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दिल्ली में स्ट्रीट डॉग्स को लेकर एक बार फिर विवाद और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद नगर निगम (MCD) को शहर की सड़कों से आवारा कुत्तों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर रखने का निर्देश मिला है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि उन्हें रखा कहां जाएगा। द्वारका में बनने वाले एकमात्र डॉग सेंटर का काम महीनों से अटका हुआ है, जिससे निगम अब पशु कल्याण और कोर्ट के आदेश के बीच फंस गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने आदेश में कहा था कि बढ़ती डॉग बाइट की घटनाओं और सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्थानीय निकायों को कुत्तों के पुनर्वास और नियंत्रण की स्पष्ट व्यवस्था करनी होगी। इस आदेश के बाद एमसीडी ने द्वारका में एक डॉग शेल्टर सेंटर बनाने की योजना बनाई थी, जहां पकड़े गए कुत्तों को अस्थायी रूप से रखा जा सके। लेकिन अब तक यह योजना फाइलों में ही अटकी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, पशु विभाग ने करीब एक महीने पहले इंजीनियरिंग विभाग को इस सेंटर के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने का पत्र भेजा था। लेकिन अब तक विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस देरी के कारण, जिन इलाकों से डॉग्स को हटाने की योजना थी, वहां स्थिति जस की तस बनी हुई है।
MCD के एक अधिकारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश स्पष्ट है—भीड़भाड़ वाली जगहों, स्कूलों, पार्कों और धार्मिक स्थलों के आसपास स्ट्रीट डॉग्स को नियंत्रित किया जाए। लेकिन जब तक डॉग सेंटर तैयार नहीं होता, तब तक उन्हें अस्थायी रूप से भी रखने की कोई जगह नहीं है। अधिकारी ने यह भी कहा कि निगम के पास सीमित संसाधन और जगह की भारी कमी है, जिसके चलते यह समस्या और गंभीर हो रही है।
द्वारका में प्रस्तावित डॉग सेंटर के लिए जमीन की पहचान तो पहले ही की जा चुकी है, लेकिन फंडिंग और निर्माण कार्य शुरू न होने की वजह से परियोजना ठप पड़ी है। एमसीडी के पशु कल्याण विभाग का कहना है कि उन्होंने अपनी ओर से सभी जरूरी दस्तावेज भेज दिए हैं, अब बॉल इंजीनियरिंग विभाग के पाले में है।
दिल्ली में फिलहाल हजारों की संख्या में स्ट्रीट डॉग्स हैं। कई इलाकों में लोगों ने शिकायत की है कि झुंड बनाकर घूमने वाले ये कुत्ते न सिर्फ डर पैदा कर रहे हैं, बल्कि छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। दिल्ली के द्वारका, रोहिणी, शाहदरा और साउथ एक्सटेंशन जैसे इलाकों से डॉग बाइट के दर्जनों मामले सामने आए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लोगों को उम्मीद थी कि MCD अब ठोस कदम उठाएगी, लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि बिना ठिकाने के इन कुत्तों को आखिर कहां रखा जाएगा।
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का एक वर्ग इस स्थिति को लेकर चिंतित है। उनका कहना है कि बिना पर्याप्त शेल्टर या सुविधाओं के अगर कुत्तों को पकड़कर रखा गया, तो यह उनके अधिकारों का उल्लंघन होगा। वहीं आम नागरिकों का कहना है कि हर दिन बढ़ती घटनाएं लोगों के लिए खतरा बन रही हैं, और अब प्रशासन को तेजी से कदम उठाने चाहिए।
सामाजिक कार्यकर्ता रीना कपूर का कहना है, “एमसीडी को सिर्फ पकड़ने पर नहीं, बल्कि प्रबंधन और पुनर्वास पर ध्यान देना चाहिए। दिल्ली में पहले से ही तीनों निगमों के पास पर्याप्त शेल्टर नहीं हैं। अगर द्वारका सेंटर भी नहीं बनता, तो कोर्ट का आदेश सिर्फ कागजों में ही रह जाएगा।”
वहीं दूसरी ओर, एमसीडी अधिकारियों का कहना है कि प्रशासनिक अड़चनों और बजट की कमी के कारण काम में देरी हो रही है। लेकिन उनका दावा है कि अगले कुछ महीनों में काम शुरू कर दिया जाएगा। फिलहाल अस्थायी तौर पर कुछ डॉग्स को मौजूदा एनिमल शेल्टर में शिफ्ट किया जा सकता है।
इस पूरे मसले ने दिल्ली में एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट का आदेश सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता देता है, वहीं दूसरी ओर पशु अधिकार और मानवीय दृष्टिकोण की जिम्मेदारी भी एमसीडी पर आ गई है।
अब देखना यह है कि क्या दिल्ली नगर निगम इस जटिल समस्या का संतुलित समाधान ढूंढ पाता है या फिर यह योजना भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगी। फिलहाल इतना तय है कि जब तक द्वारका डॉग सेंटर तैयार नहीं होता, तब तक दिल्ली में स्ट्रीट डॉग्स का संकट जस का तस बना रहेगा।








