महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों के बीच महायुति में खटपट की खबर सामने आई है। बीजेपी द्वारा सहयोगी शिवसेना के नेताओं को अपने दल में शामिल करने के कदम से एकनाथ शिंदे गुट नाराज है। इस बीच उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे दिल्ली रवाना हो गए हैं, जिससे राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है।
राज्य में नगर पंचायत और नगर परिषद के चुनाव अगले महीने 2 दिसंबर को होने हैं। इस चुनाव से पहले ही महायुति के घटक दलों के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है। बीजेपी द्वारा लगातार महायुति के नेताओं को अपने पक्ष में लेने की कोशिश की जा रही है, जिससे शिंदे गुट की नाराजगी और बढ़ गई है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि शिंदे ने दिल्ली रवाना होने का फैसला इसीलिए किया कि वे केंद्र स्तर पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकें और महायुति के अंदर चल रही असंतोष की स्थिति को देखते हुए रणनीति बना सकें।
हाल ही में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली महाराष्ट्र सरकार ने बाल ठाकरे स्मारक के न्याय समिति के अध्यक्ष और सदस्यों की घोषणा की थी। इस सूची में शिंदे को कोई पद नहीं दिया गया, बल्कि उद्धव ठाकरे को चेयरमैन बनाया गया। इसके अलावा आदित्य ठाकरे और सुभाष देसाई को इसमें शामिल किया गया। यह कदम शिंदे गुट के अंदर नाराजगी का कारण बना। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बाल ठाकरे की विरासत और स्मारक पर नियंत्रण के मामले में शिंदे गुट और उद्धव ठाकरे गुट के बीच तनाव बढ़ सकता है।
बीजेपी और शिवसेना के बीच यह तनाव महायुति के भीतर असंतोष को उजागर कर रहा है। शिंदे गुट का आरोप है कि बीजेपी लगातार उनके घटक दल के नेताओं को अपने में शामिल कर महायुति के अंदर सत्ता संतुलन बिगाड़ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह खटपट केवल चुनावी रणनीति तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव की संभावनाओं को जन्म दे सकती है।
उपमुख्यमंत्री शिंदे के दिल्ली जाने के फैसले से राज्य में सियासी माहौल और गरमा गया है। राजनीतिक चर्चाओं में कहा जा रहा है कि शिंदे केंद्र में बीजेपी नेतृत्व से मुलाकात कर अपनी नाराजगी और महायुति के अंदर पार्टी की असंतोषपूर्ण स्थिति को स्पष्ट करेंगे। इसके साथ ही आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए रणनीति बनाने और सहयोगी दलों के बीच संतुलन कायम करने के प्रयास भी किए जाएंगे।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिंदे गुट की नाराजगी सिर्फ बीजेपी के रवैए तक ही सीमित नहीं है, बल्कि महायुति में सत्ता विभाजन और गुटबाजी के संकेत भी मिल रहे हैं। पिछले दिनों आयोजित बैठक और फैसलों के बाद राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि महाराष्ट्र में अगले कुछ महीनों में सियासी हलचल और तेज हो सकती है।
राज्य के राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि महायुति के अंदर यह खटपट आगामी चुनावों में गठबंधन की स्थिरता पर असर डाल सकती है। शिंदे गुट के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे महायुति के घटक दलों की निष्पक्ष भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए केंद्र स्तर पर अपनी बात रखेंगे। वहीं, बीजेपी ने इस मामले में फिलहाल कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
कुल मिलाकर महाराष्ट्र की सियासी तस्वीर में एक बार फिर बदलाव की संभावना है। महायुति में चल रही खटपट और एकनाथ शिंदे के दिल्ली रवाना होने के कदम से यह साफ हो गया है कि राज्य की राजनीति आने वाले समय में और भी दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण होने वाली है। आगामी स्थानीय निकाय चुनाव और इसके परिणाम राज्य में सत्तासंघर्ष के भविष्य को तय करेंगे।








