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  • जम्मू-कश्मीर में ऑनलाइन टेरर नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई: CIK ने 9 लोगों को हिरासत में लिया, कई जगहों पर छापेमारी

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    जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बार फिर ऑनलाइन आतंकी नेटवर्क के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन कश्मीर (CIK) ने घाटी के कई इलाकों में एक साथ छापेमारी करते हुए एक महिला समेत नौ लोगों को हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय की गई है जब सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए चल रहे आतंकी प्रचार और भर्ती नेटवर्क पर नजर बनाए हुए थीं।

    सूत्रों के अनुसार, सीआईके की टीमें श्रीनगर, बारामूला, पुलवामा, अनंतनाग और बडगाम जिलों में एक साथ तड़के छापेमारी के लिए पहुंचीं। यह छापे उन स्थानों पर मारे गए, जहां से सोशल मीडिया और इंटरनेट प्लेटफॉर्म के माध्यम से आतंकवादी संगठनों के लिए सामग्री तैयार की जा रही थी और युवाओं को भड़काने का प्रयास हो रहा था।

    जांच एजेंसी ने जिन नौ लोगों को हिरासत में लिया है, उनमें एक महिला भी शामिल है, जो कथित तौर पर सोशल मीडिया पर ‘टेरर नैरेटिव’ फैलाने में सक्रिय थी। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि यह नेटवर्क पाकिस्तान से संचालित कई ऑनलाइन हैंडल्स से जुड़ा हुआ था, जो जम्मू-कश्मीर में युवाओं को उकसाने और आतंकी गतिविधियों के लिए प्रेरित करने का काम कर रहे थे।

    सीआईके अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान ऑनलाइन टेरर फंडिंग और डिजिटल प्रचार तंत्र दोनों पर केंद्रित है। एजेंसी ने कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, सिम कार्ड और डिजिटल स्टोरेज डिवाइस जब्त किए हैं। इन सभी की फॉरेंसिक जांच के लिए उन्हें भेजा गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन उपकरणों के माध्यम से किन प्लेटफॉर्म्स पर आतंकी संगठनों की सामग्री साझा की जा रही थी।

    गौरतलब है कि बीते कुछ महीनों में जम्मू-कश्मीर में “ऑनलाइन जिहाद” के रूप में सक्रिय कई नेटवर्क्स को सुरक्षा एजेंसियों ने ध्वस्त किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर आतंकी संगठनों से जुड़े कई अकाउंट्स की पहचान की गई थी, जिनका इस्तेमाल युवाओं को गुमराह करने के लिए किया जा रहा था।

    इसके अलावा, CIK ने सिम कार्ड बेचने वाले दुकानदारों पर भी सख्त निगरानी शुरू की है। कई जगहों पर यह पाया गया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए मोबाइल कनेक्शन जारी किए जा रहे थे, जिन्हें बाद में आतंकी संगठनों के सदस्य या उनके सहयोगी इस्तेमाल करते थे। इसी संदर्भ में पिछले सप्ताह श्रीनगर और बडगाम में करीब दो दर्जन दुकानों पर छापे मारे गए थे।

    सीआईके की इस कार्रवाई को जम्मू-कश्मीर पुलिस की साइबर शाखा और खुफिया एजेंसियों का भी समर्थन प्राप्त है। सभी एजेंसियां मिलकर यह सुनिश्चित करने में जुटी हैं कि घाटी में किसी भी प्रकार का डिजिटल आतंकवाद या प्रचार अभियान पनप न सके। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल शुरुआत है, आने वाले दिनों में इस नेटवर्क के और कई चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।

    राज्य सरकार ने इस पूरी कार्रवाई की सराहना की है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार की प्राथमिकता है कि जम्मू-कश्मीर के युवाओं को आतंक और कट्टरता के चंगुल से दूर रखा जाए। इसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की नियमित निगरानी की जा रही है और संदिग्ध खातों पर तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया गया है।

    जम्मू-कश्मीर में यह पहली बार नहीं है जब ऑनलाइन टेरर नेटवर्क के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई हुई हो। लेकिन इस बार का अभियान पहले से अधिक व्यापक और समन्वित माना जा रहा है। यह कदम उस नई रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत सुरक्षा एजेंसियां जमीन पर आतंक के साथ-साथ डिजिटल माध्यमों से चल रहे आतंक के खिलाफ भी निर्णायक लड़ाई लड़ रही हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक के इस दौर में आतंकवाद का चेहरा भी डिजिटल हो गया है। ऐसे में, जम्मू-कश्मीर में चल रही इस कार्रवाई का उद्देश्य न केवल आतंक की जड़ों को खत्म करना है बल्कि उन साइबर नेटवर्क्स को भी तोड़ना है जो युवाओं के विचारों को प्रभावित करने का काम कर रहे हैं।

    फिलहाल, सीआईके की जांच जारी है और गिरफ्तार किए गए सभी संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क के और भी कई लिंक सामने आएंगे। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों की यह सख्त कार्रवाई इस बात का संकेत है कि अब आतंकी गतिविधियां चाहे मैदान में हों या ऑनलाइन — दोनों पर नकेल कसने का वक्त आ चुका है।

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