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देश की पहली महिला प्रधानमंत्री और भारत की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों में शामिल इंदिरा गांधी की 108वीं जयंती पर आज पूरे देश ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें नमन करते हुए उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने कठिन परिस्थितियों में देश का नेतृत्व किया और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए। वहीं कांग्रेस नेताओं ने पारंपरिक रूप से दिल्ली स्थित शक्ति स्थल पहुँचकर पूर्व प्रधानमंत्री को अपनी श्रद्धांजलि दी। सोनिया गांधी, राहुल गांधी तथा अन्य वरिष्ठ नेताओं ने उनकी समाधि पर पुष्प अर्पित कर उनके संघर्षपूर्ण जीवन को स्मरण किया।
इंदिरा गांधी भारतीय राजनीति का ऐसा नाम है, जिसकी यात्रा राष्ट्र निर्माण की निर्णायक कहानियों से भरी रही। उनका जन्म 19 नवंबर 1917 को इलाहाबाद में हुआ था। वे पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुत्री थीं और बचपन से ही स्वतंत्रता आंदोलन के वातावरण में रहीं। देश की आजादी की लड़ाई में उनका योगदान बाल चरखा संघ और वानर सेना की स्थापना से शुरू होता है, जिसके माध्यम से उन्होंने छोटे बच्चों और युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ने का प्रयास किया। उस समय कम उम्र में ही उनमें नेतृत्व की जो झलक दिखाई दी, वही आगे चलकर भारत की राजनीति का प्रमुख आधार बनी।
इंदिरा गांधी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस संगठन से की और 1966 में देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनकर उन्होंने इतिहास रच दिया। उनके नेतृत्व में भारत ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल कीं, जिनमें 1971 का भारत-पाक युद्ध और बांग्लादेश का निर्माण सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस युद्ध के बाद उन्हें पूरे विश्व ने एक मजबूत महिला नेता के रूप में पहचाना। उनके निर्णयों में दृढ़ता और साहस साफ दिखाई देता था, इसी कारण उन्हें ‘आयरन लेडी’ यानी लौह महिला कहा गया।
उनकी सरकार के समय हरित क्रांति ने भारत के कृषि क्षेत्र को नए आयाम दिए। किसान उत्पादन क्षमता बढ़ी और देश खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना। हालांकि उनका कार्यकाल विवादों से भी घिरा रहा, जिसमें 1975 में लगाया गया आपातकाल सबसे प्रमुख है। इस फैसले को लेकर राजनीतिक बहस आज भी जारी है, लेकिन उनके समर्थक इसे उस समय की परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक कदम बताते हैं।
इंदिरा गांधी की राजनीतिक यात्रा उतार-चढ़ाव से भरी रही, परंतु उनका व्यक्तित्व हमेशा अत्यधिक प्रभावशाली रहा। वे विश्व राजनीति में भारत की मजबूत आवाज मानी जाती थीं। उनके शासनकाल में भारत ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान को मजबूत किया। उनके भाषण, निर्णय और कार्यशैली आज भी राजनीतिक विश्लेषकों, शोधकर्ताओं और युवा पीढ़ी के लिए अध्ययन का विषय बने हुए हैं।
1984 में उनकी हत्या के बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। उनके निधन को भारतीय राजनीति के लिए एक युग का अंत बताया गया। हर वर्ष उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर लोग उनके ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। आज, उनकी 108वीं जयंती पर देश ने एक बार फिर उस महिला नेता को नमन किया, जिसने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और निर्णायक नेतृत्व से भारत को वैश्विक पटल पर नई पहचान दिलाई।
सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने श्रद्धांजलि देने के बाद कहा कि इंदिरा गांधी का जीवन राष्ट्रहित और त्याग की मिसाल रहा है। कांग्रेस नेताओं के अनुसार देश के विकास, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के मुद्दों पर उनका दृष्टिकोण आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक है। वहीं आम नागरिक और समर्थक भी शक्ति स्थल पर उन्हें याद करते रहे और सोशल मीडिया पर लाखों पोस्ट के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इंदिरा गांधी की जयंती केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका, नेतृत्व और दृढ़ता का प्रतीक भी है। आज उनका जीवन प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है, जिसे भारत लंबे समय तक याद रखेगा।








