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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के मतदान समाप्त होते ही राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। छपरा से RJD प्रत्याशी और भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे जीवन में कभी चुनाव नहीं लड़ेंगे, यदि चुनाव सिर्फ धर्म के नाम पर लड़ा जाएगा। खेसारी लाल यादव ने कहा कि धर्म महत्वपूर्ण है, लेकिन शिक्षा, अस्पताल और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उतनी ही जरूरी हैं। उनका मानना है कि नेताओं को जनता को रोज़गार और शिक्षा की योजनाओं के बारे में बताना चाहिए, न कि धर्म के नाम पर वोट की अपील करनी चाहिए।
खेसारी लाल यादव ने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए कहा, “मैं अभी जय श्री राम कह रहा हूं और दूसरों से भी यही बोलवा दूंगा, लेकिन धर्म के नाम पर वोट लेने की कोशिश सही नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि उनकी प्राथमिकता हमेशा जनता की बुनियादी जरूरतों और विकास के मुद्दों पर रहेगी।
इस बीच, खेसारी ने जनशक्ति जनता दल प्रमुख तेज प्रताप यादव के बयान पर भी पलटवार किया। तेज प्रताप ने खेसारी के जीतने की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा था कि अगर वह जीत गए तो कौन सी नौकरी देंगे – नाचने वाली? इस पर खेसारी लाल यादव ने कहा, “वो मेरे बड़े भाई हैं, उनके लिए जवाब देना जरूरी नहीं। मैं जनता के मुद्दों पर ध्यान देना चाहता हूं।”
बीजेपी सांसद रवि किशन पर निशाना साधते हुए खेसारी लाल यादव ने कहा कि वे खुद गरीब परिवार से आते हैं और उनके पास शिक्षा के साधन सीमित थे। उन्होंने कहा, “मैं एक गरीब का बेटा हूं। मेरे पास ग्रेजुएशन करने के साधन नहीं थे, लेकिन मैंने मेहनत की। अब मैं जनता के लिए रोजगार और शिक्षा की बात कर रहा हूं, जबकि NDA नेता धर्म के नाम पर वोट लेने की कोशिश कर रहे हैं। मैं कभी धर्म के खिलाफ नहीं रहा।”
खेसारी लाल यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका राजनीतिक दृष्टिकोण विकास-केंद्रित है, न कि धार्मिक मुद्दों पर आधारित। उनका कहना था कि बिहार के नौजवान, महिलाएं और किसान उनकी प्राथमिकता हैं। उनका उद्देश्य है कि चुनाव में लोकतंत्र और विकास के मुद्दे प्रमुख हों, न कि धर्म या व्यक्तिगत कलह।
विशेषज्ञों का मानना है कि खेसारी लाल यादव का यह बयान भाजपा और NDA के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि धर्म के नाम पर वोट बैंक राजनीति उन्हें स्वीकार्य नहीं है। इससे उनकी छवि एक ऐसा नेता बनती है जो जनता के असली मुद्दों पर केंद्रित है, न कि सांप्रदायिक राजनीति में फंसा हुआ।
छपरा और आसपास के क्षेत्रों में खेसारी लाल यादव के समर्थकों ने उनके बयान का स्वागत किया। उनका मानना है कि खेसारी का यह दृष्टिकोण युवाओं, महिलाओं और गरीबों के बीच उनकी लोकप्रियता को और बढ़ाएगा। उनका कहना है कि राजनीति में ईमानदारी और मुद्दों पर केंद्रित रहना ही भविष्य में बिहार के विकास के लिए जरूरी है।
खेसारी लाल यादव ने यह भी कहा कि वे अपने जीवन में चुनाव लड़ने या न लड़ने का निर्णय सिर्फ जनता और विकास के मुद्दों को ध्यान में रखते हुए करेंगे। उनका स्पष्ट संदेश है कि अगर चुनाव में सिर्फ धर्म के नाम पर राजनीति होगी, तो वे चुनाव नहीं लड़ेंगे।
इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि खेसारी लाल यादव की यह स्थिति भविष्य में बिहार की राजनीति को नया आयाम दे सकती है। उनके समर्थक इसे एक सशक्त और विकास-केंद्रित राजनीतिक दृष्टिकोण मान रहे हैं।







