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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और देश के पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को उनके जन्मदिन के अवसर पर हार्दिक बधाई दी। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए उन्हें महान दृष्टिकोण वाला राजनेता बताया, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन भारत की प्रगति, लोकतंत्र की मजबूती और सांस्कृतिक गौरव के उत्थान के लिए समर्पित किया है।
पीएम मोदी ने अपने संदेश में लिखा, “लालकृष्ण आडवाणी जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। एक दूरदर्शी और महान बुद्धिमत्ता से संपन्न राजनेता के रूप में उन्होंने भारत की प्रगति को सशक्त करने के लिए अपना जीवन समर्पित किया है। वे निस्वार्थ सेवा और अटूट सिद्धांतों की भावना के प्रतीक हैं। उनके योगदानों ने भारत के लोकतांत्रिक और सांस्कृतिक परिदृश्य पर अमिट छाप छोड़ी है। भगवान उन्हें अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु का आशीर्वाद दें।”
प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश न केवल एक शुभकामना है, बल्कि यह उस गहरी श्रद्धा का प्रतीक भी है जो वे अपने राजनीतिक गुरु और मार्गदर्शक आडवाणी के प्रति रखते हैं। भारतीय राजनीति में लालकृष्ण आडवाणी का नाम उन नेताओं में शुमार है जिन्होंने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को नई दिशा दी और भारतीय जनता पार्टी को जन-जन की पार्टी बनाने में अहम भूमिका निभाई।
लालकृष्ण आडवाणी भारतीय राजनीति के उन चंद नेताओं में से हैं जिन्होंने अपने विचारों और आचरण से राष्ट्रवाद की नई परिभाषा गढ़ी। 8 नवंबर 1927 को कराची (अब पाकिस्तान) में जन्मे आडवाणी ने भारत विभाजन के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़कर राजनीति की राह पकड़ी। जनसंघ के दौर से लेकर भारतीय जनता पार्टी की स्थापना तक, उन्होंने संगठन निर्माण, वैचारिक दृढ़ता और जनसंपर्क के जरिए पार्टी को निरंतर मजबूती प्रदान की।
आडवाणी ने अपने राजनीतिक जीवन में कई ऐतिहासिक निर्णय लिए जिन्होंने देश की राजनीति की दिशा ही बदल दी। 1990 में निकाली गई उनकी ‘राम रथ यात्रा’ भारतीय राजनीति के इतिहास में मील का पत्थर मानी जाती है। इस यात्रा ने न केवल भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती दी, बल्कि भारतीय जनमानस में सांस्कृतिक चेतना की नई लहर भी जगाई।
प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि वे आडवाणी जी से राजनीतिक और नैतिक प्रेरणा लेते रहे हैं। मोदी ने उनके नेतृत्व, अनुशासन और समर्पण भावना को भारतीय राजनीति का आदर्श बताया है। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने अनेक मौकों पर आडवाणी जी के प्रति सम्मान प्रकट किया, चाहे वह व्यक्तिगत मुलाकात हो या राष्ट्रीय पर्वों पर सार्वजनिक श्रद्धांजलि।
आडवाणी का योगदान सिर्फ भाजपा तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने भारत की संसदीय व्यवस्था में मर्यादा, संवाद और संतुलन को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1977 की जनता पार्टी सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में उन्होंने मीडिया को अधिक स्वतंत्र और सशक्त बनाने के कदम उठाए। वहीं, 1999 से 2004 तक अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री रहते हुए उन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में अहम योगदान दिया।
लालकृष्ण आडवाणी न केवल एक सशक्त राजनेता रहे हैं, बल्कि वे एक प्रखर विचारक और लेखक भी हैं। उनकी आत्मकथा “My Country My Life” भारत की राजनीतिक यात्रा का एक जीवंत दस्तावेज मानी जाती है। आडवाणी हमेशा राजनीति में सिद्धांत और मूल्यों के प्रतीक रहे हैं। उनकी ईमानदारी, सरलता और निष्ठा ने उन्हें देश के हर राजनीतिक वर्ग में सम्मान दिलाया है।
आज उनके जन्मदिन के अवसर पर न केवल प्रधानमंत्री मोदी, बल्कि देशभर के राजनीतिक नेता, कार्यकर्ता और आम नागरिक भी उन्हें शुभकामनाएं दे रहे हैं। भाजपा कार्यालयों में कार्यकर्ताओं ने आडवाणी जी के दीर्घायु और स्वस्थ जीवन के लिए प्रार्थना की। सोशल मीडिया पर “#HappyBirthdayLKAdvani” ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग उनकी दीर्घ राजनीतिक यात्रा और राष्ट्र के प्रति समर्पण को याद कर रहे हैं।
लालकृष्ण आडवाणी का जीवन भारतीय राजनीति के उस अध्याय का प्रतीक है जहां राष्ट्रहित सर्वोपरि था। उन्होंने अपने कर्मों और विचारों से यह साबित किया कि सच्ची राजनीति वही है जो जनसेवा और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों पर आधारित हो। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दी गई शुभकामनाएं इस तथ्य को और मजबूत करती हैं कि आडवाणी जी आज भी भारत की राजनीतिक और वैचारिक चेतना में एक जीवंत प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं।








