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महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों सबसे चर्चित मामला बना हुआ है पुणे लैंड डील घोटाला, जिसमें डिप्टी सीएम अजित पवार के बेटे पार्थ पवार का नाम सामने आया है। इस हाईप्रोफाइल केस की जांच अब राज्य सरकार के भरोसेमंद IAS अधिकारी विकास खरगे को सौंपी गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वयं इस जांच की जिम्मेदारी विकास खरगे को देते हुए उन्हें एक महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।
इस घोटाले के खुलासे के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया है। आरोप है कि पार्थ पवार की अगुवाई वाली कंपनी Amadea Enterprises LLP ने पुणे की सरकारी “महार वतन” भूमि को बेहद कम कीमत पर खरीदा। बताया जा रहा है कि इस जमीन की मार्केट वैल्यू करीब 1800 करोड़ रुपये थी, लेकिन डील मात्र 300 करोड़ रुपये में कर ली गई। अब यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी सरकारी जमीन इतनी कम कीमत पर कैसे बेची गई और इसमें किन अधिकारियों की भूमिका रही।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए कहा कि “सच्चाई जो भी होगी, जनता के सामने आएगी।” इसी दिशा में उन्होंने जांच की कमान IAS विकास खरगे को सौंप दी है।
विकास खरगे 1994 बैच के महाराष्ट्र कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं। उन्होंने राज्य प्रशासन में कई अहम पदों पर काम किया है। वे अपनी सख्त कार्यशैली, निष्पक्षता और ईमानदार छवि के लिए जाने जाते हैं। प्रशासनिक हलकों में उन्हें “मिस्टर भरोसेमंद” (Mr. Dependable) के नाम से जाना जाता है।
विकास खरगे फिलहाल मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में एक महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं और कई संवेदनशील जांच समितियों का हिस्सा रह चुके हैं। वे पहले प्रधान सचिव (ग्रामीण विकास) और महाराष्ट्र अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के मामलों में उनकी निष्पक्ष जांच रिपोर्टों की वजह से उन्हें राजनीतिक और ब्यूरोक्रेटिक सर्कल में खास सम्मान प्राप्त है।
अजित पवार के बेटे पार्थ पवार इस समय भारी विवादों में हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी कंपनी Amadea Enterprises LLP के माध्यम से पुणे की सरकारी जमीन को सस्ते दामों में खरीदा। कंपनी में पार्थ की हिस्सेदारी 99 प्रतिशत बताई जा रही है। इस कंपनी पर पहले से ही दो FIR दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें दिग्विजय पाटिल और शीतल तेजवाणी को भी आरोपी बनाया गया है।
हालांकि, अजित पवार ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि “मेरा बेटा पार्थ पवार इस डील के तकनीकी पहलुओं से अनजान था और उसे नहीं पता था कि यह जमीन सरकारी है।” अजित पवार ने दावा किया कि अब यह डील रद्द कर दी गई है, लेकिन इसी बीच रजिस्ट्रार ऑफिस ने कंपनी को 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी और पेनाल्टी चुकाने का नोटिस भेज दिया है, जिससे विवाद और गहरा गया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि “यह मामला सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता का भी सवाल है।” उन्होंने कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और साक्ष्य आधारित होगी, ताकि किसी निर्दोष को नुकसान न हो और दोषियों को सजा मिले। विकास खरगे को इस जांच के लिए 30 दिनों का समय दिया गया है, जिसमें उन्हें लैंड डील की पूरी प्रक्रिया, फाइलों की जांच, स्टांप ड्यूटी दस्तावेज और सरकारी स्वीकृतियों की वैधता की रिपोर्ट तैयार करनी होगी।
इस विवाद पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के सुप्रीमो शरद पवार ने कहा कि “जांच के बाद ही सच सामने आएगा। किसी को भी पहले से दोषी या निर्दोष ठहराना गलत होगा।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि “अगर किसी ने कानून का उल्लंघन किया है, तो कार्रवाई जरूर होनी चाहिए।”
यह मामला अब महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे बड़ा सियासी मुद्दा बन गया है। विपक्ष जहां अजित पवार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहा है, वहीं एनसीपी (अजित गुट) सरकार के भीतर भी असहज स्थिति बनी हुई है। फडणवीस द्वारा जांच की जिम्मेदारी विकास खरगे जैसे सख्त अधिकारी को सौंपना इस बात का संकेत है कि सरकार मामले को दबाने के बजाय साफ-सुथरी जांच करवाने के मूड में है।








