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राजस्थान की समृद्ध लोक-संस्कृति एक बार फिर पूरे प्रदेश में रंग बिखेरने के लिए तैयार है। पारंपरिक लोक नृत्य घूमर, जो राजस्थान की अस्मिता, गरिमा और सांस्कृतिक संवेदना का प्रतीक माना जाता है, आज शाम से राज्य के सात प्रमुख शहरों में अपनी अद्भुत छटा फैलाएगा। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर और भरतपुर में होने वाले इस भव्य मेगा इवेंट को लेकर उत्साह चरम पर है। प्रदेशभर में सांस्कृतिक संस्थाएं, कलाकार और स्थानीय प्रशासन मिलकर इस विशाल आयोजन को सफल बनाने में जुटे हुए हैं। राजस्थान पर्यटन विभाग और स्थानीय सांस्कृतिक परिषदों द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम शाम 4:30 बजे से शुरू होगा, जिसमें हजारों की संख्या में कलाकार और दर्शक शामिल होने की उम्मीद है।
घूमर नृत्य राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है, जिसे दुनिया भर में विशेष सम्मान प्राप्त है। विशेष अवसरों, त्यौहारों, विवाह समारोहों और सामाजिक आयोजनों में प्रस्तुत किया जाने वाला यह नृत्य महिलाओं की गरिमा, संस्कृति की सुंदरता और परंपराओं के गहरे जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है। आज होने वाला यह मेगा इवेंट न केवल राजस्थान की कला को प्रोत्साहित करेगा बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी प्रदेश की जीवंत सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराएगा।
राजधानी जयपुर में इस आयोजन को लेकर विशेष तैयारी की गई है। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों से घिरे वेन्यू पर शाम ढलते ही लोक वाद्ययंत्रों की मधुर धुनें और परंपरागत पोशाकों में सजी महिलाएं घूमर के मनमोहक घेरों के साथ समूचे वातावरण को रंगीन बना देंगी। स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ राज्यभर के विभिन्न जिलों से आई लोक कला संस्थाएं भी इसमें भाग लेंगी। जयपुर में होने वाला कार्यक्रम सबसे बड़ा और आकर्षण का केंद्र रहने वाला है, जहां बड़ी संख्या में सैलानियों के पहुंचने की संभावना है।
इसी प्रकार जोधपुर और उदयपुर में भी कार्यक्रम को लेकर गर्मजोशी देखी जा रही है। नीली नगरी जोधपुर अपने ऐतिहासिक किलों और महलों की पृष्ठभूमि के बीच घूमर के रंगों से सराबोर होगा। वहीं लेक सिटी उदयपुर झीलों और रोशनी की सजावट के बीच इस अद्भुत लोक नृत्य के लिए विशेष मंच तैयार कर चुका है। कोटा, अजमेर, बीकानेर और भरतपुर में भी स्थानीय कलाकारों और महिलाओं के बड़े समूह इस आयोजन में हिस्सा लेने के लिए उत्सुक हैं। हर शहर में वेन्यू को परंपरागत राजस्थानी थीम से सजाया गया है, जहां संस्कृति, विरासत और लोककला की झलक साफ दिखाई देती है।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की लोक-संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और लोक कलाकारों को मंच प्रदान करना है। राज्य सरकार और पर्यटन विभाग का मानना है कि इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल पर्यटन को बढ़ावा देते हैं बल्कि स्थानीय कलाकारों को सम्मान और आर्थिक सहयोग भी प्रदान करते हैं। घूमर जैसे लोक नृत्य विश्व स्तर पर लोकप्रिय हो रहे हैं और राजस्थान की पहचान को वैश्विक पटल पर मजबूत बना रहे हैं। इस मेगा इवेंट के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने के साथ-साथ जनता को लोक-संगीत और नृत्य की समृद्ध परंपरा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
शहरों में कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा, यातायात और व्यवस्था के लिए भी विशेष प्रबंध किए गए हैं। पुलिस और प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण, पार्किंग और यातायात योजना तैयार की है ताकि दर्शकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। आयोजन स्थल पर चिकित्सा सुविधाएं, जलपान केंद्र और सहायता डेस्क भी स्थापित की गई हैं। आयोजक समितियों ने लोगों से समय पर पहुंचने और कार्यक्रमों का शांतिपूर्वक आनंद लेने की अपील की है।
आज शाम से शुरू होने वाले इस सांस्कृतिक उत्सव का इंतजार न सिर्फ कलाकारों को है, बल्कि आम नागरिक भी घूमर के रंगों में डूबने के लिए उत्साहित हैं। राजस्थान की धरती एक बार फिर अपने लोकगीतों, लोकनृत्य और संस्कृति की अनुपम विरासत का साक्षी बनने जा रही है।








