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नासिक जिले के सिन्नर बस स्टैंड पर बुधवार की सुबह एक दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) की एक बस अचानक अनियंत्रित होकर प्लेटफॉर्म पर चढ़ गई और वहां खड़े लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। इस भयावह हादसे में 9 वर्षीय आदर्श बोराड़े की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी मां तथा दो अन्य लोग घायल हुए। बस के प्लेटफॉर्म पर चढ़ते ही वहां मौजूद यात्रियों में चीख-पुकार मच गई और लोग इधर-उधर भागने लगे, लेकिन तेज रफ्तार और अनियंत्रण के चलते हादसा रोकना संभव नहीं हो सका।
घटना सुबह करीब 10:45 बजे घटी, जब बस सिन्नर डिपो से देवपुर के लिए रवाना होने वाली थी। चालक बस को प्लेटफॉर्म नंबर तीन पर खड़ा कर रहा था, तभी अचानक वाहन अपना नियंत्रण खो बैठा। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बस ने अचानक स्पीड पकड़ ली और सीधे भीड़ की ओर बढ़ गई। CCTV फुटेज में भी साफ दिखाई देता है कि बस स्टैंड में प्रवेश कर रही बस अचानक दाईं ओर मुड़ती है और प्लेटफॉर्म पर चढ़ते हुए यात्रियों को जोरदार टक्कर मार देती है।
मरने वाले बच्चे की पहचान आदर्श बोराड़े (9 वर्ष) के रूप में हुई है, जो सिन्नर तालुका के दापुर गांव के रहने वाले थे। उनकी मां गौरी बोराड़े, जो प्लेटफॉर्म पर ही थीं, भी गंभीर रूप से घायल हुई हैं। इसके अलावा विथाबाई और ज्ञानेश्वर भालेराव नामक दो अन्य लोग भी दुर्घटना का शिकार बने। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और दुकान संचालक घटनास्थल की ओर दौड़े और घायलों को बाहर निकालकर उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया।
पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बस चालक को हिरासत में ले लिया है। प्रारंभिक जांच में ब्रेक फेल होने की आशंका जताई गई है, हालांकि चालक की भूमिका और वाहन की तकनीकी स्थिति दोनों की विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस इस हादसे को ‘गैर इरादतन हत्या’ के मामले के रूप में दर्ज करने की प्रक्रिया में है। यातायात विभाग भी अपनी अलग तकनीकी जांच कर रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घटना चालक की गलती थी या बस में कोई गंभीर यांत्रिक खराबी थी।
MSRTC प्रशासन ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही घायलों के संपूर्ण इलाज का खर्च निगम द्वारा उठाया जाएगा। इस घोषणा के बावजूद स्थानीय लोग और यात्री MSRTC की मेंटेनेंस प्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बसें खराब स्थिति में सड़कों पर चलाई जा रही हैं, जिनकी नियमित सर्विसिंग भी समय पर नहीं की जाती।
हादसे के बाद बस स्टैंड का माहौल बेहद तनावपूर्ण रहा। लोग गुस्से में थे और उन्होंने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की। स्थानीय निवासियों ने कहा कि बस स्टैंड पर सुरक्षा इंतजाम बेहद कमजोर हैं। कई बार चालक बसों को गलत दिशा से मोड़ते हुए प्लेटफॉर्म पर घुसते हैं, जिससे खतरा बढ़ जाता है। उनका यह भी कहना है कि अगर बस स्टैंड पर सुरक्षा बैरिकेड्स लगे होते तो शायद इस हादसे की गंभीरता कुछ कम हो सकती थी।
डिवीजनल ट्रैफिक अधिकारी ने एक जांच समिति गठित करते हुए कहा कि हादसे के कारणों को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। समिति बस की सर्विस हिस्ट्री, ब्रेक सिस्टम, चालक की ड्यूटी शिफ्ट और दुर्घटना के समय परिस्थितियों का विश्लेषण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह दुखद घटना नासिक और सिन्नर क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ खड़ी करती है। लगातार बढ़ती बस दुर्घटनाओं के बाद लोग अब परिवहन विभाग से अधिक कड़े नियम, नियमित मेंटेनेंस, ड्राइवर ट्रेनिंग और बस स्टैंड पर सुरक्षा सुधार की मांग कर रहे हैं। आदर्श बोराड़े जैसे मासूम की मौत ने सभी को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हमारी सार्वजनिक बस सेवाएँ यात्रियों के लिए वास्तव में सुरक्षित हैं।
यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में सुरक्षा को प्राथमिकता न देना कितना खतरनाक साबित हो सकता है। उम्मीद है कि इस घटना के बाद सरकार और परिवहन विभाग स्थिति की गंभीरता को समझते हुए ठोस कदम उठाएंगे, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।








