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  • इंटरनेशनल मेन्स डे 2025: कब और कैसे हुई शुरुआत? जानें इस खास दिन का महत्व और इतिहास

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    हर साल 19 नवंबर को दुनिया भर में इंटरनेशनल मेन्स डे मनाया जाता है। यह दिन उन पुरुषों को सम्मान देने का अवसर है, जो अपने जीवन में कई भूमिकाओं—पिता, पुत्र, भाई, साथी, मित्र और मार्गदर्शक—को पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाते हैं। दुनिया अक्सर महिलाओं के योगदान का जश्न मनाने के लिए कई विशेष दिन मनाती है, लेकिन पुरुषों के योगदान की चर्चा कई बार पीछे छूट जाती है। ऐसे में इंटरनेशनल मेन्स डे पुरुषों के प्रयासों, संघर्षों और समाज में उनके सकारात्मक योगदान को स्वीकार करने का एक सशक्त माध्यम बनकर सामने आता है।

    इस साल इंटरनेशनल मेन्स डे की थीम है “Celebrating Men and Boys”, जिसमें पुरुषों और बालकों के प्रति सम्मान, प्रोत्साहन और सकारात्मक बदलाव को बढ़ावा दिया जा रहा है।

    कब और कैसे शुरू हुआ इंटरनेशनल मेन्स डे?

    बहुत कम लोग जानते हैं कि इंटरनेशनल मेन्स डे की शुरुआत बहुत पुरानी नहीं है। इसे पहली बार 19 नवंबर 1999 को मनाया गया था। इस दिन को मनाने का विचार त्रिनिदाद और टोबैगो के डॉक्टर डॉ. जेरोम टीलक्सिंग ने दिया था। वे अपने पिता के जन्मदिन को एक यादगार अवसर के रूप में मनाना चाहते थे और साथ ही पुरुषों के समाज में योगदान को दुनिया के सामने लाना चाहते थे।

    डॉ. टीलक्सिंग ने कहा था कि जिस तरह दुनिया में महिलाओं के अधिकारों, कल्याण और उपलब्धियों को सम्मान देने के लिए वीमेन डे मनाया जाता है, उसी तरह पुरुषों के योगदान को भी मान्यता मिलनी चाहिए। उनकी इसी सोच ने इंटरनेशनल मेन्स डे की शुरुआत का रास्ता खोला।

    आज यह दिन दुनिया के 80 से अधिक देशों में मनाया जाता है और लगातार इसका प्रभाव बढ़ रहा है।

    इंटरनेशनल मेन्स डे क्यों मनाया जाता है?

    इस दिन का उद्देश्य केवल पुरुषों की प्रशंसा करना ही नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों पर ध्यान दिलाना भी है। कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:

    पुरुषों की मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को पहचानना और उनके समाधान के लिए जागरूकता बढ़ाना।
    लड़कों और पुरुषों को बेहतर इंसान बनने, जिम्मेदार व्यवहार अपनाने और समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना।
    समाज में पुरुषों के अच्छे कार्यों, योगदानों और त्याग को पहचानकर उनका मनोबल बढ़ाना।
    जेंडर बैलेंस और बराबरी को बढ़ावा देना, जिसमें पुरुष और महिलाएं दोनों अपनी-अपनी भूमिकाओं का सम्मान और मूल्य समझ सकें।

    पुरुषों के योगदान को क्यों मनाना जरूरी है?

    हमारी जिंदगी में पिता का मार्गदर्शन, भाई का साथ, दोस्त का समर्थन, पार्टनर का विश्वास और बेटे की खुशियां उतनी ही महत्वपूर्ण हैं, जितनी किसी भी रिश्ते की। लेकिन अक्सर पुरुषों की भावनाओं, संघर्षों और मानसिक दबाव पर कम बात की जाती है।

    इंटरनेशनल मेन्स डे इसी सोच को बदलने का प्रयास है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि पुरुष भी संवेदनशील होते हैं, समर्थन और सराहना के हकदार हैं और उनकी मेहनत समाज को मजबूत बनाती है।

    कैसे मनाया जाता है यह दिन?

    कई देशों में इस दिन विभिन्न कार्यक्रम, सेमिनार, कैंपेन और सोशल मीडिया कैंपेन चलाए जाते हैं। स्कूलों और कॉलेजों में लड़कों को प्रेरित करने वाले कार्यक्रम होते हैं। कई संगठन पुरुषों के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर वर्कशॉप आयोजित करते हैं।

    लोग अपने पिता, भाई, पति या मित्र को धन्यवाद संदेश भेजते हैं, उनके साथ समय बिताते हैं और उनके योगदान का सम्मान करते हैं।

    इंटरनेशनल मेन्स डे पुरुषों के योगदान, संघर्ष और संवेदनशीलता को मान्यता देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि किसी परिवार या समाज की संरचना संतुलित तभी होती है, जब पुरुषों और महिलाओं दोनों के योगदान को समान रूप से सम्मान मिले।

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