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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण की वोटिंग के बीच गया जिले की इमामगंज सीट (SC आरक्षित) पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। यह सीट पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के परिवार के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुकी है। इस चुनाव में एनडीए के घटक हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) ने मांझी की बहू दीपा कुमारी को उम्मीदवार बनाया है। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं और माहौल पूरी तरह लोकतांत्रिक उत्साह में डूबा हुआ है।
इमामगंज सीट पर इस बार मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा है। एक ओर एनडीए से दीपा कुमारी मैदान में हैं, वहीं दूसरी ओर महागठबंधन ने राजद के उम्मीदवार को उतारा है। तीसरी तरफ कुछ निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने की कोशिश में हैं। हालांकि, इस सीट को मांझी परिवार का गढ़ माना जाता है, जहां पिछले कई चुनावों से उनका दबदबा कायम है।
मांझी परिवार की प्रतिष्ठा पर सबकी नजर
पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने 2020 के विधानसभा चुनाव में इसी सीट से जीत दर्ज की थी। लेकिन 2024 में उन्होंने गया संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उनके सांसद बनने के बाद इमामगंज विधानसभा सीट खाली हो गई थी, जिसके चलते अब उपचुनाव में उनकी बहू दीपा कुमारी को उम्मीदवार बनाया गया। अब यह चुनाव न केवल एक सीट की जंग है, बल्कि मांझी परिवार की राजनीतिक पकड़ और जनता में उनके प्रभाव की परीक्षा भी बन गया है।
दीपा कुमारी के लिए यह चुनाव राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी परीक्षा मानी जा रही है। वह अपने ससुर जीतन राम मांझी की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए जनता के बीच लगातार प्रचार करती रहीं। उन्होंने अपने भाषणों में कहा कि “मांझी परिवार हमेशा जनता की सेवा में रहा है और इमामगंज की जनता ने हमें बार-बार आशीर्वाद दिया है।”
गया जिले में मतदान का उत्साह
गया जिले में सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की भीड़ देखने को मिल रही है। चुनाव आयोग ने सभी बूथों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। मतदान कर्मियों ने बताया कि महिला मतदाताओं में भी खासा उत्साह देखने को मिला है। पहले कुछ घंटों में ही मतदान प्रतिशत में तेजी दर्ज की गई है।
इमामगंज सीट पर लगभग 2.6 लाख मतदाता हैं, जिनमें बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति के वोटर शामिल हैं। इस इलाके में मांझी परिवार का प्रभाव हमेशा से मजबूत रहा है। लोकसभा चुनाव में भी इस क्षेत्र से बड़ी बढ़त हासिल करने वाले मांझी अब विधानसभा सीट पर दोबारा अपनी पकड़ कायम रखने की कोशिश में हैं।
राजनीतिक विश्लेषण और मुकाबले की स्थिति
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इमामगंज सीट पर मुख्य मुकाबला एनडीए की हम पार्टी और महागठबंधन के राजद उम्मीदवार के बीच है। एनडीए की ओर से मांझी का चेहरा सबसे बड़ा राजनीतिक आधार है, जबकि राजद सामाजिक समीकरणों के दम पर मुकाबले को बराबरी पर लाने की कोशिश कर रहा है।
स्थानीय राजनीति जानने वाले कहते हैं कि मांझी परिवार ने विकास और सामाजिक न्याय दोनों को अपना राजनीतिक हथियार बनाया है। जीतन राम मांझी ने अपने कार्यकाल में इस क्षेत्र में सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी कई योजनाओं की शुरुआत की थी, जिनका लाभ आज भी जनता को मिल रहा है। यही कारण है कि जनता का झुकाव अब भी परिवार के प्रति सकारात्मक माना जा रहा है।
वोटिंग के दौरान सुरक्षा और निगरानी
चुनाव आयोग की ओर से पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए 24×7 निगरानी की जा रही है। कई बूथों पर वेबकास्टिंग के जरिए रीयल-टाइम निगरानी की जा रही है। जिला प्रशासन ने मतदाताओं से शांतिपूर्ण तरीके से मतदान करने की अपील की है।
नतीजों पर टिकी निगाहें
इमामगंज सीट के नतीजे यह तय करेंगे कि मांझी परिवार की राजनीतिक पकड़ पहले जैसी बरकरार है या नहीं। यदि दीपा कुमारी यह सीट जीत लेती हैं, तो यह मांझी परिवार के लिए एक और बड़ी राजनीतिक सफलता होगी, जबकि हार की स्थिति में विपक्ष इसे उनके प्रभाव में कमी के रूप में देखेगा।
फिलहाल, इमामगंज विधानसभा सीट पर वोटिंग पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल में जारी है और जनता लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है। सभी की निगाहें अब 14 नवंबर को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं, जब यह साफ हो जाएगा कि क्या मांझी परिवार अपने गढ़ को फिर से सुरक्षित रख पाता है या नहीं।








