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हनुमानगढ़। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर हनुमानगढ़ जिले में सोमवार को जिला स्तरीय भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम “वंदे मातरम् 150” शीर्षक से आयोजित हुआ, जिसमें जिलेभर से आए जनप्रतिनिधि, अधिकारी, विद्यार्थी और नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर राजस्थान सरकार के मंत्री सुमित गोदारा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन से किया।
कार्यक्रम का आरंभ “सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्, शस्यशामलाम् मातरम्…” की पंक्तियों से हुआ, जिससे पूरा सभागार देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत हो उठा। उपस्थित जनों ने खड़े होकर राष्ट्रगीत गाया और भारत माता के जयघोष के साथ वातावरण को गूंजायमान कर दिया।
मंत्री सुमित गोदारा ने इस अवसर पर कहा कि “वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि यह भारत की आत्मा की आवाज़ है। यह गीत हर भारतीय के भीतर मातृभूमि के प्रति समर्पण, कर्तव्यबोध और साहस की भावना जगाता है। 150 वर्षों का यह सफर हमारे इतिहास, संस्कृति और एकता का प्रतीक है।” उन्होंने आगे कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और देश के प्रति निष्ठा को मजबूत करते हैं।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक श्री धर्मेंद्र मोची, भाजपा जिला अध्यक्ष श्री प्रमोद डेलू, जनप्रतिनिधि श्री अमित चौधरी, एससी मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष श्री कैलाश मेघवाल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने मंच से एक स्वर में कहा कि राष्ट्रगीत के इस 150वें वर्ष को सिर्फ उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के पुनः जागरण के रूप में मनाना चाहिए।
इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा वंदे मातरम् पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं, जिनमें भारत की विविधता में एकता की झलक साफ दिखाई दी। नृत्य, संगीत और कविता पाठ के माध्यम से देशभक्ति का संदेश पूरे सभागार में गूंज उठा। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं और हर किसी के दिल में गर्व और देशप्रेम की भावना भर दी।
मंत्री सुमित गोदारा ने कार्यक्रम के अंत में युवाओं से अपील की कि वे “वंदे मातरम्” के आदर्शों को अपने जीवन में उतारें। उन्होंने कहा, “यह गीत हमें केवल गर्व नहीं कराता, बल्कि यह याद दिलाता है कि हमारी मातृभूमि के लिए हर नागरिक का योगदान कितना आवश्यक है। जब तक हम देश की एकता और अखंडता को सर्वोपरि नहीं मानेंगे, तब तक ‘वंदे मातरम्’ का सही अर्थ अधूरा रहेगा।”
कार्यक्रम के दौरान जिले के शिक्षकों और छात्रों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने राष्ट्रगीत के संरक्षण और प्रचार में विशेष योगदान दिया। जिला प्रशासन ने बताया कि “वंदे मातरम् 150” के अंतर्गत आने वाले एक महीने तक विद्यालयों और महाविद्यालयों में देशभक्ति आधारित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें क्विज प्रतियोगिता, निबंध लेखन, चित्रकला और देशभक्ति गीतों के कार्यक्रम शामिल रहेंगे।
कार्यक्रम के समापन पर सामूहिक रूप से उपस्थित सभी लोगों ने खड़े होकर पुनः ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया। पूरा माहौल देशप्रेम की भावना से सराबोर हो गया। हवा में “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारे गूंज उठे।
यह आयोजन न केवल एक गीत की वर्षगांठ का प्रतीक था, बल्कि इसने यह भी सिद्ध किया कि आज भी भारत की आत्मा “वंदे मातरम्” के स्वर में बसती है। इस गीत ने स्वतंत्रता संग्राम में जिस तरह प्रेरणा दी थी, वही ऊर्जा आज भी हर भारतीय को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक करती है।












