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  • 25 साल की मैथिली ठाकुर बनी बिहार की सबसे युवा विधायक: गायिका से राजनीतिक सफर में इतिहास लिखा

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    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एक नई पारी शुरू हो गई है — 25-साल की लोक गायिका मैथिली ठाकुर ने अपनी पहली राजनीतिक लड़ाई जीतते ही इतिहास रच दिया। उन्होंने दरभंगा जिले की अलीनगर सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से चुनाव लड़कर राज्य की सबसे युवा विधायक बनने का गौरव हासिल किया है। यह जीत न केवल उनके लिए बल्कि मिथिला क्षेत्र और युवा नेतृत्व के लिए भी एक बड़ा संदेश है।

    मैथिली ठाकुर की राजनीतिक जीत उनकी गायकी की पारी के तय-शुदा सफर से बहुत अलग है, लेकिन किस्सा शुरुआत से ही दिलचस्प रहा। बचपन से ही उनकी आवाज़ में एक अलग मधुरता थी और उन्होंने संगीत के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने टीवी रियलिटी शो जैसे Sa Re Ga Ma Pa Lil Champs और Indian Idol Junior में हिस्सा लिया। हालांकि शुरुआत में उन्हें इन प्रतियोगिताओं के लिए जगह नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार न मानी। बाद में उन्होंने Rising Star नामक एक और मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाई और रनों-अप की पोजीशन हासिल की।

    यह गायकी-यात्रा सोशल मीडिया पर भी जारी रही, जहाँ उन्होंने लोक और क्लासिकल संगीत के गीतों को साझा किया। उनके यूट्यूब और फेसबुक चैनलों पर उनकी मधुर धुनों ने लोगों के दिलों को छू लिया। संगीत के अलावा, मैथिली की आत्मीयता, उनका मैथिली-लोक और संस्कृति-प्रेम काफी गहरा है। वे मिथिला कला की परंपरा को आगे ले जाने की बात करती रही हैं और उन्होंने मिथिला पेंटिंग को स्कूलों में पाठ्यक्रम में शामिल कराने की घोषणा भी चुनाव के दौरान की थी।

    राजनीति में उनका कदम इस वर्ष वास्तविक हुआ, जब उन्होंने 14 अक्टूबर 2025 को बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की और अलीनगर विधानसभा सीट से उम्मीदवार घोषित हुईं। उन्होंने अपनी युवा ऊर्जा और सांस्कृतिक पहचान को राजनीतिक एजेंडे में बदलने की इच्छा जताई। चुनावी मैदान में उनका मुकाबला RJD के बिनोद मिश्रा और जन सूर्य पार्टी के अन्य उम्मीदवारों से था।

    मतगणना के दौरान मैथिली ठाकुर ने लगभग 11,730 वोटों से शानदार जीत दर्ज की। इस जीत के साथ ही वे बिहार विधानसभा में अब तक की सबसे कम उम्र की विधायक बन गई हैं। उनकी जीत सिर्फ राजनीतिक सफलता नहीं है; यह युवा संस्कृति, लोक संगीत और परंपरा के बीच एक खूबसूरत संतुलन का प्रतीक बन गई है।

    उनकी जीत का मिथिला क्षेत्र में विशेष महत्व है। स्थानीय लोग सिर्फ उनकी संगीत प्रतिभा के लिए उन्हें पहचानते नहीं थे, बल्कि उनकी जड़ों से जुड़ी संवेदनशीलता और संस्कृति-प्रेम को भी गहराई से अपनाते हैं। युवा वोटरों को आज मैथिली में एक नए प्रकार का नेतृत्व दिख रहा है — जहाँ परंपरागत मूल्यों और आधुनिक राजनीति का संगम हो सकता है।

    मैथिली ठाकुर ने अपनी जीत के बाद कहा है कि यह सिर्फ उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि उन युवाओं की जीत है जो अपने सपनों को राजनीति के माध्यम से साकार करना चाहते हैं। उन्होंने जनता की उम्मीदों को पूरा करने का संकल्प लिया और कहा कि वे अपनी पहली पारी में क्षेत्र के विकास, शिक्षा और संस्कृतिक संरक्षण पर काम करेंगी।

    उनकी सफलता उन युवाओं को प्रेरणा देती है जो संगीत से जोड़कर समाज-सेवा की राह पर कदम बढ़ाना चाहते हैं। मिथिला की संगीतमय बेटी आज बिहार विधानसभा में अपनी आवाज़ के साथ मौजूद है — और यह सिर्फ शुरुआत है।

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