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दिल्ली में 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए भीषण कार विस्फोट की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि कुछ ही दिनों बाद जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर जिले के नौगाम पुलिस स्टेशन में एक और भयावह ब्लास्ट ने पूरे देश को हिला दिया। दिल्ली घटना में जहां 13 लोगों की मौत हुई थी, वहीं नौगाम विस्फोट भी इतना ही खतरनाक साबित हुआ जिसमें 9 लोगों की जान चली गई। दोनों घटनाओं के समय, उनकी तीव्रता और विस्फोट के बाद दिखा मंजर एक जैसा होने से जांच एजेंसियां दोनों मामलों के बीच गहराते संबंधों की पड़ताल में जुट गई हैं।
नौगाम पुलिस स्टेशन में हुआ ब्लास्ट बेहद शक्तिशाली था। धमाके की आवाज 5 से 10 किलोमीटर दूर तक सुनी गई। आसपास की इमारतों के शीशे टूट गए, दीवारें हिल गईं और थाने के अंदर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। यह दृश्य बिल्कुल वैसा ही था जैसा दिल्ली ब्लास्ट के दौरान देखा गया था। दिल्ली में आई20 कार के अंदर हुए विस्फोट ने भी पूरे इलाके में भगदड़ मचा दी थी और कार के टुकड़े कई मीटर दूर तक बिखर गए थे।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में नौगाम धमाके को एक आकस्मिक विस्फोट बताया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह ब्लास्ट संभवतः विस्फोटक पदार्थों के नमूने लेते समय हुआ। हालांकि, मामला जितना सरल दिख रहा है, उतना है नहीं। इस घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता कई गुना बढ़ा दी है।
सूत्रों के अनुसार, फरीदाबाद मॉड्यूल से बरामद सामग्रियों की जांच में यह पाया गया कि उनमें अमोनियम नाइट्रेट के साथ अत्यधिक अस्थिर और घातक विस्फोटक टीएटीपी (Triacetone Triperoxide) का मिश्रण मौजूद था। टीएटीपी दुनिया के सबसे खतरनाक प्राथमिक विस्फोटकों में से एक माना जाता है, जिसे कई अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसका अस्थिर होना ही इसे खतरनाक बनाता है क्योंकि इन्हें संभालना, स्थानांतरित करना या नमूने लेना भी जोखिम भरा होता है।
फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की रिपोर्ट ने भी इस संदेह को और मजबूत कर दिया है। दिल्ली के ब्लास्ट में इस्तेमाल हुई आई20 कार से मिले नमूनों में भी टीएटीपी की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। यह समानता सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ा संकेत है कि दोनों घटनाओं में इस्तेमाल किए गए विस्फोटक का स्रोत या मॉड्यूल संभवतः जुड़ा हो सकता है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि नौगाम पुलिस स्टेशन में टीएटीपी से जुड़े सैंपल को संभालने के दौरान धमाका हुआ, तो यह सवाल उठता है कि इतना खतरनाक विस्फोटक वहां कैसे पहुंचा? क्या इसे जांच के तहत वहां लाया गया था, या क्या यह किसी बड़े नेटवर्क की उपस्थिति का संकेत है?
दिल्ली और नौगाम के ब्लास्ट में एक और महत्वपूर्ण समानता यह है कि दोनों विस्फोट इतने शक्तिशाली थे कि आसपास की इमारतें भी कांप उठीं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तभी संभव है जब विस्फोटक उच्च क्षमता और अत्यधिक अस्थिर प्रकृति के हों।
इस पूरी घटना ने देश की सुरक्षा व्यवस्था पर कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली और जम्मू-कश्मीर दोनों संवेदनशील क्षेत्र माने जाते हैं, और इन दोनों जगहों पर इतनी कम समय में हुए बड़े धमाकों ने सुरक्षा एजेंसियों को नई रणनीति बनाने पर मजबूर कर दिया है। हालांकि पुलिस नौगाम विस्फोट को आकस्मिक घटना बता रही है, लेकिन TATP की मौजूदगी ने इसे एक संभावित आतंकी कड़ी से जोड़ दिया है।
फिलहाल दोनों घटनाओं की जांच तेज कर दी गई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), फोरेंसिक टीमें और स्थानीय पुलिस मिलकर दोनों मामलों के बीच संभावित कनेक्शन की गहराई से जांच कर रही हैं। देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह समझना है कि टीएटीपी जैसे खतरनाक विस्फोटक भारत में कैसे पहुंच रहे हैं और इन्हें कौन लोग तैयार कर रहे हैं।
अभी जांच शुरुआती चरण में है, लेकिन दोनों विस्फोटों के बीच दिख रही सामंजस्यता इस ओर संकेत करती है कि देश के सामने एक नया सुरक्षा खतरा मंडरा रहा है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट कई बड़े खुलासे कर सकती है, जो साबित करेंगे कि क्या दोनों धमाकों के पीछे एक ही हाथ है या यह सिर्फ एक खतरनाक संयोग।







