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  • नाशिक की दो शिक्षिकाओं ने अपनाई 140 बेटियां, 2021 से संभाल रही हैं उनकी शिक्षा की ज़िम्मेदारी

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    नाशिक शहर की दो महिला शिक्षिकाओं ने समाज के सामने इंसानियत और सेवा की एक अद्भुत मिसाल पेश की है। नगर निगम (NMC) संचालित स्कूल की इन दो शिक्षिकाओं ने 2021 से अब तक 140 गरीब और वंचित परिवारों की बालिकाओं की शिक्षा का जिम्मा उठाया है। उन्होंने न केवल इन बच्चियों की पढ़ाई में मदद की, बल्कि स्कूल यूनिफॉर्म, किताबें, जूते, स्टेशनरी और कभी-कभी भोजन तक की व्यवस्था की।

    इन दोनों शिक्षिकाओं का मानना है कि शिक्षा ही एक ऐसा हथियार है जो किसी बच्चे का जीवन बदल सकता है। इस विश्वास के साथ उन्होंने यह मुहिम शुरू की, ताकि कोई भी बालिका सिर्फ आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई से वंचित न रह जाए।

    शिक्षिकाओं ने बताया कि 2021 में कोरोना महामारी के बाद जब स्कूलों में पढ़ाई फिर शुरू हुई, तो कई छात्राएं आर्थिक कारणों से स्कूल नहीं लौट सकीं। तब उन्होंने कुछ बच्चियों की मदद का बीड़ा उठाया। शुरुआत में यह संख्या 10 से 15 थी, लेकिन धीरे-धीरे लोगों की मदद और उनके प्रयासों से यह बढ़कर 140 तक पहुंच गई।

    दोनों शिक्षिकाएं अपने वेतन का एक हिस्सा हर महीने इन बच्चियों की पढ़ाई पर खर्च करती हैं। वे न केवल उनकी फीस भरती हैं बल्कि समय-समय पर उन्हें मानसिक रूप से प्रेरित भी करती हैं ताकि बच्चियां पढ़ाई जारी रखें। कई छात्राओं के माता-पिता मजदूर या सफाई कर्मचारी हैं, जिनकी आय इतनी नहीं कि वे नियमित रूप से बच्चों की शिक्षा का खर्च उठा सकें।

    इन शिक्षिकाओं की इस पहल से अब कई बच्चियों ने बेहतर अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा साबित की है। कुछ छात्राओं ने राज्य स्तर की परीक्षाओं में स्थान भी प्राप्त किया है। शिक्षिकाओं का कहना है कि उन्हें इन बच्चियों को आगे बढ़ते देख गर्व महसूस होता है और यही उनकी असली कमाई है।

    स्थानीय लोगों और स्कूल प्रशासन ने भी उनके इस कार्य की सराहना की है। नगर निगम के शिक्षा विभाग ने इन्हें ‘सामाजिक प्रेरणा पुरस्कार’ देने का निर्णय लिया है, ताकि ऐसे उदाहरण समाज में और भी बढ़ें।

    इन शिक्षिकाओं ने बताया कि वे आने वाले वर्षों में इस अभियान को और आगे ले जाने की योजना बना रही हैं। उनका लक्ष्य है कि हर वर्ष कम से कम 50 नई बालिकाओं को शिक्षा के इस अभियान से जोड़ा जाए।

    नाशिक जैसे शहर में जहां सामाजिक असमानताएं अब भी देखने को मिलती हैं, वहां इन शिक्षिकाओं की यह पहल न केवल बालिकाओं को सशक्त बना रही है बल्कि शिक्षा के महत्व को भी मजबूत संदेश दे रही है। उनकी यह कोशिश ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान को वास्तविक रूप से धरातल पर उतार रही है।

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