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राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के खिलाफ भारत गेट पर आयोजित शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान कई प्रदर्शनकारियों की अल्पकालिक गिरफ्तारी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र और दिल्ली सरकार पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने कहा कि जब सरकार अपने कर्तव्यों में विफल हो रही है, तो नागरिकों को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों का पालन करना पड़ता है।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि स्वच्छ हवा की मांग करना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “अब समय है कि प्रदूषण को रोकने के लिए निर्णायक कार्रवाई की जाए, बजाय इसके कि नागरिकों पर हमला किया जाए जो स्वच्छ हवा की मांग कर रहे हैं।”
भारत गेट पर आयोजित इस प्रदर्शन में नागरिकों ने मास्क पहनकर, बैनर और पोस्टर के माध्यम से सरकार से स्वच्छ हवा और प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण था, लेकिन पुलिस ने कुछ लोगों को संक्षिप्त रूप से हिरासत में लिया।
इस दौरान नागरिकों ने सरकार से अनुरोध किया कि वह प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को तेज़ करे और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि राजधानी में वायु गुणवत्ता लगातार गिर रही है, जिससे हर उम्र के लोग प्रभावित हो रहे हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार प्रदूषण और पर्यावरण संरक्षण को गंभीरता से नहीं ले रही हैं। उनका कहना है कि नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार को किसी भी परिस्थिति में राजनीतिक लड़ाई का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।
कांग्रेस की ओर से जारी बयान में कहा गया:
“जब सरकार अपने कर्तव्यों में विफल है, तो नागरिकों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों का पालन करना पड़ता है। यह प्रदर्शन स्वच्छ हवा की मांग के लिए किया गया था और इसे दबाने का कोई औचित्य नहीं है।”
कांग्रेस ने केंद्र सरकार से तुरंत कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि हिरासत में लिए गए नागरिकों को तुरंत रिहा किया जाए और भविष्य में ऐसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन को दबाने का प्रयास न किया जाए।
प्रदर्शन और हिरासत के बाद कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरण संगठनों ने भी अपनी नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना है कि हवा की गुणवत्ता में सुधार और प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार को जनता के साथ मिलकर काम करना चाहिए।
एनजीओ “ग्रीन दिल्ली” के प्रतिनिधि ने कहा, “स्वच्छ हवा हर नागरिक का मूल अधिकार है। यह आंदोलन इस अधिकार की रक्षा के लिए किया गया था। हिरासत में लिए गए लोगों को तत्काल रिहा करना चाहिए और सरकार को प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस नीति बनानी चाहिए।”
दिल्ली पुलिस ने कहा कि हिरासत में लेने की कार्रवाई सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई थी। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन स्थल पर कुछ लोग शांति भंग करने की कोशिश कर रहे थे, इसलिए पुलिस ने यह कदम उठाया।
सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया:
“हम प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण अधिकार का सम्मान करते हैं, लेकिन सार्वजनिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है।”
विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना भारत में नागरिक अधिकार, लोकतंत्र और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को उजागर करती है। प्रदूषण विरोधी आंदोलन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनता अब अपनी मांगों के प्रति अधिक सजग और सक्रिय है।
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अमित कुमार ने कहा:
“स्वच्छ हवा और प्रदूषण नियंत्रण के मुद्दे पर जनता का आंदोलन बढ़ता ही रहेगा। यदि सरकार अपनी नीतियों में सुधार नहीं करती है और लोगों की मांगों को नजरअंदाज करती है, तो इससे भविष्य में और बड़े आंदोलन देखने को मिल सकते हैं।”
कांग्रेस का यह आरोप और भारत गेट पर हुए प्रदूषण विरोधी प्रदर्शन ने देश में नागरिक अधिकार, लोकतंत्र और पर्यावरण संरक्षण पर बहस को फिर से ताजा किया है। राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार हर किसी को सुरक्षित और संरक्षित मिले।








