्री ने इसे सार्वजनिक मंच पर असंवेदनशील और अनुचित कदम बताया, जो राज्य और देश के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के लिए खतरनाक संदेश देता है।
एर्नाकुलम-बेंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस का उद्घाटन शनिवार को हुआ। इस समारोह में दक्षिण रेलवे प्रशासन ने सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें छात्रों को आरएसएस का गान प्रस्तुत करने के लिए कहा गया।
मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इसे सार्वजनिक मंच पर धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ और छात्रों के राजनीतिकरण का उदाहरण बताया। उनका कहना है कि किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में किसी विशेष राजनीतिक या धार्मिक संगठन के प्रतीक या गान को प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने संवाददाताओं से कहा:
“रेलवे जैसे सार्वजनिक संस्थान का उद्घाटन किसी राजनीतिक या धार्मिक संगठन के गान के साथ करना उचित नहीं है। यह कदम हमारी सांस्कृतिक और सामाजिक भावना को चोट पहुंचाता है। ऐसे मंच पर सभी नागरिकों की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि यह घटना सार्वजनिक मंच पर धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा के लिए एक चेतावनी है और सभी प्रशासनिक अधिकारियों को सतर्क रहना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस विवाद ने भारत में सार्वजनिक कार्यक्रमों में धार्मिक और राजनीतिक संगठनों के हस्तक्षेप पर बहस को जन्म दिया है।
-
कुछ लोगों का मानना है कि यह केवल सांस्कृतिक प्रस्तुति का हिस्सा था और इसे राजनीतिक रूप देने की जरूरत नहीं थी।
-
वहीं, आलोचक इसे सार्वजनिक संसाधनों के गलत उपयोग और समाज में विभाजन पैदा करने वाला कदम मानते हैं।
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर गरमागरम बहस चल रही है।
-
मुख्यमंत्री के समर्थन में लोग इसे धर्मनिरपेक्षता की रक्षा के रूप में देख रहे हैं।
-
विरोधियों का कहना है कि इसे केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति माना जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय रेलवे जैसे सार्वजनिक संस्थानों का उद्देश्य सभी नागरिकों को समान सेवा देना है। ऐसे मंचों का उपयोग किसी राजनीतिक या धार्मिक संगठन को बढ़ावा देने के लिए करना लोकतंत्र और संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ माना जा सकता है।
वंदे भारत जैसे प्रमुख ट्रेन परियोजनाओं का उद्घाटन सार्वजनिक सेवा और तकनीकी उपलब्धियों का प्रतीक होना चाहिए, न कि किसी संगठन का प्रचार।
केरल मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की कड़ी प्रतिक्रिया ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों और संस्थानों को धर्मनिरपेक्ष और सभी समुदायों के लिए सम्मानजनक बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
-
छात्रों द्वारा आरएसएस गान प्रस्तुत करना विवादास्पद कदम साबित हुआ।
-
जनता, राजनीतिक दल और विशेषज्ञ इस मुद्दे पर अलग-अलग दृष्टिकोण रख रहे हैं।
-
भविष्य में ऐसे सार्वजनिक मंचों पर सभी समुदायों और नागरिकों की भावना का सम्मान करना अनिवार्य है।
यह घटना यह भी दर्शाती है कि सांस्कृतिक कार्यक्रम और राजनीतिक संदेश के बीच संतुलन बनाए रखना लोकतंत्र और समाज के लिए कितना महत्वपूर्ण है।








