उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। करमचंद्रपुर गांव की रहने वाली कक्षा 8 की छात्रा को उसके स्कूल में ही शिक्षक ने होमवर्क पूरा न करने के कारण बेरहमी से पीटा। घटना के अनुसार, शिक्षक ने पानी की टंकी के नल में लगे प्लास्टिक पाइप का उपयोग कर छात्रा की करीब 30 बार पिटाई की। इस अत्यधिक पिटाई के कारण छात्रा के दाहिने हाथ में गंभीर सूजन आ गई।
छात्रा की मां, सोनी, ने बुधवार को थरियांव थाना में तहरीर दी। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी नौशीन केंद्रीय विद्यालय जूनियर हाईस्कूल भिटौरा में पढ़ती है। सोमवार को जब छात्रा स्कूल गई थी, तो शिक्षक होमवर्क चेक कर रहे थे। बेटी का होमवर्क पूरा नहीं होने पर शिक्षक गुस्से में आ गए और पानी की टंकी के पाइप से छात्रा को मारने लगे।
अलोपकारी रूप से शिक्षक ने छात्रा के हाथ की गदेली पर ताबड़तोड़ करीब 30 बार पाइप से हमला किया। इतना अधिक मारने से छात्रा के हाथ में गंभीर सूजन हो गई और वह रोते हुए घर पहुंची। छात्रा की मां ने स्कूल जाकर शिक्षक से पिटाई के बारे में सवाल किया, लेकिन आरोप है कि इस दौरान शिक्षक ने अभद्रता की और महिला को विद्यालय से भगा दिया।
छात्रा की गंभीर चोट के कारण उसे तुरंत स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने छात्रा के हाथ की चोट की गंभीरता को देखते हुए ऑपरेशन की सलाह दी है। अब छात्रा की सेहत पर निगरानी रखी जा रही है और डॉक्टरों द्वारा उचित उपचार किया जा रहा है।
इस मामले में पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। स्थानीय प्रशासन और स्कूल प्रबंधन को इस घटना की गंभीरता का आभास कराया गया है। शिक्षा विशेषज्ञों और बाल सुरक्षा अधिकारियों ने इसे स्कूल में अनुचित शारीरिक दंड का गंभीर उदाहरण बताया है और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल छात्रा की शारीरिक और मानसिक सेहत पर असर डालती हैं, बल्कि समाज में शिक्षा प्रणाली और शिक्षक-छात्र संबंधों पर भी प्रश्न उठाती हैं। बच्चों को शिक्षा देने के लिए उन्हें सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण प्रदान करना प्रत्येक शिक्षक और विद्यालय की जिम्मेदारी है।
फतेहपुर की यह घटना एक चेतावनी की तरह है कि स्कूलों में बच्चों के प्रति हिंसा को कभी भी सामान्य नहीं माना जाना चाहिए। प्रशासन, शिक्षक और अभिभावक मिलकर ही ऐसी घटनाओं को रोकने में सक्षम हैं। इस घटना ने यह भी उजागर किया है कि शिक्षा के नाम पर शारीरिक दंड बच्चों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है और इससे बच्चों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।








