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उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में उस समय हड़कंप मच गया जब मानिकपुर इलाके के मुंदीपुर गांव में एक घर से करोड़ों रुपये की नकदी बरामद हुई। यह घर जिले के कुख्यात मादक पदार्थ तस्कर राजेश मिश्रा का बताया जा रहा है। शुक्रवार रात हुई छापेमारी में पुलिस ने जब घर की तलाशी शुरू की तो वहां का नजारा देखकर सभी दंग रह गए। घर के हर कमरे में बिस्तरों, अलमारियों और ट्रंकों में रुपये के बंडल भरे पड़े थे। पुलिसकर्मी पूरी रात और अगली सुबह तक नोट गिनते रहे।
गिनती के दौरान सबसे ज्यादा छोटे मूल्यवर्ग के नोट मिले जिनमें 10, 20, 50 और 100 रुपये के नोट शामिल थे। नकदी इतनी अधिक थी कि चार गिनती मशीनें मंगानी पड़ीं। गिनती का काम करीब 20 घंटे तक चला और इस दौरान पुलिसकर्मी और महिला अधिकारी लगातार पसीना पोंछते नजर आए। शुरुआती अनुमान के मुताबिक दो करोड़ रुपये से अधिक की नकदी बरामद की गई है। इसके अलावा पुलिस को करीब एक करोड़ रुपये के मादक पदार्थ भी घर से मिले हैं।
पुलिस की जांच में सामने आया कि राजेश मिश्रा का यह काला कारोबार पिछले तीन पीढ़ियों से चल रहा था। उसके पिता ने मादक पदार्थों की तस्करी की शुरुआत की थी, जिसे राजेश ने और आगे बढ़ाया। धीरे-धीरे उसने अपना नेटवर्क रायबरेली, अमेठी और कौशांबी जैसे पड़ोसी जिलों तक फैला लिया। राजेश का नेटवर्क इतना मजबूत था कि क्षेत्र के कई छोटे तस्कर उसके लिए काम करते थे और वह स्थानीय स्तर पर नशे की आपूर्ति करता था।
सोशल मीडिया पर इस मामले का वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें पुलिस अधिकारी नोटों की गिनती करते दिख रहे हैं। वीडियो में बिस्तर पर रुपये के ढेर दिखाई दे रहे हैं और चारों ओर पुलिसकर्मी खड़े हैं। इस वीडियो ने पूरे उत्तर प्रदेश में हलचल मचा दी है। लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी रकम घर में कैसे रखी गई और प्रशासन को इतने वर्षों तक इसकी भनक क्यों नहीं लगी।
मुख्य आरोपी राजेश मिश्रा फिलहाल फरार बताया जा रहा है, जबकि पुलिस ने उसकी पत्नी रीना देवी, बेटा विनायक, बेटी कोमल और रिश्तेदार यश कुमार को हिरासत में लिया है। पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। परिवार के सदस्यों ने माना कि राजेश लंबे समय से इस अवैध कारोबार में लिप्त था और नकदी का बड़ा हिस्सा मादक पदार्थों की बिक्री से जुड़ा हुआ है।
प्रतापगढ़ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही निगरानी और गुप्त सूचना के बाद की गई। पुलिस अब राजेश मिश्रा की संपत्तियों की जांच कर रही है, जिनमें कई प्लॉट, वाहन और बैंकों में जमा रकम शामिल है। जांच एजेंसियां आयकर विभाग और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को भी मामले में शामिल कर रही हैं ताकि सम्पूर्ण नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, राजेश मिश्रा का परिवार इलाके में काफी प्रभावशाली माना जाता था। उसके घर से अक्सर बाहरी लोगों का आना-जाना लगा रहता था। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह घर करोड़ों रुपये की अवैध नकदी और नशे के कारोबार का अड्डा बन चुका है।
पुलिस अब इस काले साम्राज्य की जड़ें उखाड़ने में जुटी है। प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि राजेश मिश्रा और उसके परिवार की अवैध संपत्तियों को जब्त किया जाएगा। इस बड़ी कार्रवाई ने प्रतापगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है, और अब देखना यह है कि पुलिस इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक कब तक पहुंच पाती है।








