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  • बीजेपी का कांग्रेस पर वार: ‘इंदिरा नाजी कांग्रेस’ क्यों कहा गया, शशि थरूर ने आडवाणी की तारीफ करके मचाई हलचल

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    कांग्रेस सांसद शशि थरूर द्वारा बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी की तारीफ करने के बाद राजनीतिक गलियारे में हलचल मच गई। थरूर ने आडवाणी को उनके योगदान और वर्षों की सेवा के लिए जन्मदिन पर शुभकामनाएं दी, लेकिन इस पर कांग्रेस पार्टी ने खुद दूरी बनाई और कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत राय है।

    इस बयान के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पार्टी को अपना नाम ‘इंदिरा नाजी कांग्रेस’ रख लेना चाहिए। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोमवार को कहा, “यह वही इमरजेंसी वाला नाजी माइंडसेट है जो इंदिरा गांधी के समय देखा गया था।” पूनावाला के अनुसार, कांग्रेस में किसी राजनीतिक शिष्टाचार की कोई जगह नहीं है और विपक्षी नेताओं के प्रति पार्टी की असहिष्णुता स्पष्ट है।

    कांग्रेस ने कहा कि थरूर ने अपनी व्यक्तिगत हैसियत से आडवाणी की तारीफ की। पार्टी प्रचार विभाग प्रमुख पवन खेड़ा ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “थरूर का कांग्रेस सांसद और केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य होते हुए स्वतंत्र रूप से विचार रखना, पार्टी की लोकतांत्रिक और उदार भावना को दर्शाता है।” कांग्रेस ने इस विवाद को अपने अंदरूनी मामले के रूप में प्रस्तुत किया और कहा कि थरूर का बयान पार्टी की नीति का प्रतिनिधित्व नहीं करता।

    बीजेपी प्रवक्ता पूनावाला ने कांग्रेस की इस प्रतिक्रिया को असहिष्णुता बताया। उन्होंने कहा, “सिर्फ आडवाणी जैसे भारत रत्न और वरिष्ठ नेता को शुभकामनाएं देने पर कांग्रेस ने उनके खिलाफ फतवा जारी कर दिया। यह दर्शाता है कि कांग्रेस में हर विरोधी को दुश्मन माना जाता है।” इस बयान से स्पष्ट है कि बीजेपी ने कांग्रेस को आडवाणी की तारीफ को लेकर आक्रामक रूप से घेरा।

    शशि थरूर पहले भी कई मौकों पर पार्टी से असहज संबंधों के कारण चर्चा में रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार की तारीफ की थी, और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान राहुल गांधी के कथनों का विरोध करते हुए स्पष्ट किया था कि अमेरिका की भूमिका नहीं थी। ऐसे मामलों ने थरूर को पार्टी के भीतर और बाहर आलोचना का विषय बनाया।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि थरूर की व्यक्तिगत राय और उनकी स्वतंत्र टिप्पणी बीजेपी के लिए कांग्रेस पर निशाना साधने का अवसर बन गई। बीजेपी ने इसे कांग्रेस की आंतरिक असहमति और विरोधियों के प्रति असहिष्णु रवैये के रूप में पेश किया।

    राजनीतिक जानकारों के अनुसार, थरूर का आडवाणी की तारीफ करना केवल व्यक्तिगत सम्मान का मामला था, लेकिन बीजेपी ने इसे राजनीतिक बहस और प्रचार का हिस्सा बना दिया। इस प्रकार का विवाद भारतीय राजनीति में अक्सर देखा जाता है, जहां किसी सांसद का व्यक्तिगत बयान विपक्षी दलों के लिए मुद्दा बन जाता है।

    बीजेपी का यह बयान कांग्रेस के इमरजेंसी काल के रवैये और केंद्रीय नेतृत्व की आलोचना के रूप में भी देखा जा रहा है। यह विवाद दोनों दलों के बीच बयानबाजी को और तेज कर सकता है, खासकर चुनावी और सामाजिक मंचों पर।

    शशि थरूर द्वारा आडवाणी की तारीफ और इसके बाद कांग्रेस की सफाई ने एक बार फिर साबित किया कि राजनीति में व्यक्तिगत राय और दलगत नीति के बीच संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण होता है। वहीं, बीजेपी ने इस मामले को पार्टी के खिलाफ निशाना साधने और राजनीतिक लाभ लेने के अवसर के रूप में इस्तेमाल किया।

    इस विवाद ने यह भी दर्शाया कि भारतीय राजनीति में एक बयान कितने बड़े राजनीतिक और सोशल मीडिया प्रभाव का कारण बन सकता है। थरूर का व्यक्तिगत सम्मान और पार्टी का उदार रवैया, दोनों ही बीजेपी के लिए आलोचना का मौका बन गए, जिससे राजनीतिक बहस और तीव्र हुई है।

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