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भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत होता जा रहा है और इसी कड़ी में अमेरिका ने भारत को 93 मिलियन डॉलर के महत्वपूर्ण हथियारों की बिक्री को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर के बीच आया यह फैसला दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को और मजबूती देता है। इस डील को भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी का अहम कदम माना जा रहा है, क्योंकि इसके तहत भारत को अत्याधुनिक जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइलें और एक्सकैलिबर प्रिसिजन-गाइडेड आर्टिलरी राउंड्स मिलेंगे। ये दोनों सिस्टम आधुनिक युद्ध के दौर में बेहद प्रभावी माने जाते हैं और दुश्मन के लिए किसी यमराज से कम नहीं हैं।
डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (DSCA) ने अमेरिकी कांग्रेस को इस प्रस्तावित बिक्री की औपचारिक जानकारी दे दी है। भारत की मांग के अनुसार इस पैकेज में 100 एफजीएम-148 जेवलिन मिसाइलें शामिल हैं, जिन्हें दुनिया की सबसे खतरनाक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों में गिना जाता है। ये मिसाइलें ‘फायर एंड फॉरगेट’ क्षमता से लैस होती हैं, यानी एक बार लक्ष्य लॉक होने के बाद इसे छोड़ा जाता है और फिर यह खुद-ब-खुद लक्ष्य को नेस्तनाबूद कर देती है। युद्धभूमि में टैंकों, बख्तरबंद गाड़ियों और हैवी मशीनरी को तबाह करने में इसकी दक्षता किसी भी सेना को रणनीतिक बढ़त दिलाती है।
इस डील में 25 हल्के कमांड लॉन्च यूनिट्स भी दिए जाएंगे, जो मिसाइल को दागने के लिए उपयोग किए जाते हैं। भारत ने इस सौदे में सिर्फ हथियार ही नहीं बल्कि इनके संचालन, रखरखाव और लंबी अवधि तक उपयोग के लिए जरूरी सपोर्ट सिस्टम भी शामिल किया है। इसमें लाइफसाइकिल सपोर्ट, ऑपरेटर ट्रेनिंग, रिफर्बिशिंग, सुरक्षा निरीक्षण और अन्य तकनीकी सहायता शामिल हैं। इन अतिरिक्त सेवाओं के माध्यम से भारत को इन हथियारों के प्रभावी उपयोग की पूरी क्षमता हासिल हो सकेगी।
इसके अलावा, इस रक्षा पैकेज में 216 एक्सकैलिबर प्रिसिजन-गाइडेड आर्टिलरी राउंड्स भी शामिल हैं। एक्सकैलिबर को आधुनिक आर्टिलरी तकनीक के शिखर पर माना जाता है। यह जीपीएस-गाइडेड राउंड्स हैं, जो लंबी दूरी पर भी कुछ ही मीटर की सटीकता के साथ लक्ष्य को भेद सकते हैं। सीमाई सुरक्षा, कंट्र-इंसर्जेंसी ऑपरेशन और उच्च जोखिम वाले सैन्य अभियानों में इनका उपयोग बेहद कारगर साबित होता है। आर्टिलरी सिस्टम का यह आधुनिकीकरण भारतीय सेना को भविष्य की युद्ध आवश्यकताओं के अनुरूप मजबूत बनाता है।
अमेरिका और भारत के बीच यह रक्षा सौदा ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक राजनीति में अस्थिरता बढ़ी हुई है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यह डील भारत को हाई-टेक हथियारों तक पहुंच देकर उसकी सामरिक क्षमता को मजबूत करेगी। भारत के लिए यह डील सिर्फ उपकरण खरीदना भर नहीं है, बल्कि भविष्य में रक्षा सहयोग और तकनीकी साझेदारी की दिशा में बड़ा कदम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा दिखाता है कि अमेरिका भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देख रहा है और उसकी रणनीतिक भूमिका को स्वीकार कर रहा है। दूसरी ओर, भारतीय सेना के लिए यह आधुनिक तकनीक उसे भविष्य की चुनौतियों से निपटने में और सक्षम बनाएगी। यह डील भारतीय रक्षा क्षमता और भारत-अमेरिका संबंधों, दोनों के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।








